#मोदी_की_मीरा : तुमको हमारी उम्र लग जाए

Modi Ki Mira
Modi Ki Mira

7 नवम्बर 2014 का दिन, जगह वाराणसी…. वो प्लेन से मैं ट्रेन से… पहुँच रहे थे एक ही शहर…. वाराणसी…. मुक्तिधाम में वस्ल-ए-यार..

लेकिन ये मिलन बड़ा अनोखा मिलन था जिसमें हम दोनों मिले नहीं लेकिन ये ऊपर वाले की योजना का हिस्सा था वाराणसी में अजित सिंह द्वारा चलाये जा रहे उदयन स्कूल में मेरी यात्रा के दिन उनका वाराणसी पहुँचना…

मैं और मेरे मोदी एक ही शहर की हवा में सांस ले रहे थे.. मेरे लिए यही बहुत बड़ा सौभाग्य था….  वाराणसी से लौटने के बाद टीवी में उनका ऑस्ट्रेलिया में दिया गया भाषण सुना…..

बकौल मोदी- आपको करने होंगे बड़े बड़े काम, मुझे तो बहुत छोटे छोटे काम करना है, छोटे छोटे लोगों के लिए करना है, छोटे छोटे लोगों को बड़ा करने के लिए करना है…

और यही मैं भी कहती हूँ जीवन में सच में कुछ करना चाहते हैं तो ज़रूरी नहीं कि अजित सिंह के उदयन स्कूल के बच्चों के लिए ही किया जाए … अपने घर के आसपास आपको कई ऐसे बच्चे, बूढ़े, गरीब लोग मिल जाएंगे जिनका जीवन शिवपुरी के मुसहरों से भी गया बीता होगा…. मैंने भी वहीं से शुरू किया था….

जो लोग मुझे व्यक्तिगत रूप से जानते हैं, या मेरे व्यक्तिगत जीवन के बारे में जानते हैं उनके मन में ज़रूर ये ख़याल आता होगा…. कि देखो जो अपने खून के रिश्तों को नहीं संभाल पाई वो दुनिया संभालने चली….

यहाँ भी मैं और मेरे मोदी एक ही बात करते हैं कि व्यक्तिगत जीवन में बहुत कुछ खोने के बाद ही आपको वो पात्रता मिलती है कि आप दूसरों को कुछ बाँट सको. व्यक्तिगत जीवन की समस्याओं से ऊपर उठ जाने के कारण ही तो आज मोदी कभी ऑस्ट्रेलिया, तो कभी अमेरिका और कभी जापान में खड़े होकर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं…

यदि आपको सार्वजनिक जीवन में थोड़ा बहुत भी कुछ करना है तो अपने व्यक्तिगत जीवन में बहुत कुछ खोना पड़ता है…..

एक और समानता मेरे और मोदी के बीच में है वो ये कि हम दोनों ही गुजराती हैं….

हम गुजरातियों को विदेश में बसने का बहुत क्रेज़ होता है सो मेरे पिता को भी था. आज यदि उनका कहा मानकर शादी करके विदेश में बस गयी होती तो वहीं दर्शकों के बीच बैठकर उस लड़की की तरह ‘आई लव यू’ मोदी चिल्ला रही होती जैसे वो मोदी के भाषण को सुनते हुए चिल्ला रही थी….

लेकिन मुझे पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर घर छोड़ना मंज़ूर था देश छोड़ना नहीं…..

फिर आज जो कुछ भी मैं बन पाई हूँ वो मैं कभी न बनी होती… आज जिस भी राह पर मैं हूँ उस राह पर आगे न बढ़ पाई होती…

बहुत अच्छा लगता है जब लोग मुझे माँ संबोधित करते हुए अपनी व्यक्तिगत समस्याएँ यूं मुझसे साझा करते हैं.. जैसे मैं सच में उनकी जननी हूँ.

उनका विश्वास और प्रेम मुझे हमेशा एक नई ऊर्जा से भर देता है… मैं भूल जाती हूँ अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को……… और याद रह जाता है स्वामी ध्यान विनय द्वारा मुझे “जगत जननी” संबोधित करना…

अजित भाई ने एक दिन बाबा रामदेव का किस्सा सुनाते हुए उनके संकल्प की बात बताई थी कि इतनी बड़ी दुनिया में जहां इतने सारे लोग हैं …….. 6 अरब लोग ……. और एक भरा पूरा समाज …….एक राष्ट्र …….और धर्म …….. और इन सबसे ऊपर आपकी अपनी आत्मा …….. क्या इनके प्रति कोई कर्त्तव्य नहीं. मैंने उसी दिन सोच लिया था ……. मैं एक पत्नी और 2 – 3 बच्चों की सेवा में अपना जीवन नहीं खपाऊँगा ……. I will live a life of significance ……. मेरे परिवार में सिर्फ ये 4 – 5 लोग नहीं रहेंगे. i will have a bigger family. (पूरा लेख पढने के लिए यहाँ क्लिक करें)

और तब भी मैंने यही कहा था बन्दा ये बिंदास है….. कौन अजित भाई? ना जी मेरे मोदी…………………

मैं और मेरे मोदी अक्सर ये बातें करते हैं – इंडिया को फिर से भारत करना है कि नहीं करना…. तो मितरों………… हमें तो बहुत छोटे-छोटे काम करना है, छोटे-छोटे लोगों के लिए करना है, छोटे-छोटे लागों को बड़ा करने के लिए करना है…

और आज जब मोदी जी कहते हैं कि उनके देश के प्रति निष्ठा और कार्य के कारण उनके जीवन को खतरा हो गया है तो मैं और मेरे जैसी देश की तमाम मीराएं यही प्रार्थना करती हैं मोदीजी … तुमको हमारी उम्र लग जाए…

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