Tracer Bull : नाम तो किसी का लिया ही नहीं जनाब

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कुछ साल पहले गोरखपुर के चरगांवा स्थित राजकीय कृषि विद्यालय में कृषि और पशुपालन संबंधी बीस दिवसीय ट्रेनिंग में हिस्सा लेने का मौका मिला.

ट्रेनिंग के दौरान पशुपालन के संबंध में जानकारी देते हुये एक विशेषज्ञ ने बताया कि विदेशों में जहाँ बड़े-बड़े फार्मों में गायें पाली जाती हैं, वहाँ सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि एक साथ खुले में रह रही हजारों गायों में कौन HEAT में है यह पता लगाना मुश्किल हो जाता था. जिसके कारण लगभग 45% मामलों में उन्हें सही समय पर कृत्रिम गर्भाधान की तकनीकी द्वारा सीमन देने में दिक्कतें आती थीं.

इसके लिये उन्होंने एक तरीका अपनाया. जिसमें उन्होंने गायों के झुंड के साथ कुछ सांड़ छोड़ दिये. ये सांड़ पहले से ही आपरेशन द्वारा नपुंसक बना दिये गये होते हैं.

इनके पिछले पैर के पुट्ठों पर एक विशेष प्रकार का केमिकल लगा दिया जाता है जो किसी दूसरे जानवर के शरीर पर रंग छोड़ता है. ये गायों के बीच दिनभर घूमते रहते हैं. और जब झुंड की कोई गाय HEAT में आती है तो उस दौरान के विशेष हार्मोन के स्राव की गंध ये पहचान लेते हैं और स्वाभाविक तौर पर उसकी ओर आकर्षित होते हैं.

HEAT में आयी गाय के साथ संसर्ग के लिये ये उसके ऊपर बार-बार चढ़ते हैं. लेकिन नपुंसक होने के कारण कुछ कर नहीं पाते. लेकिन उस दौरान इनके पुट्ठों पर लगा केमिकल गाय के पिछले हिस्से से संपर्क में आकर रंग छोड़ जाता है.

शाम को जब गायें बाड़े में लौटती हैं तो पशुपालक उनके पीछे लगे रंग के कारण HEAT में आयी गायों को पहचान लेते हैं और गर्भाधान की व्यवस्था करते हैं. ऐसे सांड़ों को वहां “ट्रेसर बुल” कहा जाता है, क्योंकि ये हीट में आयी गायों को ट्रेस करने का काम करते हैं.

हमारे समाज और यहाँ की राजनीति में भी बहुत सारे वाकिये ऐसे होते हैं जो ट्रेसर बुल की भांति ही कार्य करते हैं. उदाहरण के लिये आज संविधान दिवस से एक दिन पहले आयोजित एक कार्यक्रम में दिये गये मोदी के बयान को ही देख लीजिये. मोदी ने वहाँ कहा कि “कुछ लोग (ध्यान रहे कि किसी का नाम नहीं लिया गया) कालाधन रखने वाले भ्रष्टाचारियों का बचाव कर रहें हैं.

इस एक बयान ने ट्रेसर बुल की तरह सभी HEAT में आये दलों को सामने ला दिया. लगभग विपक्ष के सभी दल एक स्वर से संसद में चिल्लाने लगे कि मोदी ने उन्हें चोर कहा है, लिहाजा वह माफी मांगे.

जबकि नाम तो किसी का नहीं लिया गया था. फिर विपक्ष को क्यों ऐसा लग गया कि मोदी उन्हीं के बारे में बोल रहे हैं?

बहरहाल यह तो ट्रेसर बुल का एक उदाहरण भर था. बाकी आपको भी अपने अगल-बगल बहुत सारे ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे जो ट्रेसर बुल का काम करते हैं.

 

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