बंद पर पैबंद

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सुना है कल बंगाल में Left ने बंद बुलाया है और ममता बनर्जी इस बंद को विफल करने के लिए एड़ी-चोटी एक कर देंगी..

राजनीति केवल timepass नहीं है, बहुत कुछ सीखने को मिलता है.. ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया से! कल तक बंद का घोर समर्थन, जब उनके ही राज्य में लेफ्ट ने 28 को बंद की घोषणा की.. कि सांप ने जाकर 99 पर काट लिया और सीधा 1 पर टांग दिया.. चूँकि मोमता को भी अपनी राजनीति ‘जिन्दा’ रखनी है, अपने मुद्दे को कोई सत्ताधारी दल यूँ ही हाथ से निकलने नहीं देगा.

वहीं लेफ्ट ने बड़ी चालाकी से दिल्ली में बंद नहीं बुलाया है.. केवल केरल जैसे राज्य में जहां पर लेफ्ट मजबूत है.

वहीं यूपी में मायावती ने सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बंद का विरोध किया है.. क्योंकि उन्हें यह डर सता रहा कि सीएम अखिलेश इस बंदी को प्रशासन की मदद से विफल करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.. क्योंकि अब तक उनके सुर नोट बदली के विरोध में कभी नहीं रहे, हाँ उन्होंने प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर सुझाव अवश्य दिए हैं और मीडिया की बाईट भी लूटी है.

वहीं बिहार में नीतीश ने सुशासन बाबू की छवि को बरकरार रखते हुए, नोट बदली से भी दो कदम आगे बढ़कर के बेनामी सम्पत्तियों को जब्त करने का बयान देकर सिक्सर उछाल दिया है. जदयू अपनी छवि को सुधारना चाहती है वहीं महागठबन्धन टूटना भी नहीं चाहिए तो शरद यादव के रूप में एक पत्ते को नोट बदली के विरोध में रखा है. महागठबन्धन का मुख्य संयोजक कोंग्रेस है, यह सत्य नितीश को भली-भांति ज्ञात है.

अब बची कोंग्रेस!  तो कोंग्रेस इस बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में खुद को कहीं भी ढूंढ नहीं पा रही है.. संगठन की हालत जर्जर है और हर शहर में केवल 50 लोग विरोध करने सड़क पर आएं तो एक राष्ट्रीय दल की बची खुची मान्यता समाप्त होने का भय भी है, और एक तरफ आम लोग नोट के कोप से परेशान हैं वहीं पर कोंग्रेस को यह भारत बंद कहीं महंगा न पड़ जाये… क्योंकि परेशान आम जनता कोंग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ नोक झोंक करने को मजबूर हो सकती है.

उधर उड़ीसा में नवीन पटनायक सरकार को नोट बदली की मौन सहमति है तो यह मान लिया जाये कि उड़ीसा का सत्ताधारी दल राज्य भारत बंद में सहयोग नहीं कर रहा.

तस्वीर बहुत साफ है. 28 नवंबर को बैंक बंद होने के बाद….. शाम के मोमबत्तियों के साथ कोंग्रेस, राजद और लेफ्ट और बसपा ये सभी पार्टियां अपने-अपने पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान से दुआ करेंगे ।  कल के आक्रोश मार्च का यही हश्र होने वाला है.

– कुंदन कामराज

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