जनता जनार्दन की मर्जी है, हो सकता है माने, हो सकता है ना भी माने!

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शब्दों का मतलब ना पता होने से कई बार समस्या होती है. जैसा कि एक बार हमारे पूर्व मुख्यमंत्री दम्पति के सुपुत्र के साथ हुआ.

हाल में ही उप मुख्यमंत्री बने थे और पता नहीं क्यों किसी फॉर्म में उन्हें Zodiac Sign भरना था!

कम उम्र में पढ़ाई छोड़ने के कारण अब इसका मतलब उन्हें पता नहीं था. सवाल ही ना समझ में आये तो जवाब कैसे दें?

लिहाजा उन्होंने वही किया जो अपनी आखिरी फेल की हुई परीक्षा में किया था. फ़ौरन बगल में ही बैठे मुख्यमंत्री महोदय के फॉर्म में झाँका.

उन्होंने ज़ोडिएक साइन में ‘स्कार्पियो’ भर रखा था, बस उप मुख्यमंत्री महोदय को समझ आ गया, उन्होंने खाली जगह में अपनी गाड़ी का नाम, ‘इनोवा’ लिख दिया.

खैर वहीँ पीछे एक बहन जी भी बैठी वही फॉर्म भर रही थी. उन्हें भी ज़ोडिएक साइन समझ में नहीं आ रहा था, लेकिन उन्होंने इस नए नवेले उप मुख्यमंत्री की हरकत देख ली थी.

उन्होंने इधर उधर देखा तो बगल में बैठी विदेशी महिला दिखी. अब विदेशी जरूर अंग्रेजी समझ रही होगी ये सोचकर उन्होंने फॉर्म में झाँक कर देखा. वहां लिखा था ‘कैंसर’, बस फिर क्या था, बहन जी ने भी अपने फॉर्म में लिख दिया, ‘पाइल्स’!

तो शब्दों का मतलब ना समझने पर कई बार गलत मतलब निकाल लिए जाते हैं. अब जैसे हमें ही लीजिये, किसी का नाम तो ऊपर लिखा नहीं ना?

लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री दम्पति के सुपुत्र, विदेशी महिला, या बहन जी, हर एक का कोई न कोई मतलब तो निकाल ही लिया गया है ना!

अब उनके समर्थक अगर आपके मतलब निकालने पर ‘असहिष्णु’ हो जाएँ तो हमें दोष मत दीजिये भाई! मतलब तो आपने निकाला है!

इसके अलावा कई शब्दों के मतलब देखिये तो समय के साथ बदल जाते हैं. जैसे शेक्सपियर के ज़माने में जो Naughty या फिर Wink का मतलब होता था वो आज नहीं होता.

या फिर इस्तेमाल की जगह पर भी शब्द का मतलब बदलता है. जैसे Politics का शाब्दिक अर्थ राजनीति होता है लेकिन जब भारत में कहा जाए कि फलां तो बहुत पॉलिटिक्स करता है तो उसे राजनीतिज्ञ नहीं कहा जा होता बल्कि धूर्त और कपटी कहा जा रहा होता है.

आज जिस शब्द पर ध्यान गया वो भारत में कभी शब्द के तौर पर लिया ही नहीं गया.

भारत में ‘कांग्रेस’ हमेशा से एक राजनैतिक दल के रूप में ही जाना जाता है. इसने हमारे देश को एनडी तिवारी और दिग्गी राजा जैसे ‘अनमोल रतन’ दिए हैं जिन्होंने ‘गठजोड़’ शब्द के अर्थ का अनर्थ कर डाला.

आगे इनकी पीढ़ी में अभिषेक मनु संघवी जैसे नेता हुए, जो कार में बिठा कर, या जो भी कर के, लोगों को जज बना रहे थे.

आज कल उनके कागज़ दीमक खा गए हैं तो न्यायलय ने उन पर 52 करोड़ टाइप जुर्माना ठोका है.

लेकिन ‘कांग्रेस’ सिर्फ एक पार्टी नहीं होती, वो एक शब्द भी है, और ये नेता जो कर रहे हैं उसका इस शब्द के असली वाले अर्थ से काफी सम्बन्ध है.

बाकी ममता बनर्जी की TMC टाइप इसका मतलब ना बदला जाये, कांग्रेस का अर्थ डिक्शनरी वाला कांग्रेस ही किया जाए इसका तो हम निवेदन ही कर सकते हैं.

जनता जनार्दन की मर्जी है, हो सकता है माने, हो सकता है ना भी माने!!

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया ऑनलाइन (www.makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया ऑनलाइन के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया ऑनलाइन उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

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