हिंदुत्व कट्टरता नहीं : नदियां कैसे कहें कि समुद्र बड़ा कट्टर है

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Hinduism

समुद्र अपने आप में सम्पूर्ण है. नदियां उसमें जाकर मिलती है, समुद्र उन्हें स्वीकार करता है और अपने संग उन्हें बहने देता है. नदियां भी बहती है समुद्र की लहरो के साथ, उसके अस्तित्व के साथ समाहित होकर.

नदियां कहें कि समुद्र में आकर उन्हें उनका अस्तित्व नहीं मिला या समुद्र कैसे अपनी उछलती -कूदती लहरों के साथ उन्हें भी मजबूर करता है बहने को तो यह किसी भी प्रकार से हजम होने जैसी बात नहीं लगती.

नदियां कहें कि समुद्र बड़ा कट्टर है तो इसे मूर्खता ही कहा जाएगा. यही मूर्खता आज हमारे देश में की जा रही है. आप देखें किसी भी देश का अपना एक प्रधान धर्म होता है, चाहे वो लोकतांत्रिक हो या न हो.

जिसकी बहुलता उसका अस्तित्व प्रथम होता है. ऐसे में जब अन्यान्य धर्म वहां जाते हैं या उनसे मिलते हैं तो वो उन्हें स्वीकार करता है और अपने साथ बहने देता है. उसकी कोई कट्टरता नहीं होती. वह अपने आप में ही पूर्ण होता है.

सागर को आप बाँधने का प्रयास कीजिये कैसे तो वह उफनता है, दहाड़ मार उसकी लहरें बाँध को तोड़ने का प्रयास करती है और अगर आप उसके प्रयास को समुद्र की ज्यादती कहेंगे तो यह कोई तार्किक कथन नहीं माना जा सकता.

भारत हिंदुत्व से पहचाना जाता है. हिंदुत्व उसका अस्तित्व है. लोकतांत्रिक है वो, सर्व धर्म समभाव के उत्कृष्ट कथन से उसका अभिषेक होता है किन्तु उसकी आत्मा हिंदुत्व है.

यह सागर है. कई धर्म यहां नदियों की भांति बहते हैं, अपने अपने उत्थान में रत हैं, किन्तु कोई अगर हिंदुत्व के अस्तित्व पर चोट पहुंचाता है तो नैसर्गिक रूप से सागर की लहरें उफनती है, रोद्र होती हैं. क्योंकि भारत का मूल हिंदुत्व है. उसकी जड़ों पर प्रहार करना सभी के लिए खतरनाक हो सकता है.

चक्रवाती तूफ़ान हवाओं के गहरे दबाव के कारण उठता है और समुद्र में भयंकर हलचल मचाते हुए तबाही की ओर ले जाता है. यह बहुत ही साधारण नियम है. इसके बावजूद आज जिस अंदाज में हिंदुत्व को, उसके धारक को कट्टर कहा जाने लगा है, यह गले उतरने जैसी बात नहीं है.

किन्तु बहुत ही चालाकी से इसे गले उतारा जा रहा है. हवा का दबाव बढ़ाया जा रहा है. हिन्दू कट्टरवाद के नाम से एक धारा बहा दी जा रही है. हिन्दू अपने अस्तित्व, अपनी सम्पूर्णता, अपनी रक्षा, अपने होने के लिए अपने ही देश में तमाम तरह की बाधाएं, व्यवधान रोकने और अपने सनातनी स्वरूप को बचाये रखने के प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करता है जैसे कोई भी समुद्र करता है.

तो इसे कैसे कट्टरता की दृष्टि दी जा सकती है. क्या यहां अन्य धर्मो को उनके पूरे अस्तित्व के साथ शामिल नहीं किया गया? क्या उन्हें बहने से कभी रोका गया? पूरी दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो अपने सर्व धर्म संग कुशलता से रहता है और अखंड होने का दम्भ भरता है.

यह विषय गर्व का होना चाहिए किन्तु इस विषय को हनन से जोड़ कर एक प्रकार से तबाही की ओर ले जाने के संकेत स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं. ऐसे में हिंदुत्व की कट्टरता नहीं होती बल्कि उसके अपने होने के सम्पूर्ण आकार को बचाये रखने की जिजीविषा होती है. इसे समझना होगा.

भारत से उसकी आत्मा को छीनने का कुत्सिक प्रयास किया जाने लगा है. धर्म निरपेक्षता के नाम पर बेहद ही बारीकी से काँटा चुभो चुभो कर बड़ा घाव बनाने की तैयारी है.

कट्टरवाद को गंभीरता से समझने की जरुरत है. कौन है कट्टर? जो सत्य ही है वह कट्टर नहीं हो सकता, जैसे समुद्र, जैसे आकाश, जैसे धरा. जब भी इन पर आघात होगा, समुद्र में तूफ़ान आएगा. आकाश में बिजलियाँ कड़कड़ायेंगी, धरा में भूचाल पैदा होगा. ये होना उसकी कट्टरता नहीं है बल्कि स्थिरता लाने, प्रकृति को संतुलित करने, उसे अपने रूप, अपने आकार में पुनर्स्थापित करने की एक प्रक्रिया है, कट्टरता नहीं है.

इस यथार्थ का विरोध करना तथा विरोध करते ही रहना कट्टरता है. विरोध के अपने विचारों पर टिके रहना, उसे ही सम्पूर्ण सत्य दर्शाते हुए कुतर्क की परिभाषाएं गढ़ना ही कट्टरता है.

जो लोग समुद्र को कट्टर मानते हुए अपनी अपनी बातों -अपने अपने तरीकों को बार बार प्रस्तुत करते हैं और हिंदुत्व को नकारने की जिद रखते हैं असल में कट्टरता तो यही है. आप समुद्र को बांधने का प्रयास कर रहे हैं, उसे लीलने की मंशा पाले बैठे हैं और भ्रमित करने वाले बयान -लेख-आंदोलन जैसे कार्य करते हुए भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. असल में कट्टरता तो आपकी है.

बहुत गहन और गंभीर होकर सोचने वाली बात है कि हम सब जिन शाखाओं पर बैठे हैं उन्हें ही खुद काट रहे हैं. और जब गिरते हैं तो हाहाकार मचाने की कोशिश में पूरा का पूरा वृक्ष काट देने का असफल प्रयास करते हैं. परिणाम में आखिर हाथ क्या आना है? कभी सोचा है?

वृक्ष को घना होने दें, शाखओं पर बैठ अपने रैन-बसेरे रहने दें, और हिंदुत्व जैसे अमृत फल का स्वाद लेते हुए देश की एकता-अखंडता और उसके अस्तित्व के वृहद रूप में अपने जीवन को पुलकित करें ताकि देश पुष्ट हो और विश्व में उसका अपना मस्तक गर्व से ऊंचा ही रहे.

कट्टरता के नाम पर हिंदुत्व को बदनाम करना ही असली कट्टरता है, बस इसे समझिए और सरल होने का यत्न कीजिये, हिंदुत्व के प्रति अपनी आस्था-अपना धर्म अपना जीवन न्योच्छावर कीजिये क्योंकि भारतवासियो के लिए यही स्वर्ग है.

– अमिताभ श्री (सम्पादक – खबरगली)

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