बीन जब बजी तो अजगर निकल पड़े, आस्तीन के सांप सब खुलकर निकल पड़े

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PM Modi

बीन जब बजी तो अजगर निकल पड़े |
आस्तीन के सांप सब खुलकर निकल पड़े ||

पाले गये जो श्वान सरकारी गोश्त पर |
बोटी नहीं मिली तो तनकर निकल पड़े ||

करते थे जो जनाब खूब माँ पे शायरी |
भारत माँ के नाम पर हंसकर निकल पड़े ||

खोज जब हुई देशद्रोहियों की मेरे देश में |
कमबख्त हुक्मरान के भी सर निकल पड़े ||

बंगले हैं सौ जनाब के दिल्ली शहर में |
बदली जो नोट फूस के छप्पर निकल पड़े ||

करने चला इलाज जब मुर्दों का डाक्टर |
मरीजों के हाथ से भी नश्तर निकल पड़े ||

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जन्म : 18 अगस्त 1979 , फैजाबाद , उत्त्तर प्रदेश योग्यता : बी. टेक. (इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग), आई. ई. टी. लखनऊ ; सात अमेरिकन पेटेंट और दो पेपर कार्य : प्रिन्सिपल इंजीनियर ( चिप आर्किटेक्ट ) माइक्रोसेमी – वैंकूवर, कनाडा काव्य विधा : वीर रस और समसामायिक व्यंग काव्य विषय : प्राचीन भारत के गौरवमयी इतिहास को काव्य के माध्यम से जनसाधारण तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत, साथ ही राजनीतिक और सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग के माध्यम से कटाक्ष। प्रमुख कवितायेँ : हल्दीघाटी, हरि सिंह नलवा, मंगल पाण्डेय, शहीदों को सम्मान, धारा 370 और शहीद भगत सिंह कृतियाँ : माँ भारती की वेदना (प्रकाशनाधीन) और मंगल पाण्डेय (रचनारत खंड काव्य ) सम्पर्क : 001-604-889-2204 , 091-9945438904

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