असम का इतिहास जिनका ज़िक्र नहीं किताबों में

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History Of Assam

मुग़लो से लेकर आज़ादी की लड़ाई तक असम और शेष पूर्वोत्तर से कई नाम हैं. परन्तु भारतीय इतिहास में कहीं कोई जिक्र नहीं मिलता. अपवादों को छोड़ दें तो प्राचीन इतिहास हो या मध्यकालीन इतिहास या फिर आधुनिक इतिहास हो, भारत के वीर पुरुषों का जिक्र सिर्फ उत्तर भारत तक ही सीमित नजर आता है.

ऐसा लगता है शेष भारत को कोई मतलब ही नहीं रहा हो जैसे. जबकि हमारे यहाँ की लोक कथाओं में मुगलों से, अंग्रेजो से लड़ाईयों की जाने कितनी दास्ताने भरी हुई हैं.

उदहारण के तौर पर-

बख्तियार खलजी की अगुआई में मोहम्मद गोरी ने दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान को हराया, फिर कन्नौज के राजा जयचंद को हराया. आगे बढ़ते हुए उसने बंगाल के राजा लक्ष्मण सेन को भी हरा दिया. लेकिन वहां से आगे वो नहीं बढ़ सका क्योंकि पूर्वोत्तर की जनजातियों ने यहाँ के पहाड़ों में उन्हें घुमा घुमाकर मारा. क्या आप जानते हैं उस समय कामरूप का राजा कौन था ..उनका नाम पृथु था.

विडम्बना देखिये. इतिहासकारों ने पृथ्वीराज को हीरो बना डाला जिसे गोरी ने हराया था. लेकिन पृथु का भारतीय इतिहास में कोई नाम नहीं जिसने गोरी सेना को खदेड़ दिया था.

हमें पृथ्वीराज चौहान के हीरो बनाये जाने से कोई आपत्ति नही है. उनकी जीवटता को सलाम है. परन्तु भारतीय इतिहास से राजा पृथु का नामोनिशान मिट जाना हमें दुखी कर जाता है. ऐसे एक दो नहीं सैकड़ों नाम हैं जिन्हें आज भारत के इतिहास में सम्मान के साथ दर्ज होने चाहिए थे परन्तु आज उनके नाम असम से बाहर शायद ही किसी को मालूम हों.

मुझे नहीं पता इतिहास किसने लिखा, लेकिन जिसने भी हमारे साथ ये पक्षपात किया है उनकी आत्मा को कभी शांति नहीं मिलेगी. हमारी बददुआएँ उनका इस संसार से नामोनिशान मिटा देंगी.

जय हिंद. जय असम

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