अनुपम मिश्र : पानी को समर्पित नदी विलीन हुई समंदर में

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पूरे भारत में घूम-घूम कर तालाब को जीवन देने वाले गांधीवादी और पर्यावरणविद अनुपम मिश्र का निधन बहुत दुखद है.

जब जनसत्ता शुरू हुआ था तो अनुपम मिश्र हर हफ्ते पर्यावरण और पानी से जुड़े लेख लिखते थे. प्रभाष जोशी के वह मित्र थे. लेकिन जनसत्ता आते तो बाकी साथियों से भी मिलते.

गांधी शांति प्रतिष्ठान में रहते थे सो पैदल ही आते थे. बहुत ही मामूली खादी के कपड़े और साधारण सी चप्पल पहने जब वह आते तो लगता जैसे साफ पानी की कोई नदी आ गईं हो.

बाद में पता चला कि अनुपम जी प्रसिद्ध कवि भवानी प्रसाद मिश्र के सुपुत्र हैं. जे पी ने जब चंबल के डाकुओं का समर्पण करवाया था तब उन के साथ अनुपम मिश्र भी थे. प्रभाष जोशी भी.

चिपको आंदोलन से भी वह जुड़े रहे. बहुत सारे काम किए. किताबें और लेख लिखे अनुपम ने पर जल्दी ही वह पानी को समर्पित हो गए. पानी में भी तालाबों के पानी पर.

तालाबों के पानी को वह खरा बताते थे. जब तक भारत में तालाब रहेंगे, अनुपम मिश्र जीवित रहेंगे, पानी बन कर. उन्हें प्रणाम !

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