…तो क्या इसलिए दफनाई गईं जयललिता!

आपको कांशीराम याद होंगे. उनके अंतिम समय में मायावती ने उनके परिवारजनों से मिलने नहीं दिया था.

मायावती को डर था कि कही कांशीराम अपने बच्चों में से किसी को राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं बना दे.

आज जयललिता को मरीना बीच पर दफनाया जा रहा है जबकि वे आयंगर ब्राम्हण थीं.

कहा जा रहा है कि जयललिता को राज्य के सभी धर्मों के लोग प्यार करते थे इसलिए उनका दाह संस्कार नहीं किया जा रहा.

लेकिन अंदर की बात कुछ और है मित्रों.

पार्टी में एक धड़े को ये चिंता सता रही है कि जयललिता का कोई रिश्तेदार उनकी राजनीतिक विरासत से फायदा न उठा ले.

जयललिता को दफ़नाने के पीछे का असली खेल उनकी सहयोगी शशिकला ने रचा है.

यदि आयंगर रीति रिवाजों से उनका संस्कार किया जाता है तो एक सगे रिश्तेदार की जरूरत पड़ेगी.

इस समय जयललिता के परिवार में एक लड़की है, जिसका नाम दीपा जयकुमार हैं. दीपा, जयललिता के स्वर्गीय भाई जयकुमार की बेटी हैं.

शशिकला गुट ये कभी नहीं चाहेगा कि अंतिम संस्कार हिन्दू रीति से उनके परिवार की बेटी के हाथों करवाया जाए. ऐसा करने पर दीपा उनके उत्तराधिकारी के रूप में सामने आ सकती हैं.

जब जयललिता को भर्ती किया गया था तब 22 सितंबर को दीपा अपने पति के साथ उन्हें देखने के लिए अपोलो अस्पताल पहुंची थी लेकिन उन्हें धक्के मारकर निकाल दिया गया.

जाहिर है कि जयललिता चारों ओर से दुश्मनों से घिरी हुई थी. तमिलनाडु पर अब गिद्ध राज करेंगे.

एक महान नेत्री को अपने धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं हुआ. जो दूसरों के लिए जीती रही, उसके अपनों ने ही उसकी मिटटी ख़राब कर दी.

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