नोट बैन : कल्पना कीजिये, यदि उन्हें 7 दिन मिल जाते तो क्या होता?

देश भर में मोदी जी के इस फैसले की सराहना हो रही है… पर साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि इसका क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं हुआ… सरकार ने पहले से इसकी तैयारी क्यों नहीं की?

TV channels पर भी बार-बार यही दिखाया जा रहा है कि ATM नहीं चल रहे… या ये कि ATMs में बहुत जल्दी पैसे ख़त्म हो जा रहे हैं.

काले धन के खिलाफ शुरू की गयी इस लड़ाई की सफलता का एकमात्र सूत्र था इसकी गोपनीयता.

मोदी जी ने भ्रष्ट लोगों पर अचानक सोते हुए हमला कर दिया. उनको भनक तक न लगी.

पर आप ये सोचिये कि शाम 8 बजे घोषणा हुई और रात 12 बजे तक का मौका मिला और सिर्फ 4 घंटे में ही काले धन वालों ने सुनारों, आभूषण विक्रेताओं से हज़ारों करोड़ का सोना खरीद डाला.

कल्पना कीजिये कि यदि उन्हें 7 दिन मिल जाते तो क्या होता?

पूरी योजना ही फेल हो जाती.

जिस तैयारी की बात हो रही है, ये कहा जा रहा है कि सरकार ने इतना बड़ा फैसला लेने से पहले तैयारी नहीं की… ये नासमझी है.

लाखों बैंक शाखाएं, लाखों ATM, लाखो पोस्ट ऑफिस….

योजना की घोषणा से पहले इन सब में नगदी पहुंचाने के लिए सरकार और RBI को बड़ी तगड़ी कवायद करनी पड़ती.

लाखों ATMs जो 500 और हज़ार के पुराने करेंसी नोटों के हिसाब से caliberated हैं उन्हें नयी करेंसी के हिसाब से recaliberate करना एक बहुत बड़ी कवायद है.

इस काम में तीन से ज़्यादा हफ्ते लगेंगे और हज़ारों तकनीशियन दिन रात काम करेंगे तब जा कर ये काम होगा.

उसी तरह लाखों बैंक शाखाओं और पोस्ट ऑफिस और ग्रामीण बैंक कर्मी… यदि सरकार इन सबको नयी करेंसी पहले से पहुंचाने लगती तो इतनी हलचल देखकर ये भ्रस्ट नेता, नौकरशाह, व्यापारी सचेत हो जाते, योजना लीक हो जाती और सब किया धरा मिट्टी में मिल जाता.

इसलिए योजना की सफलता के लिए पहला सूत्र था गोपनीयता…. अचानक हमला…

सरकार तैयारी करने लगती तो चोर सूंघ लेते.

इसीलिए सरकार ने जान बूझ के, सोच समझ के इतना बड़ा जोखिम लिया.

सरकार जानती थी कि जनता परेशान होगी… लंबी-लंबी लाइन लगेगी… कुछ हफ़्तों का कष्ट होगा.

पर ये जान लीजिए कि ये प्रसव की पीड़ा है… इस पीड़ा के बाद नव जीवन प्रस्फुटित होगा…

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