स्वदेशी ड्रोन तापस-201 का कामयाब परीक्षण, हमला करने में भी सक्षम

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नई दिल्ली. देश में बने सबसे बड़े मानव रहित विमान ड्रोन तापस 201 ने बुधवार को कामयाब उड़ान भरी. इससे मानवरहित वायुयान से जुड़े भारत के विकास कार्यक्रम को नई ऊंचाई मिली है.

डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट ऑर्गजाइनेशन यानी डीआरडीओ ने मध्य ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले मानवरहित विमान तापस 201 का सफल परीक्षण किया.

डीआरडीओ के बनाए गए इस ड्रोन का परीक्षण कर्नाटक के बंगलौर से 250 किलोमीटर दूरी पर चित्रदुर्गा में किया गया.

यह जगह मानवरहित यानों एवं मानवयुक्त विमानों के परीक्षण के लिए नवविकसित उड़ान परीक्षण स्थल है.

यह 24 घंटे तक उड़ान भर सकता है और देश के सशस्त्र बलों के लिए टोही मिशन पर भेजा जा सकता है.

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इस मानवरहित यान को अमेरिका के प्रिडेटर ड्रोन की भांति मानवरहित लड़ाकू यान के रूप में भी उपयोग में लाया जा सकता है.

तापस 201 का डिजाइन और विकास डीआरडीओ की बेंगलुरु की प्रयोगशाला एयरोनॉटिकल डिवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और एचएएल-बीईएल ने मिलकर किया है.

डीआरडीओ के युवा वैज्ञानिकों की एक अलग टीम ने इसका परीक्षण किया. इसमें सशस्त्र बलों के पायलटों ने सहयोग किया.

इसकी तुलना दुनिया के उन बेहतरीन ड्रोन से की जा सकती है जिनकी क्षमता बहुत अधिक है. बताया जाता है कि इसे अमरीकी ड्रोन प्रिडेटर की तर्ज पर विकसित किया गया है.

दो टन वजनी इस ड्रोन की कई खासियत हैं. इसके डैने लगभग 21 मीटर लंबे हैं. यह 24 घंटे उड़ान भरने में सक्षम है.

ये दुश्मनों के इलाके में घुसकर टोह लेने, निगरानी रखने और लक्ष्य की पहचान करने उस पर हमला करने में भी सक्षम है.

ये 500 किलोमीटर घंटे प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान तो भरेगा ही, साथ ही दुश्मन की नजर से भी बचा रहेगा. वजह है इसमें ऐसे सिस्टम लगे है जो दुश्मन की पकड़ में नही आएंगे.

सिंथेटिक अपर्चर राडार होने के कारण ये बादलों के पार भी देख सकता है. इतना ही नहीं, 30 हजार फीट पर आसानी से ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है.

ये दिन के साथ-साथ रात में अपना काम कर सकता है. इसमें करीब वे सारी खूबियां हैं जो एक छोटे टोही विमान में होती हैं.

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