नोट-बंदी : विरोध की छोटी मोटी लहरों के बीच बड़ी लहरों का समर्थन

Nitish Kumar supporting Modi
Nitish Kumar supporting Modi

केंद्र सरकार द्वारा उठाये गये नोटबन्दी जैसे बड़े कदम का स्वागत न करके विपक्षी दलों ने अपनी राजनीतिक अंत्येष्टि का मुक्कमल इंतजाम चाहता है.

नितीश कुमार ने इन सभी विपक्षी दलों से अलग हटकर नोटबन्दी को स्वागतयोग्य कदम बताया और इसे कालाधन रहित भारत बनाने के लिए आवश्यक बताया.

उन्होंने अपने नजरिये से एक झटके में भारतीय जनता पार्टी के निर्णय को समर्थन देते हुए अपनी छवि चमका ली. यह बिलकुल अप्रत्याशित भी नहीं है, बल्कि एक सफल नेतृत्वकर्ता जब जनता का मूड स्विंग को भाँपने लगे तो यह बयान स्वाभाविक ही है.

इसके बाद अखिलेश यादव का नंबर आता है. उन्होंने इस कदम की सराहना की लेकिन सतर्कता के साथ यह सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को यह चाहिए कि जनता को परेशानी न हो इसके लिए ग्रामीण इलाकों में मनी एक्सचेंज की ठोस व्यवस्था होनी चाहिए.

जाहिर है.. ये मूड भाँपने में उतने ही सक्षम हैं जितने कि दिल्ली वाले बाबू.. लेकिन बंगाल से इतना खास लगाव हो गया कि एक संयुक्त रैली कर पब्लिक से ‘मोदी-मोदी’ के नारे भी तानों की तरह सुनने पड़े!

इन तानों को सुनने के पीछे क्या स्वार्थ हो सकता है? देश समझ रहा है.. जिस वर्ग की आड़ लेकर ये दोनों आंदोलन करेंगे, केंद्र ने आज वह दीवार गिरा दी है.

शादी वाले घर में 2.5 लाख निकाल सकेंगे और किसानों को 25 हजार प्रति सप्ताह निकासी का अधिकृत फरमान आ चुका है.

लेकिन समस्याएं गम्भीर हैं. शहरों में लगी लम्बी-लम्बी कतारें हमें दिखती हैं.. जहां खोड़ा, गाजियाबाद की एक बैंक शाखा पर उमड़ी भीड़ बड़ी समस्यायों से जूझ रही है वहीं मनी लॉन्ड्रिंग के इल्जाम से जूझ रहे एक न्यूज़ चैनल के मालिक के क्या हाल खबर हैं.. यह न्यूज़ चैनल का कैमरा नहीं दिखा पाता.

जहाँ कर्नाटक बीजेपी के पूर्व खनन मंत्री की बेटी की शादी में 500 करोड़ रूपये का खर्च, टीवी चैनल्स की अन्य खबरों को लील लिया है वहीं लालू-मुलायम समधी बनने के लिए कितने खर्च किये होंगे.. कोई पता नहीं !

वाकिफ होना अच्छी बात है, उससे भी अच्छी बात है खुद में सुधार लाना.. अंग्रेजी में बोले तो – अपडेटेड रहना !

Paytm, swap cards जल्द ही छोटे शहरों की दुकानों पर दिखने लगेंगे, हजार का नोट नहीं आ रहा इसलिए भी.

– कुंदन कामराज

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