नोटबंदी : समाज के लिए एक अवसर

एक ओर जहां गरीब बच्चे 2 रूपए की पेंसिल के लिए तरसते देखे और 4000 रूपए की बोतल पीने वाले अभिभावकों को स्कूल में 100 रूपए के लिए झगड़ते भी देखा है....

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प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए मुझे 25 साल से ऊपर हो गए.

पूर्वी उत्तरप्रदेश के धुर गाँव देहात में भी काम किया है और पंजाब के अत्यधिक संपन्न इलाकों में और सबसे महंगे स्कूलों में भी काम किया है.

ऐसे भी मां-बाप देखे हैं जो दस रूपए को मोहताज थे और ऐसे भी देखे जहां बच्चों की अम्मा 15000 रूपए का सूट पहन के पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में आती हैं.

एक ओर जहां गरीब बच्चे 2 रूपए की पेंसिल के लिए तरसते देखे और 4000 रूपए की बोतल पीने वाले अभिभावकों को स्कूल में 100 रूपए के लिए झगड़ते भी देखा है….

1990 में जब मैंने अपने गाँव माह्पुर में गाजीपुर देहात का पहला अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल शुरू किया तो फीस थी 20 रूपए….. अगले साल फीस बढ़ा के 30 रूपए कर दी.

100 से ज़्यादा मां-बाप ने अपने बच्चे हटा लिए.

1200 से ज़्यादा की आबादी वाले गाँव में मुश्किल से 10 बच्चे आते थे हमारे स्कूल में. शेष सरकारी स्कूल में जाते थे.

अभिभावकों से वो 20 – 30 रूपए वसूलना भी भारी काम होता था. मैंने महसूस किया कि अपने बच्चों की शिक्षा पर 10 रूपए खर्चने में भी प्राण निकलते थे लोगों के.

फिर वही बच्चे, जिनको उनके माँ बाप ने 100-50 रूपए के लिए अनपढ़ रख छोड़ा, उन्ही अनपढ़ बच्चों की शादियों में मैंने उनके बाप को लाखों रूपए फूंकते देखा….

सिर्फ 4 घंटे की शानो शौकत दिखाने में जीवन भर की कमाई नष्ट कर दी पर उसी पैसे को उसी बच्चे की संतुलित खुराक, शिक्षा दीक्षा पर खर्च न किया.

मेरे पिता जी ऐसी झूठी शानो शौकत दिखाने वालों को और आडम्बर करने वालों को गरियाते थे….

वो कहते थे कि साले एक दिन के लिए राजा बनते हैं. अबे अपने बच्चों को राजा की तरह पाल पोस के शिक्षित करो न…. असली शान तो उसमें है.

आज जबकि नोट बंदी हो गयी है तो चारों ओर हाहाकार मचा है…. हाय पैसे न मिले तो मेरी बेटी की शादी टूट जायेगी.

जो रिश्ता सिर्फ इसलिए टूट जाता है कि आपने उसे रसगुल्ला नहीं खिलाया…. और आपके दरवाजे पर महँगा तम्बू नहीं तना हुआ था…. तो ऐसे रिश्ते और ऐसे रिश्तेदार, दोस्त, मित्र न हों तो बेहतर….

इस नोट बंदी ने तो हमारे समाज को एक अवसर प्रदान किया है कि लोग आडम्बरपूर्ण फ़िज़ूलखर्ची वाले शादी-विवाह छोड़, सादगीपूर्ण समारोह करें और अपनी खून पसीने की कमाई को अपने बच्चों और परिवार पर किसी उद्देश्यपूर्ण कार्य के लिए खर्च करें.

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