उपयुक्तता और योग्यता के आधार पर लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत बने नए सेना अध्यक्ष

नई दिल्ली. सरकार ने उप थल सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत को नया थल सेना प्रमुख नियुक्त किया है.

इसके साथ ही उप वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल बीएस धनोआ को भारतीय वायुसेना का नया प्रमुख बनाया गया.

रावत जनरल दलबीर सिंह के बाद यह कार्यभार संभालेंगे और धनोआ वायु सेना प्रमुख अरूप राहा की जगह कार्यभार संभालेंगे.

रक्षा मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा, ‘सरकार ने उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत को नया सेना प्रमुख नियुक्त करने का फैसला किया है और यह नियुक्ति 31 दिसंबर दोपहर बाद से प्रभावी होगी’.

मंत्रालय ने यह भी ट्वीट किया कि एयर मार्शल बीएस धनोआ 31 दिसंबर दोपहर बाद से वायु सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालेंगे.

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि नए सेना प्रमुख के चयन के लिए उपयुक्तता एवं योग्यता पर ध्यान केंद्रित किया गया.

लेफ्टिनेंट जनरल रावत को पूर्वी कमान के प्रमुख एवं वरिष्ठतम थलसेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और दक्षिणी कमान के प्रमुख पी एम हारिज से आगे बढ़ाया गया है.

पहले भी टूटा है वरिष्ठता क्रम

सेना में वरिष्ठ अधिकारी की जगह अन्य अधिकारी को सेना प्रमुख बनाना नई बात नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में ऐसा नहीं देखा गया है.

वर्ष 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लेफ्टिनेंट जनरल एस वैद्य को लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा से आगे बढ़ाते हुए सेना प्रमुख नियुक्त किया था. लेफ्टिनेंट जनरल सिन्हा ने विरोध में इस्तीफा दे दिया था.

इससे पहले जनरल (बाद में फील्ड मार्शल) सैम मानेकशॉ के बाद कार्यभार संभालने के लिए बहुत लोकप्रिय लेफ्टिनेंट जनरल पीएस भगत को दरकिनार करते हुए जनरल जीजी बेवूर के कार्यकाल में एक साल का विस्तार दिया और इस दौरान भगत सेवानिवृत्त हो गए.

इसलिए दरकिनार किए गए बख्शी और हारिज

रक्षा सूत्रों ने कहा कि आर्म्‍ड कोर के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी अपने कैरियर के अधिकतर समय जोधपुर में रहे और कश्मीर में उन्हें दो बार तैनात किया गया, लेकिन वे जिन पदों पर थे, उन्हें फील्ड पोस्टिंग नहीं माना जाता.

सूत्रों ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल हारिज को उग्रवाद से निपटने या नियंत्रण रेखा पर कार्रवाई के संबंध में परिचालन से जुड़े क्षेत्रों में कोई अनुभव नहीं है.

लेफ्टिनेंट जनरल रावत की सेना प्रमुख के रूप में अचानक पदोन्नति से बल में उत्तराधिकार वरीयता क्रम प्रभावित नहीं होगा.

वायुसेना में धनोआ ही थे वरिष्ठतम दावेदार

वायुसेना में भी अतीत में वरिष्ठतम अधिकारी की जगह अन्य अधिकारी को तरजीह दी गई है, लेकिन इस बार प्रमुख नामित किए गए धनोआ इस पद के दावेदार के रूप में वरिष्ठतम अधिकारी थे.

धनोआ को जून 1978 में वायुसेना की लड़ाकू धारा में शामिल किया गया था. उन्होंने स्क्वाड्रनों एवं वायुसेना के खुफिया निदेशालय मुख्यालय में सेवाएं दी हैं.

छह माह पूर्व ही थलसेना सहसेनाध्यक्ष बने हैं रावत

सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत की नियुक्ति छह माह पूर्व ही थलसेना सहसेनाध्यक्ष पद पर की थी. उनकी यह नियुक्ति उस समय हुई थी जब घाटी में अशांति का दौर था.

नए सेना प्रमुख की नियुक्ति से सरकार ने इस बात की ओर संकेत दे दिया है कि वह घाटी की स्थिति पर आगे भी कड़ी नज़र बनाए हुए है.

भारत के थल सेना अध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह 31 दिसम्बर को रिटायर हो रहे हैं.

उपलब्धियां भरा करियर

थल सेना अध्यक्ष के पद तक का सफ़र तय करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत के पिता लेफ्टिनेंट जनरल एलएस रावत भारतीय सेना में डिप्टी चीफ के पद से रिटायर हुए थे.

उनके पिता भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के कमांडेंट के पद पर भी रहे. वहीं जनरल रावत ने सहसेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर का पद संभाला था.

लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था. वह इस पद पर पहुंचने वाले उत्तराखंड के पहले अधिकारी है.

शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल के पूर्व छात्र रहे जनरल रावत ने वर्ष 1978 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून से पास आउट होने के बाद उन्हें 11वीं गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में कमीशन मिला.

जनरल रावत का करियर उपलब्धियां भरा रहा है. वह दिसंबर 1978 में भारतीय सैन्य अकादमी से पासआउट होने वाले बैच के श्रेष्ठतम कैडेट रहे और उन्हें स्वार्ड ऑफ ऑनर मिला.

लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल व विशिष्ट सेवा मेडल जैसे कई सम्मान से अलंकृत किए गए हैं.

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