ज़मीनी धार्मिक लाल किताब पर आसमानी संदर्भों की चर्चा : आइये किताबी बकवास करें

किताब ही अगर सब तय करे तो पुरानी के बरक्स प्राचीन नुस्खे बताती.. बाजार के नई उम्र की किताबों में भी लिखावट है जिसकी बनावट को मुताबिक़ अर्थ दिया जा सकता है.

प्रश्न: लाल किताब में ग्रहों की कुर्बानी का क्या अर्थ है?

उत्तर: जब कोई ग्रह अपनी कुर्बानी देकर दूसरे ग्रह के फल को नष्ट नहीं होने देता तो उसे ग्रह की कुर्बानी कहा जाता है.

उदाहरणार्थ – बुध और शुक्र आपस में मित्र हैं लेकिन शुक्र अपनी कुर्बानी देकर बुध के फल को बचा लेता है. दूसरे शब्दों में बुध ने अपने बचाव के लिए शुक्र को कुर्बान कर दिया.

इसलिए जब भी बुध किसी कारणवश पीड़ित होगा तो शुक्र की, इसी तरह शनि पीड़ित होगा तो शुक्र की, मंगल पीड़ित होगा तो केतु की, शुक्र पीड़ित होगा तो चंद्र की, गुरु पीड़ित होगा तो केतु की, सूर्य पीड़ित होगा तो केतु की और चंद्र पीड़ित होगा तो सूर्य, गुरु और मंगल की कुर्बानी होगी.

राहु व केतु ऐसे ग्रह हैं जो बुरे समय में किसी की सहायता नहीं लेते, स्वयं अपनी बलि दे देते हैं.

प्रश्न: लाल किताब में पितृ ऋण की बहुत चर्चा होती है. यह क्या है?

उत्तर: जब पूर्वजों द्वारा किए गए पापों का फल उनकी संतानों को भोगना पड़ता है तो वह पितृ ऋण कहलाता है.

जब नवम भाव का कारक ग्रह गुरु किसी शत्रु भाव में स्थित हो और उस पर किसी शत्रु ग्रह की बुरी दृष्टि पड़ रही हो तो गुरु पितृ ऋण का ग्रह कहलाता है.

दूसरे शब्दों में जब किसी ग्रह के पक्के भाव अर्थात कारक भाव का स्वामी किसी शत्रु भाव में बैठ जाए और उस पर किसी शत्रु ग्रह की बुरी दृष्टि हो तो कुंडली पितृ ऋण की कही जाती है.

प्रश्न: पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए क्या उपाय करना चाहिए?

उत्तर: जिस ग्रह के कारण पितृ ऋण हो उसकी आयु अवधि से पूर्व उसका उपाय कर लेना चाहिए अन्यथा वह अपनी अवधि में हानि अवश्य करेगा.

सूचना : लाल किताब ज्योतिष का एक ग्रंथ है. इसके मूल रचयिता का नाम अज्ञात एवं विवादास्पद है.

भारत के पंजाब प्रांत के ग्राम फरवाला (जिला जालंधर) के निवासी पंडित रूप चंद जोशी जी ने इसे सन 1939 से 1952 के बीच में इसके पाँच खण्डों की रचना की.

इस किताब को मूल रूप से उर्दू एवं फारसी भाषा में लिखा गया है. यह ग्रंथ सामुद्रिक तथा समकालीन ज्योतिष पर आधारित है.

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