बंगाल में सेना के नियमित अभ्यास से डरीं ममता, बताया लोकतंत्र पर हमला

कोलकाता. बंगाल में सेना के नियमित अभ्यास से पता नहीं क्यों मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डर गईं और खुद को सचिवालय में कैद कर लिया. राज्य के कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी सचिवालय में मुख्यमंत्री के साथ हैं.

उल्लेखनीय है कि बंगाल की राजधानी कोलकाता और राज्य के उत्तरी हिस्से दार्जिलिंग और दक्षिण में मेदिनीपुर में नियमित अभ्यास के तौर पर सेना मौजूद थी.

इस अभ्यास से भयभीत ममता द्वारा इसे लोकतंत्र पर हमला, सेना द्वारा तख्तापलट आदि राजनीतिक जुमलेबाजी करते हुए खुद को राज्य सचिवालय में कैद कर लिया.

ममता बनर्जी ने केन्द्र पर आरोप लगाया कि राज्य सरकार को सूचित किए बगैर कुछ टोल प्लाजा पर सेना तैनात कर दी गई है.

राज्य सचिवालय के निकट टोल प्लाजा से इन बलों को वापस लिए जाने तक उन्होंने अपने कार्यालय जाने से इनकार भी किया है.

इसके बाद राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ के पास स्थित टोल प्लाज़ा पर तैनात सेना को आधी रात के बाद हटा लिया गया है. लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अभी भी सचिवालय में मौज़ूद हैं.

सेना ने कहा

इससे पहले, सेना ने कहा कि वह पश्चिम बंगाल पुलिस की पूरी जानकारी और समन्वय के साथ नियमित अभ्यास कर रही है.

सेना की पूर्वी कमान ने ट्विटर पर एक बयान में कहा, ‘सेना पश्चिम बंगाल पुलिस की पूरी जानकारी और समन्वय के साथ नियमित अभ्यास कर रही है. यह अटकले गलत है कि सेना टोल प्लाजा का नियंत्रण ले रही है.’

सेना का कहना है कि इस कार्रवाई की जानकारी पुलिस को दे दी गई थी. पहले यह कार्रवाई 28 नवंबर से होनी थी. लेकिन राज्य पुलिस के कहने पर ही इसे आगे बढ़ा दिया गया.

सेना के जवान दरअसल सचिवालय से डेढ़ सौ मीटर दूर स्थित एक टोल प्लाज़ा पर मौजूद हैं, न कि सचिवालय के सामने.

ट्वीट में आगे कहा गया है कि ये कयास लगाना कि टोल नाकों को सेना ने अपने नियंत्रण में ले लिया है, सरासर ग़लत है.

पूर्वी कमान ने एक और ट्वीट में कहा है कि उत्तर पूर्व के सभी राज्यों में सेना टोल नाकों पर गाड़ियों की पूछताछ की रूटीन कार्रवाई कर रही है.

ट्वीट में आगे लिखा गया है कि असम में 18 जगहों पर, अरुणाचल में 13, पश्चिम बंगाल में 19, मणिपुर में 6, मेघालय में 5 और त्रिपुरा और मिज़ोरम में एक-एक जगहों पर सेना गाड़ियों की जांच कर रही है.

घबराई ममता के जुमले

ममता का दावा है कि राज्य सरकार को सूचना दिए बगैर यहां सेना तैनात की गई है. यह अप्रत्याशित है और एक बहुत गंभीर मामला है.

उन्होंने कहा, ‘यह सचिवालय एक संवेदनशील क्षेत्र है और टोल प्लाजा एक संवेदनशील जगह है. यहां सेना क्यों है?’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘वे जो भी कारण दे रहे हैं, वह सही नहीं है. वे झूठ बोल रहे हैं. वे समय समय पर अपने कारण बदल रहे हैं. गृह मंत्रालय के पास विभिन्न राज्यों में चल रहे वाहनों के संपूर्ण आंकड़े हैं.’

ममता ने कहा, ‘उनका इरादा राजनीतिक, असंवैधानिक, बदले की भावना, अनैतिक, अलोकतांत्रिक है.’

उन्होंने कहा, ‘मैंने निर्णय किया है कि जब तक सेना को इस सचिवालय के सामने से नहीं हटाया जाता है, मैं यहां से नहीं जाउंगी. मैं यहां ठहरूंगी. क्या इस देश में सेना द्वारा तख्ता पलट किया जा रहा है?’

टोल प्लाजा से सेना हटाने के बाद भी ममता का कहना है कि भले ही कोलकाता के एक टोल से सेना हटा ली गई है. लेकिन राज्य के उत्तरी हिस्से दार्जिलिंग और दक्षिण में मेदिनीपुर तक से जब तक सेना नहीं हटा ली जाती, वो सचिवालय में ही रहेंगी.

शुक्रवार को अभ्यास का आखिरी दिन

सेना ने कहा कि वह इस प्रकार की कवायद पूरे देश में सालाना तौर पर करती है. इस तीन दिवसीय अभ्यास का शुक्रवार को आखिरी दिन है.

इसका मकसद यह होता है कि सेना को किसी आपात स्थिति में कितने वाहन उपलब्ध हो सकते हैं.

रक्षा मंत्रालय के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) ने बताया कि कुछ जगहों से जरूरी आंकड़े जुटा लिए गए हैं और आर्मी को वहां से हटने को कहा गया है. उन्हें कल दूसरी जगहों पर तैनात किया जाएगा.

सेना का कहना है कि इस कवायद से डरने की कोई बात नहीं है और यह सरकार के आदेश के मुताबिक होता है.

एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सेना साल में दो बार देशभर में ऐसा अभ्यास करती है जिसका लक्ष्य सड़कों के भारवहन संबंधी आंकड़े एकत्र करना होता है. इससे मुश्किल घड़ी में सेना को उपलब्ध कराया जा सके.

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