जनता है कि भड़कने, उकसने का नाम ही नहीं ले रही

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किसी खेल में जब एकदम बराबर की दो टीमें लड़ती हैं तो उनमें से कोई एक जो बेहतर strategy, बेहतर रणनीति के साथ उतरता है वो लीड इस मायने में ले लेता है कि खेल को अपने हिसाब से चलाता है.

फिर प्रतिद्वंद्वी टीम अपना नैसर्गिक खेल नहीं खेलती बल्कि अपने से बेहतर प्रतिद्वंद्वी के agenda को follow करती है.

वो इन्हें मनचाहा नचाता है. खेल उसकी शर्तों पे होता है. वो आक्रामक होता है और इनका पूरा समय defence में बीतता है.

ऐसी परिस्थिति से उबरने, बाहर निकलने का एक ही उपाय होता है…. counter attack…. पर फिर वही बात…. आक्रामक खिलाड़ी हमेशा फायदे में ही रहता है.

भारत में वर्तमान में जो राजनैतिक खेल चल रहा है उसमें, पहले तो दोनों टीमें बराबरी की नहीं. विपक्ष बेहद कमजोर है. उसकी समस्या ये है कि उसके पास दमदार नेता नहीं.

कुछ मीडिया ने भी मोदी जी का काम आसान कर दिया है. दिल्ली केन्द्रित मीडिया के नज़रों में विपक्ष माने सिर्फ और सिर्फ 2 पार्टियां. एक कांग्रेस, दूसरी AAP….

अब कायदे से देखा जाए तो कांग्रेस के शीर्ष पे युवराज राहुल गांधी है…. युवराज जैसा सेनापति मोदी जैसे धुरंधर योद्धा के सामने? No Match…. ये लगभग Walk over जैसी स्थिति है.

दूसरे मीडिया ने व्यापक जनाधार वाली अन्य बहुत सी पार्टियों को पीछे कर AAP जैसी फर्जी पार्टी को आगे किया हुआ है मोदी जी के सामने…. लड़ने के लिए.

अरविन्द केजरीवाल जैसा छिछला, खोखला, घटिया, अनर्गल प्रलाप करने वाला नेता जिसकी असली हैसियत देश के एक शहर के Mayor भर की है, उसे मीडिया ने उतार रखा है मोदी जी जैसे नेता के सामने.

उन मोदी जी के सामने जिनका लोहा आज न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया मानती है…. ऐसे मोदी जी के सामने मीडिया ने अरविन्द केजरीवाल जैसे गली मोहल्ले के लेवल के खिलाड़ी को उतार रखा है.

मोदी जी ने आज विपक्ष को मजबूर कर दिया है कि वो उलटे सीधे shot खेलें.

विपक्ष के पास कोई मुद्दा तो है नहीं…. मुद्दा होगा कैसे? मोदी जी ने दिया ही नहीं….

सो अब मोदी ने विपक्ष को मजबूर कर दिया है कि वो नोट बंदी जैसे अत्यंत लोकप्रिय निर्णय की भी आलोचना करने को मजबूर हैं.

आज भी मोदी की आलोचना करने के लिए विपक्ष को 15 लाख हर खाते में…. ऐसे घिसे पिटे थेथर विषय पे बोलना पड़ता है.

विपक्ष को जनता को सड़क पे उतरने, बैंक के सामने दंगा करने और बैंक लूटने के लिए उकसाना पड़ रहा है…. पर जनता है कि भड़कने, उकसने का नाम ही नहीं ले रही.

नोट बंदी की आलोचना-विरोध कर विपक्ष ने अपनी स्थिति को और ज़्यादा कमज़ोर कर लिया है.

उधर POK में हुई सर्जिकल स्ट्राइक और नोट बंदी के बाद मोदी की लोकप्रियता अपने चरम पे है. आज मोदी May 2014 से ज़्यादा लोकप्रिय हैं .

मोदी का होम वर्क पूरा हो गया है. अब May 2019 तक हर दो महीने बाद मोदी एक धमाका करेंगे.

मोदी विपक्ष में इतने छेद कर देंगे, इतने छेद कर देंगे कि विपक्ष छलनी माफिक हो जाएगा जिससे न मोदी की हवा थम सकेगी और न वोट रूपी पानी.

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