Kalaripayattu : प्राचीन युद्ध कला का इतिहास

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67 वर्षीय मीनाक्षी अम्मा

महर्षि अगस्त्य व भगवान परशुराम द्वारा रचित क्लारिपायट्टू (kalaripayattu) युद्ध कला की सबसे अनुभवी (67 वर्षों का अनुभव) योद्धा मीनाक्षी अम्मा..

कोई आश्चर्य नहीं भारत की पुण्य भूमि ने लक्ष्मी बाई, झलकारी देवी, अवंतिका बाई जैसी वीरांगनाओं को जन्म दिया है.

क्लारिपायट्टू विश्व की सबसे प्राचीन युद्ध कला है. इसी युद्ध कला के महारथी महायोद्धा राजा बोधिधर्म ने चीन जाकर इस कला का व आयुर्वेद का प्रचार किया और फलस्वरूप शाओलिन कुंगफू और चीनी चिकित्सा पद्धति का जन्म हुआ.

बोधिधर्म का जन्म आज से लगभग 1500 वर्ष पूर्व हुआ. वे कांचीवरम के राजकुमार थे. भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के प्रचार हेतु वे हिमालय पार करके चीन के एक गांव पहुंचे.

वहां ग्रामीणों ने इनका पहनावा और भाषा विदेशी जान कर किसी ठग की सम्भावना से इनका स्वागत नहीं किया और गांव से निकाल दिया.

तभी उस गांव में महामारी फ़ैल गयी. लुटेरों का आतंक तो था ही. बोधि पास ही जंगलों में ध्यानमग्न हो गए.

एक दिन उस गांव पर लुटेरो ने आक्रमण किया. क्लारिपायट्टू में महारथ होने के कारण, बोधि ने उन लुटेरों को मार भगाया और ग्रामीणों की आस्था जीत ली.
गांववासियों ने उन्हें तामाओ Ta Mao नाम से सम्मानित किया. महामारी की चपेट से भी आयुर्वेदिक उपचार करके बचाया.

बोधिधर्म ने ग्रामीणों को यह ज्ञान दिया. तब उनके प्रस्थान करने के उपरांत शाओलिन मठों की स्थापना हुई. और कुंग फू का जन्म हुआ.

– रोहित त्रिवेदी

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