क्या विपक्ष इसलिए कर रहा है मोदी सरकार की 50-50 योजना का विरोध!

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जिसे बोलचाल की भाषा में काला धन कहा जाता है, वो दरअसल कई तरह का होता है.

पूरी ईमानदारी से कमाया गया पैसा और फिरौती, हत्या, आतंकी गतिविधि, स्मगलिंग, घूसखोरी जैसे अपराध से कमाया गया पैसा भी.

दोनों में फर्क करना बहुत जरूरी है. पहले केस में आपकी आमदनी जायज़ है. सरकार को आपकी आमदनी से कोई आपत्ति नहीं, बस आप इनकम टैक्स दे दीजिये.

आप की गलती सिर्फ इतनी है कि आप ने इनकम टैक्स की चोरी की है, जो एक सिविल एक्ट है. इस में सिर्फ पेनल्टी लगती है, जेल की सजा नहीं होती.

ऐसा पैसा व्यापारी, डॉक्टर, वकील जैसे लोगों के पास होता है. कभी-कभी एक दम ईमानदार आदमी के पास भी ऐसा पैसा आ सकता है.

जैसे आप ने अपना मकान बेचा. खरीददार ने थोड़ा पैसा कैश दिया. अब वो पैसा आपका काला धन है.

दूसरे केस में आपका पैसा अपराध से कमाया गया है, जैसे घूसखोरी या करप्शन यानी जो पैसा सरकारी अधिकारी /नेता के पास होता है.

या फिर तस्करी, फिरौती, रंगदारी जैसे अपराध से कमाया अपराधी का पैसा. इसमें आप टैक्स दे ही नहीं सकते, क्योंकि आप अपनी आय का स्रोत कैसे बताएँगे.

बताएंगे तो सीधे जेल. अमेरिका का कुख्यात गैंगस्टर अल कपोन ऐसे ही फंसा था.

वैसे तो दोनों में बुराई है, आखिर टैक्स चोरी भी सामाजिक अपराध है, लेकिन ये दूसरे श्रेणी के मुकाबले काफी हल्का अपराध है.

सरकार की सारी एमनेस्टी स्कीम पहली श्रेणी के लिए होती है, जिनकी आमदनी ईमानदारी की होती है.

इस बार की तथाकथित 50-50 स्कीम भी इसी वर्ग के लिए है. तथाकथित इसलिए कि दरअसल कुल टैक्स 60% हो जायेगा अगर इसमें 4 साल के लिए बिना ब्याज के 25% जमा (ज़ब्त) रकम का ब्याज भी जोड़ा जाए.

लोग नाहक सरकार की आलोचना कर रहे है. देश में एक मनी लांड्री इंडस्ट्री है जो 30-35% कट लेकर काले पैसे को सफ़ेद कर रही थी (दरअसल सिर्फ बदल रही है पुराने नोट को नए नोट से, पैसा तो काला ही रहना है, जब तक उस पर टैक्स ना दे दें).

इस में बैंक मैनेजर, CA, और आम जनता भी भाग ले रही थी (अगर आप अपने अकाउंट में दूसरे का पैसा डालते है, तो आप भी मनी लांड्रिंग के अपराधी है).

इस मनी लांड्रिंग को रोकने के लिए ही सरकार ने ये स्कीम निकाली है. इससे CA को जाने वाला कट सरकार के पास इनकम टैक्स में आ जायेगा.

बाकी पैसा जो काला रहता, वो सफ़ेद होकर इकॉनमी में आ जाएगा, और उस व्यक्ति को भी काले धन से मुक्ति मिल जायेगी.

ये एक बहुत व्यवहारिक योजना है. जो इसकी निंदा कर रहे है, वे या तो इसको समझते नहीं, या फिर उनका काम ही मोदी सरकार की निंदा करना है.

और हां, घूसखोर अफसर, भ्रष्ट नेता और अपराधी इसका फायदा नहीं उठा सकेंगे, शायद विपक्ष भी इसलिए इसका विरोध कर रहा है.

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