2019 नहीं बल्कि 2029 तक रहिये निश्चिंत

2019 में मोदी हिन्दू ह्रदय सम्राट.... विकास पुरुष.... ईमानदार.... परिश्रमी, कर्मठ.... गरीबों के मसीहा, रॉबिन हुड.... सख्त जान.... काले धन के विनाशक.... पकिस्तान को पटक के मारने वाले, मुसलमान औरतों के उद्धारक, ओबीसी नेता जैसी कई भूमिकाओं में आपके सामने होंगे

0
522

लोग इतिहास कुरेद रहे हैं. बता रहे हैं कि कड़े क्रांतिकारी निर्णय लेने वाले प्रधानमंत्री अगला चुनाव कभी नहीं जीते. पिछले कुछ दिनों में कई लेख पढ़ चुका हूँ इस विषय पर.

लोग पीवी नरसिम्हा राव की मिसाल दे रहे हैं. वे देश में खुली अर्थव्यवस्था लाए. आज का उन्नत भारत उन्हीं की देन बताते हैं लोग कि 30 लाख कार हर साल बिकती हैं.

[इन बुद्धिजीवियों से नहीं, डर लगता है जनता से]

फिर भी अगला चुनाव हार गए.

यूँ बताते हैं कि मंडल कमीशन लागू कर राजा वीपी सिंह ने भी बहुत क्रांतिकारी काम किया था… हार गए.

उस से पहले राजीव गांधी थे. वो ‘इंडिया’ को अपने कंधे पे ढो के 20वीं से 21वीं सदी में लाये थे.

उनका बेटा बताता है कि कम्प्युटर उन्हीं की देन है देश में…. कोलासभा में कांग्रेस की 410 सीट थी जब गद्दी पे बैठे…. पब्लिक ने 5 साल में औकात बता दी….

अटल जी की भी सुन लो…. शाइनिंग इंडिया उन्होंने किया. बहुत शक्ल चमकाई अपने इंडिया की.

फिर भी हार गए अगला चुनाव…

कहने वालों का मतलब यूं कि मोदी चाहे जितनी क्रांति कर लें…. नोटबंदी करें, चाहे कुछ करें…. पब्लिक पटक देगी 2019 में!!!

अब आइये इसका तथ्यात्मक विश्लेषण कर लें…

शुरू 1984 में राजीव गाँधी से करते हैं. बेशक 410 सीट के प्रचंड बहुमत से जीते पर राजनैतिक समझ और सूझबूझ एकदम शून्य थी.

ऊपर से सलाहकार अरुण नेहरु और अरुण सिंह जैसे अ-राजनीतिक (non political) लोग.

फिर हो गया बोफोर्स और राजा वीपी सिंह का विद्रोह…. राजा ने कांग्रेस छोड़ पूरे देश में बोफोर्स का मुद्दा घुमाया और देश की गली-गली में राजीव गांधी चोर है…. भ्रष्ट है….

वीपी सिंह स्वयं ईमानदारी के पुतले बन गए, राजीव गांधी चोर…

अब सुनिए VP Singh की…

उनकी अपनी पार्टी में विरोधी भरे थे. चंद्रशेखर, मुलायम, देवीलाल…. बड़ी मुश्किल से प्रधानमंत्री बने….

लंगड़ी सरकार थी….. भाजपा के समर्थन से…. पर, राम मंदिर की भेंट चढ़ गए. उनकी छाती पे चढ़ के भाजपा ऊपर आ गयी.

2 सीट से आज 280 तक …..

अब सुनो पीवी नरसिम्हा राव की….. आर्थिक सुधार किये पर इनके परिणाम मिलने में समय लगता है, साल दो साल में नहीं दीखते. वो दिखे 2002 से 2014 के बीच.

पर नरसिम्हा राव अपने पूरे कार्यकाल में सोनिया गांधी के गुट के भितरघात से जूझते रहे. ऊपर से भ्रष्टाचार के संगीन आरोप. रही सही कसर बाबरी ढाँचे ने निकाल दी….

नरसिम्हा राव मंडल कमंडल की भेंट चढ़ गए.

अब आइये अटल जी पे….

अटल जी ने बेशक अच्छा काम किया पर उन दिनों देश में जातीय राजनीति अपने उफान पे थी. लालू, मुलायम, मायावती का दौर था.

हिन्दू वोट जातीय राजनीति से बिखर गया. उस समय भाजपा यूपी बिहार मने Cow belt में जातीय समीकरण नहीं साध पायी. इंडिया शाइनिंग जातीय राजनीति की भेंट चढ़ गया.

कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए की चर्चा करना ही बेकार है.

यूपीए शासन के 10 साल में से 8 साल भाजपा अंतर्कलह से जूझती रही.

अटल जी ने बिस्तर पकड़ लिया. अडवाणी जी कमजोर हो गए. उधर यूपी बिहार में दलित, ओबीसी और मुस्लिम समीकरण काम कर रहा था.

भाजपा के दिन पलटने शुरू हुए 2012 से जब मोदी राष्ट्रीय पटल पर उभरने लगे.

उनकी छवि तो थी हिन्दू ह्रदय सम्राट की, पर वो सोच विकास की रखते थे.

12 साल में चुनावी राजनीति के माहिर बन गए थे. टीम वर्क अच्छा था. छवि अच्छे ईमानदार प्रशासक की थी.

पर सबसे बड़ा गुण ये है कि जातीय राजनीति को खूब समझते हैं.

2014 के बाद मोदी जी ने देश भर में, ख़ास कर हिंदी पट्टी में और Cow Belt में गैर यादव ओबीसी जातियों और गैर चमार जाटव दलित जातियों को साध लिया है.

100% ईमानदार हैं. भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है. 56 इंच की छाती है ही.

नोट बंदी और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में हुई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद तो 66 इंच की हो गयी है.

2019 में मोदी हिन्दू ह्रदय सम्राट…. विकास पुरुष…. ईमानदार…. परिश्रमी, कर्मठ…. गरीबों के मसीहा, रॉबिन हुड…. सख्त जान…. काले धन के विनाशक…. पकिस्तान को पटक के मारने वाले, मुसलमान औरतों के उद्धारक, ओबीसी नेता जैसी कई भूमिकाओं में आपके सामने होंगे.

2019 नहीं बल्कि 2029 तक निश्चिन्त रहिये.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY