पंजाब : इस बार ईवीएम में से निकलेगा भूत

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कई मित्रों ने पूछा है कि पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव के बारे में मेरा क्या आंकलन है.

सीधी स्पष्ट बात…. इस बार पंजाब में ईवीएम में से भूत निकलेगा.

पंजाब इस बार ऐसे छकायेगा कि अच्छे-अच्छे विश्लेषक, राजनीतिज्ञ और सेफोलोजिस्ट पानी मांग जायेंगे.

इसमें कोई दो राय नहीं कि आज से 6 महीने पहले आम आदमी पार्टी का पलड़ा बहुत भारी था और इनकी जबरदस्त हवा थी.

पर जैसा कि performance चार्ट में होता है, आपको ठीक समय पर peak करना होता है…. अगर आप समय से पहले peak कर गए तो फिर उसके आगे ढलान ही होती है.

केजरीवाल का दुर्भाग्य है कि उनका पाला देश के दो धुरंधर राजनीतिज्ञों से पड़ा है….

एक तरफ तो हैं राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी बादल साहब और उनका बेहद शातिर बेटा….

और दूसरी तरफ कैप्टेन अमरेन्द्र सिंह…. इन दोनों के सामने अरविंद केजरीवाल पिद्दी हैं….

केजरीवाल की सबसे बड़ी समस्या ये है कि इनके पास प्रदेश में कोई विश्वसनीय चेहरा नहीं है.

जहां एक तरफ बादल साहब और अमरेन्द्र सिंह जैसे दिग्गज हों तो उनके सामने भगवंत मान जैसा बी ग्रेड विदूषक और शराबी कबाबी आदमी?

दूसरी बात है कि मुकाबला त्रिकोणीय होने की वजह से ये आंकलन बेहद मुश्किल हो गया है कि बादल साहब के खिलाफ कितनी सत्ता विरोधी लहर (anti incumbency) है और वो वोट कहाँ जा रहा है.

यदि केजरीवाल मैदान में न होते तो इस बार अकालियों का सूपड़ा साफ होने से भगवान भी नहीं बचा पाता….

पर अब ऐसा लगने लगा है कि कहीं केजरीवाल अकाली दल के तारणहार बन के तो नहीं आ गए….

केजरीवाल जितने कमजोर होंगे, अकालियों को उतना फायदा होगा….

Anti incumbency वोट जो यूँ कांग्रेस की झोली में जाना था, वो आम आदमी पार्टी की झोली में जा रहा है….

इसके अलावा आम आदमी पार्टी जितना वोट अकालियों का काट रही है, उससे ज़्यादा कांग्रेस का काट रही है….

कांटे की त्रिकोणीय टक्कर अगर हुई तो अकाली फायदे में रहेंगे क्योंकि एक तो उनका पार्टी संगठन मज़बूत है, दूसरे सत्ताधारी दल होने के नाते धनबल ज़्यादा है….

मोदी की नोटबंदी का सबसे ज़्यादा नुक्सान केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को ही हुआ है….

केजरीवाल यूँ ही नहीं बिलबिला रहे हैं…. पिछले दो सालों में केजरीवाल ने कनाडा और इंग्लैण्ड में बैठे खालिस्तानियों से और अरब देशों से पेट्रो डॉलर हवाला माध्यमों से जुटाए थे वो सब मोदी ने मिटटी कर दिए.

केजरीवाल इनकम टैक्स कर्मी रहे हैं…. अन्दर की कहानी सब जानते हैं…. वो जानते हैं कि मोदी सांस भी नहीं लेने देंगे….

और अब इतने कम समय में इतनी भारी मात्रा में फंड्स नहीं जुटाए जा सकते…. हवाला पर मोदी की कड़ी नज़र है….

ये भी सुनने में आ रहा है कि Axis Bank वालों ने AAP का पैसा सफ़ेद करने की कोशिश की थी पर मोदी ने पकड़ लिया….

उधर सुखबीर बादल के पास पैसे की कोई कमी नहीं है…. और ये बड़ी कड़वी सच्चाई है कि चुनाव में पैसा और शराब पानी की तरह बहेगा…. एक रात पहले वोट खरीद लिए जायेंगे….

दूसरा फैक्टर बहिन जी यानी मायावती हैं…. मोदी ने उनको भी कंगाल कर दिया है.

चुनाव उनको भी लड़ना है. और उसके लिए पैसा चाहिए और आज उनको पैसा सिर्फ सुखबीर बादल दे सकता है….

पिछली बार भी दिया था 2012 में…. इस शर्त पर कि पंजाब की हर सीट पर बसपा का प्रत्याशी लड़ेगा और कांग्रेस के वोट काटेगा….

2012 में अकालियों की जीत में बहुत बड़ा रोल बसपा और मनप्रीत बादल का था…. इस बार मनप्रीत बादल की जगह केजरीवाल ने ले ली है….

देखना सिर्फ ये होगा कि केजरिवाल कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचा पाते हैं और खुद का कितना फायदा कर पाते हैं….

फिलहाल लड़ाई अकालियों और कांग्रेस के बीच है…. केजरीवाल पिछड़ चुके हैं….

ज़्यादा संभावना अकालियों की है….

त्रिशंकु विधानसभा भी बन सकती है….

अकाली sweep भी कर सकते हैं….

बोला ना…. ईवीएम से जिन्न निकलेगा

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