6 दिसंबर : शौर्य दिवस की शुभकामना के साथ, विजय दिवस की आशा करते हुए

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नहीं भूल सकते हो चार गुजरती रातें ,
सदियों की कुर्बानी को कैसे भूल जाएंगे ।

प्रताप शिवा गोविन्द बसे जब रगों में हैं,
क्रूरता की कहानी को कैसे भूल जाएंगे ।।

माँ का जख्मी सीना और गिद्ध नोचते थे लाश ,
आजादी की हैवानी को कैसे भूल जाएंगे ।

आततायी बाबर है याद तुम्हें दिन रात,
श्रीराम की निशानी को कैसे भूल जायेंगे ।।

एक छह दिसंबर याद तुम्हें बार बार,
छह सौ दिसंबर हम कैसे बिसार दें।

आग की जलती ज्वाला वो जीवित चिताएं थीं ,
नारियों का जौहर हम कैसे बिसार दें ।।

लाखों जान खोयी और जजिया भी भरा रोज ,
पैशाचिक कहर हम कैसे बिसार दें।

नौ मन जनेवू जलाया रोज औरंगजेब,
कलमे का जहर हम कैसे बिसार दें।।

कण कण बसे राम रग रग बसे राम,
जन्म भूमि पीठ है सनातन प्रतिमान की |

मिलने पर नाम ले जो होता अभिवादन है,
श्री राम हैं भावना सनातन दिनमान की ||

आप कह देते हैं कि ढांचा मात्रा एक था वो,
वही तो निशानी थी जी चोटिल स्वाभिमान की |

होगा विजय दिवस भी कल इतिहास में,
शपथ प्रभु राम के सारंग धनु बाण की ||

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जन्म : 18 अगस्त 1979 , फैजाबाद , उत्त्तर प्रदेश योग्यता : बी. टेक. (इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग), आई. ई. टी. लखनऊ ; सात अमेरिकन पेटेंट और दो पेपर कार्य : प्रिन्सिपल इंजीनियर ( चिप आर्किटेक्ट ) माइक्रोसेमी – वैंकूवर, कनाडा काव्य विधा : वीर रस और समसामायिक व्यंग काव्य विषय : प्राचीन भारत के गौरवमयी इतिहास को काव्य के माध्यम से जनसाधारण तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत, साथ ही राजनीतिक और सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग के माध्यम से कटाक्ष। प्रमुख कवितायेँ : हल्दीघाटी, हरि सिंह नलवा, मंगल पाण्डेय, शहीदों को सम्मान, धारा 370 और शहीद भगत सिंह कृतियाँ : माँ भारती की वेदना (प्रकाशनाधीन) और मंगल पाण्डेय (रचनारत खंड काव्य ) सम्पर्क : 001-604-889-2204 , 091-9945438904

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