पुराने नोटों पर थी ‘गाँधी जी’ की गलत तस्वीर!

पुराने नोटों पर ‘गाँधी जी’ की गलत तस्वीर लगी है, वित्त मंत्रालय और RBI को मैंने सर्वप्रथम लिखा था : नए पत्रमुद्रा (नोट) का जारी होना, उसी का परिणाम”

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार ने दि.14.11.2016 के अखबारों में बड़ा-सा विज्ञापन प्रकाशित कराया है, जो www.paisaboltahai.rbi.in के द्रष्टव्यश: है . प्रकाशित विज्ञापन का शीर्षक है- “अब आपके बैंकनोट नए डिजाईन में : भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नई श्रृंखला में Rs 2000 और Rs500 के नोट जारी”. इनमें जारी दोनों नए नोट के अग्र और पृष्ठ भाग का तस्वीर को उसी रंग में सविश्लेषित प्रकाशित किया गया है . अखबार में प्रकाशित नए नोट और तथ्य सुस्पष्ट प्रतीत हो रहा है .

अब मैं इस आलेख के शीर्षक “पुराने नोटों पर ‘गाँधी जी’ की गलत तस्वीर लगी है, वित्त मंत्रालय और RBI को मैंने सर्वप्रथम लिखा था : नए पत्रमुद्रा (नोट) का जारी होना, उसीका परिणाम” विषय पर लौटते हैं .

मैंने 21.01.2016 के RTI आवेदन वित्त मंत्रालय (आर्थिक कार्य विभाग), भारत सरकार, नई दिल्ली को रजिस्ट्री डाक से प्रेषित किया था .

श्री सुशील कुमार, अवर सचिव -सह- CPIO, करेंसी अनुभाग, आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार ने फ़ाइल सं. 13/72/10-करेंसी/ दि.06.02.2012 भेजकर मुझे प्रश्न सं.1 का जवाब (इस सम्बन्ध में मैं अभी इस प्रश्न पर नहीं ठहरता हूँ, इसे बाद में देखते हैं) देने के बाद प्रश्न सं.2 व 3 को ‘रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया’ से सम्बंधित होने के कारण उन्हें उत्तर देने के लिए “प्रधान महाप्रबंधक, डी. सी. एम., आर. बी. आई., मुम्बई” को अधिकृत व अंतरित किया गया.

“रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया, केंद्रीय कार्यालय, अमर भवन, सर पी.एम. रोड, मुम्बई-400001” के CPIO डॉ.एन. कृष्ण मोहन ने ‘भारतीय रिज़र्व बैंक’ के ‘मुद्रा प्रबंध विभाग’ (आयोजना कक्ष) के पत्रांक:- RIA NO. 4334/2011-12 के प्रसंगश: पत्रांक:- मुप्रवि (आईएफसीडी) सं. 4408/06.08.05/2011-12/ दि.02.04.2012 भी भेजा .

पाठकों में उत्पन्न जिज्ञासा का तत्क्षण निदान करते हुए मैंने जो प्रश्न किया था, ‘रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया’ के द्वारा हू-ब-हू लिखा (प्रश्न सं.2 व 3 जोड़कर) यहाँ भावश: उद्धृत कर रहा हूँ:-

1.’नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर सही नहीं है’
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बिंदु-(i)
भारतीय रुपये पत्र मुद्रा (नोटों) पर महात्मा गांधी का चित्र ‘पोट्रेट’ है, जबकि वास्तविक फ़ोटो ’30 जनवरी 1948′ (गांधी जी के निधन-तिथि)  के सम्प्रति ही विधिक है, क्योंकि जारी नोट पर जो चित्र है, वह महात्मा गांधी का हू-ब-हू नहीं है .

बिंदु-(ii)
यथा:- गांधी जी के दोनों कान का ऊपरी हिस्सा बड़ा और आगे की ओर झुका, दोनों आँखों के ऊपर ललाट उठा, दोनों कान के ऊपर साइड और पीछे तरफ हल्का कच्चा बाल सहित पका बाल, सघन और पकी मूँछ पर नाक के नीचे दो-चार काला बाल, नाक चौड़ा फुलाये तीक्ष्ण नुकीला, नाक पर बड़ा गोल चश्मा और उसका फ्रेम नासिका छिद्र के ऊपरी किनारे तक पहचान लिए है, जो ही सही है . रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया को इस सरलता का भान लिए निर्देशित सूचना पर मुझे सूचना प्रदान करेंगे .

2.’संविधान में राष्ट्रपिता और महात्मा– नामोल्लेख नहीं’
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भारतीय संविधान में ‘राष्ट्रपिता’ का उल्लेख नहीं है तथा ‘महात्मा’ सर्टिफ़िकेट नाम नहीं है, एतदर्थ पत्र मुद्रा (नोट) पर “मोहनदास करमचंद गांधी” ही नामोल्लिखित हो .

3.’अशोक स्तम्भ भी नोट पर सही तरीके से हो’
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अशोक स्तंभ यानी शेर, बैल, घोड़े के ऊपर ही ‘सत्यमेव जयते’ हो तथा नीचे ही ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ हो .

4.’RBI प्रतीक की सत्य स्थिति’
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RBI (रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया) के प्रतीक में ‘खजूर पेड़’ के साथ ‘चीता’ — कैसे यह सत्य स्थिति लिए है, सूचना देंगे .

इसके बाद उत्तर में मुझे मिला–“सूचना का अधिकार अधिनियम – 2005 की धारा- 2(f) के तहत यह विषयवस्तु सूचना नहीं है .” तब मैं RBI, मुम्बई के अपील प्राधिकारी -सह- कार्यपालक निदेशक श्री वी.एस. दास के सेवार्थ दि 20.04.2012 के तत्वश: ‘प्रथम अपील’ की.

जिनका जवाब मुझे अपील सं. 47 (DCM)-2011-12 / दि.16.05.2012 के द्वारा दिया गया, हालाँकि यह जवाब RBI के CPIO के पक्ष में ही था, तथापि वार्त्ता के प्रसंग ऐतिहासिक हो गए हैं . श्री वी.एस. दास ने मुझे निष्कर्षतः लिखा:–

1.) आपने कहा है कि रुपये (नोटों) पर मुद्रित महात्मा गांधी की छवि, एक चित्र है, जबकि दि.30.01.1948 (गांधी जी की निधन-तिथि) का फ़ोटो वैध तस्वीर (Lawful picture) है .

आपने रुपये (नोटों) पर दृश्यमान फ़ोटो में विसंगतियाँ की ओर इंगित किया है . आपने भारतीय रिज़र्व बैंक से अनुरोध किया है कि दी गयी जानकारी की सत्यता को समझे और जानकारी प्रदान करे . ….

मैंने उक्त प्रश्न की जांच की है और यह पाया कि अपीलकर्त्ता बैंकनोटों पर दृश्यमान महात्मा गांधी जी के चेहरे से सम्बद्ध विशिष्टाताओं  की विस्तृत जानकारी दी है, जो उनके अनुसार सही है तथा भारतीय रिज़र्व बैंक से उसके आधार पर जानकारी देने का अनुरोध किया है .

2.)आपने कहा है कि संविधान में कहीं भी ‘राष्ट्रपिता’ के सम्बन्ध में उल्लेख नहीं है और ‘महात्मा’ एक प्रामाणिक नाम नहीं है, अतः रुपये नोट में ‘मोहनदास करमचंद गांधी’ लिखा जाना चाहिए .

3.) आपने आगे यह भी सुझाव दिया है कि ‘अशोक स्तम्भ’ प्रतीक के ऊपर ‘सत्यमेव जयते’ और नीचे ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ प्रदर्शित होने चाहिए .

4.) आपने भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रतीक में ताड़ के पेड़ के नीचे बाघ के होने की सत्यता के बारे में जानकारी मांगी है .

अपील प्राधिकारी भी अपने CPIO के जवाब में कोई कमी नहीं देखते हैं . तब मैं माननीय केंद्रीय सूचना आयोग, नई दिल्ली को प्रथम अपीलीय जवाब से अप्रसन्न होकर दि.02.06.2012 के आलोकश: ‘द्वितीय अपील’ करता हूँ . आयोग में इस सबंध में File No. CIC/VS/A/2012/000534 स्थापित होती है और एतदर्थ अंतिम सुनवाई दि.21.06.2013 को होती है, जहां मेरी दृष्टिकोण को भाविष्यिक सुझाव के तौर RBI द्वारा रख लिया जाता है .

अतीव प्रसन्नता की बात है, 10.11.2016 से आम जनताओं के लिए जारी www.paisaboltahai.rbi.in के द्रष्टव्यश: rs 2000 और rs 500 के नए नोटों में महात्मा गांधी का असली चेहरा दिए गए हैं, जो मेरे द्वारा सुझाया गया है.

पुराने नोटों पर गांधी जी के सचमुच में चित्र (पोट्रेट) है, इसे नए नोटों के तकनीकीरूपेण परिवर्तित गांधी जी से मिलान किया जा सकता है, इससे गांधी जी के चित्र और असली तस्वीर लिए अंतर महसूस होता चला जाएगा ! वित्त मंत्रालय और RBI को मेरे प्रयास को मुख्य आयाम देने के लिए अनन्य धन्यवाद.
हाँ, RBI के प्रतीक चिह्न हेतु मैंने ‘खजूर’ के साथ ‘चीता’ लिखा था, जो RBI के अनुसार ‘ताड़’ (Palm Tree) के साथ ‘बाघ’ (Cheetah) है . चलिए इसे मान लेता हूँ , किन्तु दोनों की अबूझ तारतम्यता पर भविष्य में अवश्य प्रकाश डालना चाहेंगे .

अशोक स्तम्भ के ऊपर ‘सत्यमेव जयते’ या फिर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ न देकर Rs2000 मुद्रित करना अविधिक है, क्योंकि राष्ट्रीय प्रतीक से ऊपर अन्य प्रसंग को स्थान नहीं मिलना मिलना चाहिए था, ऐसा लगता है– राष्ट्रीय प्रतीक से ऊपर Rs2000 है .

सूचनार्थ प्रश्न सं.1 का जवाब की विस्तीर्णता समय मिलते ही मैं लिखूंगा .

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सदानंद पॉल (SADANAND PAUL) शिक्षाविद् , साहित्यकार, पत्रकार, गणितज्ञ, नृविज्ञानी, भूकंपविशेषज्ञ, RTI मैसेंजर, ऐतिहासिक वस्तुओं के संग्रहकर्ता हैं. स्वतंत्रतासेनानी, पिछड़ा वर्ग, मूर्तिकार, माटी कलाकार परिवार में 5 मार्च 1975 को कटिहार, बिहार में जन्म हुआ. पटना विश्वविद्यालय में विधि अध्ययन, इग्नू दिल्ली से शिक्षास्नातक और स्नातकोत्तर, जैमिनी अकादेमी पानीपत से पत्रकारिता आचार्य , यूजीसी नेट हिंदी में ऑल इंडिया रैंकधारक, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से रिसर्च फेलो. 11 वर्ष में महर्षि मेंहीं रचित सत्संग योग की समीक्षा पर नेपाल के प्रधानमन्त्री कुलाधिपति श्री एनपी रिजाल से आनरेरी डॉक्टरेट कार्ड प्राप्त, पटना विश्वविद्यालय पीइटीसी में हिंदी अध्यापन 2005-07 और 2007 से अन्यत्र व्याख्याता, 125 मूल्यवान प्रमाणपत्रधारक, तीन महादेशों की परीक्षा समेत IAS से क्लर्क तक 450 से अधिक सरकारी,अकादमिक,अन्य परीक्षाओं में सफलता प्राप्त. 23 वर्ष की आयु में BBC लंदन हेतु अल्पावधि कार्य , दैनिक आज में 14 वर्ष की अल्पायु में संवाददाता, 16 वर्ष में गिनीज बुक रिकार्ड्स समीक्षित पत्रिका भूचाल और 18 वर्ष में साप्ताहिक आमख्याल हेतु लिम्का बुक रिकार्ड्स अनुसार भारत के दूसरे सबसे युवा संपादक, विज्ञान-प्रगति हेतु प्रूफएडिटिंग, बिहार सरकार की ज़िलास्मारिका कटिहार विहंगम-2014 के शब्दसंयोजक, अर्यसन्देश 2015-16 के ग्रुपएडिटर.

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