मोदी से लड़ना है तो पहले मोदी बनो, बस याद रहे मोदी हमेशा एक ही रहेगा

अपने बचपन के दिनों में मैं अपने घर के बाहर सड़कों पर ऐसे ट्रकों को आते जाते देखता था जिन पर गन्ने लदे होते थे.

एक ट्रक पर कई टन गन्ने लदे होते थे और ट्रक से आधे लटके हुवे होते थे. ऐसी ट्रकें बहुत धीमे चलती थी और यही कारण था कि जब भी ये ट्रक किसी रिहायशी इलाकों से होकर गुजरते, वहां गन्ने लूटने वालों की भीड़ लग जाती.

मुझे याद है, एक बार ऐसा ही एक ट्रक मेरे घर के ठीक सामने खराब हो गया और जैसे ही ट्रक रुका. वहां गन्ने लूटने वालों की भीड़ लग गयी.

ड्राइवर ने लोगों को हटाने की बहुत कोशिशें की, लेकिन सैकड़ों लोगों की भीड़ भला एक आदमी का कहा क्यों मानती? जब तक ट्रक वहां खड़ा रहा तब तक ना जाने कितने लोगों ने गन्ने लुटे होंगे.

इस घटना को आज करीब 20 साल हो गए लेकिन वो दृश्य आज तक मेरी आँखों के सामने नाचता है.

जब लोग कहते हैं कि मोदी देश को मूर्ख बना रहे हैं… जब लोग कहते हैं कि मोदी तो अडानी, अम्बानी, टाटा, बिड़ला के एजेंट हैं… तो मुझे उसी गन्ने से लदे हुए ट्रक की याद आ जाती है.

मोदी ने भारत जैसे देश को महान बनाने की चुनौती स्वीकार की है. उस देश को जो स्वघोषित रूप से महान है.

जिस देश में ट्रेन या बस दुर्घटनाओं के बाद सबसे पहले घायल और मृतकों के गहने तक लूट लिए जाते हों.

जिस देश में ऑइल टैंकर पलट जाने पर ड्राइवर की जान बचाने के बजाय लोग पेट्रोल लूटना ज्यादा पसंद करते हों.

जिस देश में एक बोतल दारु के लिए लोग अपना वोट बेच देते हों, जिस देश में ईमानदारों को बेवक़ूफ़ घोषित कर दिया जाता हो.

जिस देश में लोगों को ये भी समझाना पड़े कि दीर्घशंका निवारण के लिए टॉयलेट जाना चाहिए और उसके उपरांत हाथ साबुन से धोना चाहिए.

जिस देश में सुविधा को अधिकार समझ लिया जाता हो… जिस देश में ट्रेन से लेकर प्लेन तक… और दवाई से लेकर दारु तक के लिए लाइन लगानी पड़े… उस देश को महान बनाने का संकल्प लेने वाला इंसान भी अपने आप में महान है.

दुनिया का सबसे आसान काम है दूसरों में दोष निकलना… आप मोदी में भी दोष निकाल सकते हैं… बिलकुल निकालिए.

मोदी भगवान नहीं है… उनसे भी गलती हो सकती है… हो सकता है मोदी नाटकबाज़ हों… हो सकता है मोदी जातिवादी हों….

हो सकता है मोदी अमीरों को फायदा भी पहुंचा रहे हो… हो सकता है मोदी, अमेरिका और पाकिस्तान के दबाव में हो…

आप कुछ भी कह सकते हैं मोदी को… आखिर वो हैं क्या? एक प्रधान मंत्री ही तो हैं 5 साल के लिए….

JNU वाले तो मोदी को भड़वा भी कह देते हैं…. केजरीवाल तो चोर कहता है मोदी को…. सोनिया अम्मी मौत का सौदागर कहती है….

युवराज फेकू कहते हैं…. ममता तानाशाह कहती हैं…. लालू ने मोदी को नौटंकीबाज़ कहा है…. कुल मिलाकर मोदी की हैसियत ही क्या है?

स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र लोकतंत्र में आप भारत के प्रधानमंत्री पद पर बैठे हुए व्यक्ति को गालियां भी दे सकते हैं….

लेकिन एक चीज़ है जो आप मोदी से छीन नहीं सकते…. क्योंकि ये चीज़ छीनी नहीं जा सकती… ये पैदा करनी पड़ती है…

और ये चीज़ है अपनी धरती माता, अपनी भारत माता के प्रति मोदी का अथाह और निश्छल प्रेम….

हाँ ये वो चीज़ है जो आप मोदी से नहीं छीन सकते… आप मोदी से उनकी कुर्सी छीन सकते हैं लेकिन वो संकल्प… वो महान संकल्प नहीं छीन सकते जो उन्होंने भारत को महान बनाने के लिए लिया हुआ है.

आप मोदी से वो साहस नहीं छीन सकते जो उन्हें प्रधानमंत्री होते हुए भी ये बोलने के लिए प्रेरित करता है कि “हाँ मै एक हिन्दू राष्ट्रवादी हूँ”.

आप मोदी से नहीं छीन सकते हैं उनकी बेबाकी… नहीं छीन सकते है काम के प्रति उनका उत्साह…. नहीं छीन सकते हैं उनके कड़े और महान निर्णय लेने की क्षमता…

आप नहीं छीन सकते हैं वो धैर्य, जो 10 घंटे सीबीआई की जांच और गहन पूछताछ के दौरान भी नहीं टूटा….

और अंत में आप नहीं छीन सकते है वो 56 इंच सीना, जो उन्हें यानी मोदी को मोदी बनाता है….

ऐसा देश, जहाँ हर इंसान जन्म से भ्रष्टाचार और चोरी के गुण लेकर पैदा होता है…. जहाँ एक गन्ने से लदे ट्रक को भी लोग लूटने से बाज नहीं आते….

ऐसे देश को महान बनाने का संकल्प लेने वाला कोई साधारण व्यक्तित्व का इंसान नहीं हो सकता….

मोदी को दिन रात कोसने वालों… मोदी से लड़ना है तो पहले मोदी बनो… लेकिन याद रखना मोदी हमेशा एक ही रहेगा.

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