खुल गई ममता की पोल, सेना ने दिखाए पुलिस को लिखे पत्र

कोलकाता. बंगाल में सेना की नियमित कवायद की पूर्व सूचना न दिए जाने को लेकर राजनीतिक बवाल कर रही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुंह सेना ने दस्तावेज़ दिखाकर बंद कर दिया है.

राज्य के विभिन्न टोल प्लाज़ा पर सेना की तैनाती को लेकर गुरुवार से ममता राज्य सचिवालय में डेरा जमाकर बैठ गईं और लोकतंत्र पर हमला, संघीय ढांचे पर प्रहार, सेना द्वारा तख्तापलट जैसे जुमले उछाल कर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश करती रहीं.

[बंगाल में सेना के नियमित अभ्यास से डरीं ममता, बताया लोकतंत्र पर हमला]

पश्चिम बंगाल क्षेत्र के आफिश्यिेटिंग जीओसी मेजर जनरल सुनील यादव इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सेना की ऐसी कार्रवाई सिर्फ बंगाल में नहीं बल्कि नौ राज्यों के 80 टोल पर चल रही है.

मेजर जनरल यादव ने साफ़ किया कि पश्चिम बंगाल सरकार को पहले ही इसकी सूचना दी गई थी और उससे मंजूरी भी मिली थी. यह अभ्यास सेना अकेले नहीं बल्कि स्थानीय पुलिस के साथ करती है.

मेजर जनरल यादव ने ऐसे सात पत्र भी दिखाए जिसमें राज्य पुलिस को सूचना दी गई थी. पुलिस के दो इंस्पेक्टरों ने उन स्थानों का दौरा भी कराया जहां सेना की तैनाती होनी थी.

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 80 डेटा कलेक्शन प्वाइंट हैं और हर प्वाइंट पर सेना के 5 से 6 जवान तैनात थे. इन जवानों के पास कोई हथियार नहीं थे.

उन्होंने यह भी बताया कि 28 नवंबर को नोटबंदी के खिलाफ भारत बंद की वजह से कोलकाता पुलिस ने 28-30 नवंबर के बीच आयोजन पर आपत्ति की थी, जिस पर तारीख बदलकर 1 व 2 दिसंबर की गई.

इस बारे में 24 नवंबर को सेना ने कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (3) सुप्रतीम सरकार को पत्र लिखकर जानकारी दी थी.

मेजर जनरल यादव ने कहा कि ऐसे एक्‍सरसाइज हमारे परिचालन उद्देश्यों के लिए किए जाते हैं. आर्मी स्‍थानीय स्‍तर पर सालाना डाटा कलेक्‍शन के लिए ऐसे रुटीन एक्‍सरसाइज को चलाती है.

उन्होंने जानकारी दी कि इसके तहत सभी उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों असम, अरुणाचल, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, सिक्किम में डाटा एकत्र किए जाते हैं.

उन्होंने बताया कि केवल भारी वाहनों का डाटा एकत्र किया जाता है. ये केवल हर साल किया जाने वाला रुटीन एक्‍सरसाइज है.

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री गुरुवार को पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में टोल प्लाजा पर सैनिकों की मौजूदगी का मुद्दा उठाते हुए राज्य सचिवालय में ही रातभर रुकी रहीं.

ममता ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या यह तख्तापलट है? ममता के अनुसार सेना को राज्य सरकार को सूचित किए बगैर तैनात किया है.

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