ऐसे वन्य पशुओं पर तो डंडा नहीं, हंटर बरसना चाहिए

... पर ये सारे कायदे-क़ानून, नियम-संयम मनुष्य के लिए हैं. अफ्रीका के जंगलों के जानवरों (Wilder Beasts) के लिए नहीं. यूँ भी Wilder Beast को कुछ सिखाया नहीं जा सकता.

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जापान में भूकम्प आना रोज़ का काम है. जापानियों ने भूकंप के साथ जीना सीख लिया है.

अक्सर भूकंप के साथ सुनामी भी आ जाती है. कुछ साल पहले हमने जापान में आई सुनामी के भयावह फोटो और वीडियो देखे.

मुसीबत में कैसे प्रतिक्रिया करना है, व्यवहार करना है, ये जापानी समाज बखूबी जानता है.

मुसीबत के समय क्या करना है, कैसे भागना है, कहाँ भागना है, कितना भागना है, भागते-भागते घर से क्या सामान उठाना है और क्या छोड़ देना है, बूढ़े-बुज़ुर्ग और बच्चों को कैसे सम्हालना है, न डरना है, न बदहवास होना…. जापानियों को पहले दिन से सिखाया जाता है कि रोना चीखना चिल्लाना नहीं है, भगदड़ नहीं मचानी.

मुसीबत के समय किसी चीज़ की जमाखोरी नहीं करनी. सिर्फ आज की ज़रूरत भर का ही सामान या भोजन लेना है. सुरक्षा कवायद (safety drill) का कड़ाई से पालन करना है.

आपदा के समय कैसे व्यवहार करना है, ये मनुष्य को सीख ही लेना चाहिए.

पर ये सारे कायदे-क़ानून, नियम-संयम मनुष्य के लिए हैं. अफ्रीका के जंगलों के जानवरों (Wilder Beasts) के लिए नहीं. यूँ भी Wilder Beast को कुछ सिखाया नहीं जा सकता.

उनका एक ही उपाय है…. डंडा…. बहुत मज़बूत डंडा….

और वो डंडा चलाने वाले हाथ भी इतने मज़बूत होने चाहिए कि थकें नहीं.

उत्तरप्रदेश के किसी बैंक के सामने एक पुलिस वाला Wilder Beasts को डंडे से सिखा रहा था कि राष्ट्रीय आपदा के समय कैसे behave करना है.

देश को समझना चाहिए कि इस समय एक अघोषित आपातकाल लागू है.

ये संक्रमण काल है. देश की वित्त व्यवस्था में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का दौर है. ऐसे में नियम संयम की बड़ी सख्त ज़रूरत है.

बैंक के सामने जब भाई लोग wilder beast की तरह व्यवहार करने लगे तो कर्तव्यनिष्ठ पुलिस वाले ने उन्हें पुनः मनुष्य बनाने के लिए basic उपकरण डंडे का प्रयोग किया.

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वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि डंडा आगे से टूट गया है. मैं इसकी कड़े शब्दों में घोर निंदा करता हूँ. जादो जी को चाहिए कि अपनी पुलिस को ऐसा डंडा उपलब्ध करायें जो टूटे नहीं.

इसके अलावा बुरी खबर ये आई है कि उस पुलिस वाले को सस्पेंड कर दिया गया है.

मैं इसकी भी कड़े शब्दों में घोर निंदा करता हूँ. जो व्यक्ति इतना तन्मय हो कर देश के Wilder Beasts की ‘सेवा’ कर रहा था उसे तो पुरस्कृत किया जाना चाहिए. उसे तो प्रमोशन दे के थानेदार बना देना चाहिए.

अंग्रेज बेवक़ूफ़ नहीं थे जो हमारे ऊपर डंडे से शासन करते थे.

नमक की अफवाह पर 500 रूपए में एक किलो नमक खरीदने वाले Wilder Beasts के लिए तो डंडा नहीं हंटर होना चाहिए.

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