आखिर है क्या नमो की नोटबंदी और काले धन का गणित

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आईये अब दो प्रकार के भ्रम से बाहर आने का प्रयास करें:

पहला यह प्रश्न कहा जा रहा है कि बैंकों के NPA को कम करने के लिए नोटबंदी की गयी है. एक बात स्पष्ट समझने की है. राष्ट्रीकृत बैंकों के कर्जे का भार सरकार की जिम्मेवारी भी है अधिकार भी है.

सरकार को राष्ट्रीकृत बैंकों के हुए नुकसान की भरपाई करनी ही पड़ेगी. परन्तु बिना किसी राजनैतिक दल का विरोध या समर्थन करते हुए मैं यह कहना चाहूँगा कि जिस कारण बैंकों में लाखों करोड़ों का घाटा हुआ है वह एक दिन में तो नहीं हुआ है पिछले 15-20 वर्षों से यह चला आ रहा है.

अब आप यह भी समझें कि अचानक से मार्च 2016 के बाद के तीन महीनों में बैंक के NPA में दो लाख करोड़ की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी. इसका कारण यह था कि RBI ने समस्त बैंकों से कहा कि अपना हिसाब ठीक कर के मार्च 2017 तक दिखाएँ.

तो जो बैंक के खाते चुप चाप रिश्वत के कारण सच नहीं बता रहे थे उनको सच बताना पड़ा. अब जून के महीने तक लगभग 6 लाख करोड़ का NPA दिखाया गया.

अब यह भ्रम है कि सरकार नोटबंदी के इस पैसे से बैंकों का घाटा पूरा करेगी तो आप समझ लें कि सरकार कोई भी प्रकार के नए कर लगा कर या किसी और विभाग के पैसे को यहाँ दे कर घाटा पूरा कर लेगी.

दूसरे जब सरकार RBI की इस नीति के कारण बैंकों में धन जमा करवाएगी तो सरकार बैंकों के कर्जदारों का क़र्ज़ माफ़ नहीं करती है. उद्द्योगपतियों को नया कर्जा मिल सकता है पर कर्जा माफ़ नहीं होता है.

ताज़ा उदाहरण है जब AIRINDIA पर 51000 करोड़ का कर्जा हो चला था तो तत्कालीन सरकार ने 31500 करोड़ का bail out package दिया था तो मई 2016 तक 8 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया गया था. कहीं पर भी AirIndia का कर्जा माफ़ नहीं किया गया.

अब दूसरे इस बात पर चर्चा करें कि काला धन कितना और कैसे बाहर आएगा.

भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार (रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया ) देश में 17 लाख करोड़ के करीब की नकदी उपलब्ध है जिसमें से लगभग 15 लाख करोड़ के 1000 और 500 के नोट हैं. अभी इसमें जाली नोटों की गिनती नहीं है जिसका आंकड़ा उपलब्ध नहीं हो सकता है.

हाँ यह RBI ने कहा है कि इस एक साल में लगभग 28 करोड़ की जाली मुद्रा पकड़ी गयी है. विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 400 से 500 करोड़ की जाली मुद्रा भारत में चल रही है.

अब विमुद्रीकरण के बाद अनुमान से सरकार को पहले 400 करोड़ की जाली मुद्रा से निजात मिलेगी और इसके साथ ही लगभग 3 लाख करोड़ का पैसा सरकार जो कि रिश्वत, चोरी, अपहरण इत्यादी के रूप में इस्तेमाल हुआ है वह वापिस नहीं आएगा.

इससे पहले सरकार की देनदारी 3 लाख करोड़ कम होगी तो सरकार इतने से अमीर हो गयी. अब जो धन कश्मीरी अलगाववादियों को दिया जाता था वह अधिकतर जाली था इसी कारण से कश्मीर में उत्पात उसी दिन से बंद हो गया है.

ध्यान रहे यह उस समय किया गया है जब काश्मीर में बोर्ड की परीक्षाएं कराई जा रही हैं. काश्मीर का बच्चा स्कूल खुल कर खुश है माता पिता खुश हैं. परन्तु 60000 करोड़ के आसपास का नक्सल काम बंद होगा.

यह पैसा जाली नहीं है क्योंकि यह वहां की जनता से इकठ्ठा किया गया है “हफ्ते” के नाम या सुरक्षा प्रदान कराने के नाम पर. इस पर भी तुरंत लगाम लग गया है क्योंकि यह पैसा अब नक्सलियों के काम का नहीं है और नया पैसा आने में समय लगेगा.

अब यदि पूरे का पूरा न आने वाला पैसा काला धन भी माना जाए तो आपको मात्र 3 लाख करोड़ ही देश की अर्थव्यवस्था से बहार हो जायेगा. सरकार ने ढाई लाख प्रति व्यक्ति को बहुत बड़ी और व्यावहारिक छूट दी है.

हर गृहणी कुछ न कुछ पैसा बचाती है पर सरकार ने उनको पर्याप्त छूट दे दी है. हो सकता है उसमें से कुछ पैसा करचोरी का भी हो पर वह नगण्य होगा क्योंकि यह वर्षों का जोड़ा पैसा है.

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