ममो साहब, आपके अधूरे काम को पूरा करने विघ्नहर्ता नमो को बनना पड़ेगा विघ्नकर्ता भी

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Namo Mamo
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सबसे पहले याद दिला दूं कि इस साल अप्रैल की ही बात है एक अंग्रेज़ी अखबार की हेड लाइन थी-

PM Narendra Modi is a dream merchant: Dr Manmohan Singh

ऐसी ही एक हैडलाइन Demonetization पर आज अंग्रेज़ी खबरों में ट्रेंड कर रही है-

Manmohan accuses Modi of ‘Monumental Mismanagement’

आज फिर वही बात याद आती है, नॅशनल हेराल्ड केस, कोलगेट, ऑगस्टा वेस्टलैंड के समय जिनका अर्थशास्त्र सारे अर्थ खो बैठा था, दस साल तक जिनकी जुबान पर खानदानी ताला लगा था, वो अचानक से इतनी शायराना बातें करने लगे तो सोचने में ये भी आता है कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों और कार्यों ने मौन-मोहन को भी वाचाल-मोहन बना दिया.

लेकिन मोहन प्यारे ने बात तो उस समय भी बहुत पते की की थी, कि मोदी सपनों के सौदागर हैं. और बात आज भी बहुत पते की की है कि उन्होंने पूरी देश की व्यवस्था को हिला कर रख दिया है…

दो बातें मैं यहाँ पर कहना चाहूंगी –

पहली बात कि हाँ वो सपने बेचते ही नहीं, सपने खरीदने का भी माद्दा रखते हैं. कहते हैं एक अच्छा व्यापारी कभी घाटे का सौदा नहीं करता. और मोदी जैसा चतुर व्यापारी तो घाटे का सौदा कर ही नहीं सकता.

मोदी के विदेश दौरों का और उनकी मेक इन इंडिया की व्यापारी नीति का मजाक उड़ाने वाले भी वही है जो देशी वस्तुओं को हिकारत की नज़र से देखते हैं और गैजेट्स से लेकर प्लास्टिक के डब्बे तक चाइना बाज़ार से खरीदते हैं.

हाँ मोदी सपनों के सौदागर हैं, उन्होंने युवाओं के सपनों को निवेश किया है, उन्होंने महिलाओं की दुआओं को निवेश किया है, उन्होंने बुजुर्गों के अनुभवों को निवेश किया है ताकि हमारे बच्चे उस दुनिया में स्वच्छंद सांस ले सके, जिसका मात्र सपना देखने के लिए मेरा देश पिछले सत्तर साल तक गहरी नींद में सोता रहा.

हाँ मोदी सपनों के सौदागर हैं, तभी उन्होंने देश के युवाओं को Startup India Standup India जैसे सपने देकर कहा- कि सपने वही पूरे होते हैं जो जागती आँखों से देखे जाएं. इसलिए अब उस लम्बी नींद से जागो, उस नींद में जितना समय गंवाया है उसकी भरपाई करने के लिए दोगुनी मेहनत करना है. इसलिए वो खुद भी दिन के सोलह से अठारह घंटे काम करते हैं, वो भी एक भी दिन छुट्टी लिए बिना.

हाँ मोदी सपनों के सौदागर हैं, तभी तो जिन्होंने दलित कहकर हाशिये पर फेंक दिया उन्हें मुख्य धारा में लाने के लिए वो उन्हें कहते हैं- ‘स्टैंडअप इंडिया’…. ईश्वर ने जो शक्ति, सामर्थ्य और हुनर सबको दिया है, वही शक्ति, सामर्थ्य और हुनर दलित भाइयों को भी दिया है.

हाँ मनमोहन साहब, मोदीजी ही असली सपनों के सौदागर हैं, तभी तो पानी का सपना देखने वाले लातूर में लोग सपने को साकार होता देख पाते हैं.

और दूसरी बात जहां तक ‘Monumental Mismanagement’ की बात है.. आप विघ्नहर्ता को तो जानते ही होंगे… तो आप यह भी जानते होंगे कि कभी कभी इन विघ्नहर्ता को ‘विघ्नकर्ता’ भी बनना पड़ता है…

विशेषकर तब जब पहले की आर्थिक व्यवस्था की नींव को कालाबाज़ारी की दीमक लग चुकी हो और देश के सबसे बड़े ओहदे पर बैठा एक निपुण अर्थशास्त्री के सारे शास्त्र अर्थ खो बैठे हो…

आप ही के नहीं बहुत से बुद्धिजीवियों के बुद्धि के कपाट अचानक खुल गए हैं, और उन्हें भी आपकी तरह GDP के घटने की चिंता हो रही है… ये कुछ ऐसा ही है जैसे शरीर के सड़े हिस्से से मवाद निकालने पर थोड़ा दर्द सहना पड़ता है… .. लेकिन इसके पहले कि छोटा सा ज़ख्म पूरे शरीर में गैंगरीन फैला दे उसे सही समय पर रोक दिया गया…

आपके पास बहुत सही समय था यह अपने पिछले कर्मों (पाप और पुण्य आप खुद तय कर लीजिये) का हिसाब किताब साफ कर लेते, लेकिन आपने अब भी वही किया और इस महाभारत में असत्य का साथ दिया…

वैसे मनमोहन साहब, आपने भी भारत माता की कोख से जन्म लिया है इसलिए यहाँ की संस्कृति और संस्कार से परिचित ही होंगे. तो यहाँ की वर्ण व्यवस्था से भी परिचित होंगे आप.

तो मैं बता दूं मोदीजी बुद्धि से ब्राह्मण, कर्म से क्षत्रिय, प्रजा के पालन में वैश्य है और जहां तक चौथे वर्ण की बात है वो खुद को प्रधान सेवक ही कहते हैं..

और हाँ मनमोहन साहब आप तो कई बार विदेश यात्रा पर गए होंगे प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए.. कितनों ने मनमोहन सिंह ज़िन्दाबाद कहा होगा या कितनों से मनमोहन सिंह आई लव यू सुना होगा, वो भी विदेशी धरती पर.

हाँ मनमोहन साहब मोदीजी ही असली सपनों के सौदागर हैं, तभी वो जहां जाते हैं उनकी जय जयकार होती हैं, भारत माता की जय के नारे लगते हैं… वो केवल सपनों के सौदागर ही नहीं मुझ जैसी हज़ारों महिलाओं के लिए REAL HERO भी हैं.

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