देशभक्ति का ज्वार है उमड़ा, मंद नहीं होगा, तुम चीख- चीख कर मर जाओ, भारत बंद नहीं होगा

kavita-tiwari-kumar-vishwas

आधी रात जब खुला न्यायालय भारत बंद कराना था,
जब खतरों में था देवालय भारत बंद कराना था.

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सिक्खों के नरसंहारो पे काहे दर्द नहीं होता,
जेऐनयु के नारों पे क्यूँ भारत बंद नही होता.

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जब सैनिक पे पत्थर बरसे भारत बंद कराना था,
जब किसान रोटी को तरसे भारत बंद कराना था.

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रामदेव को जब दौड़ाया भारत बंद हुआ था क्या,
लालू ने जब चारा खाया भारत बंद हुआ था क्या….

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देश भक्ति का ज्वार है उमड़ा, अब ये मंद नहीं होगा..
तुम चीख- चीख कर मर जाओ, पर भारत बंद नहीं होगा..

देशभक्ति से लबरेज़ इस कविता की कविता को अवश्य सुनें –

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