बड़ा अरमान था देखें कतारें, सुनें ‘मोदी हाय-हाय’, पर…

बाकी कई सवालों के साथ हमें ये भी नहीं पता था कि पोस्टल ऑर्डर कितने दिन में एक्सपायर होता है.

आस-पास और लोगों से पूछने पर पता भी नहीं चला क्योंकि खरीदे तो सबने थे बरसों पहले, कभी सरकारी फॉर्म के साथ लगाने के लिए, लेकिन वापिस करने का अनुभव किसी का नहीं था.

हाल में ही मेरी तरह दस रुपये वाला पोस्टल ऑर्डर RTI करने के लिए खरीद लाया हो, ऐसा कोई ना था.

खैर, तो हम पोस्टल ऑर्डर लिए शहर के GPO जा पहुंचे.

अब जिन्हें सरकारी कर्मचारियों से मिलने की आदत होगी, उन्हें पता होगा कि ऐसे में होता क्या है.

मुझ अज्ञानी शिष्य को देखकर कर्मचारी महोदय मुस्कुराये, कहा, सर ये पोस्टल ऑर्डर कभी एक्सपायर नहीं होता!

मगर इतने पे हमारे सवाल ख़त्म हो जाएँ तो लानत है. हमने उन्हें चेक और बैंक ड्राफ्ट के तीन महीने में इस्तेमाल ना होने पर ख़त्म हो जाने की याद दिलाते हुए फिर पूछा, ‘ये भी ख़त्म होता होगा ना’.

अब हमें, खुद में और सरकार में अंतर का ज्ञान मिला, चेक या बैंक ड्राफ्ट मेरा या ज्यादा से ज्यादा किसी बैंक का बॉन्ड है.

जबकि पोस्टल ऑर्डर पर भारत सरकार की मुहर है, वो सरकारी बॉन्ड है, RBI का जारी पर्चा है, भारत सरकार के ख़त्म हुए बिना वो ख़त्म नहीं हो सकता.

इतनी देर में मेरे जैसा गंभीर शिष्य पाकर पोस्ट ऑफिस कर्मी महोदय प्रसन्न हो चुके थे.

उन्होंने मुझसे पोस्टल ऑर्डर लेकर अब उस पर तारीख देखी. फिर बताया कि ये इस महीने की 28 तारीख को ख़त्म नहीं हो रहा, लेकिन अगले साल, यानि 28-08-2017 के बाद इसके इस्तेमाल के लिए मुझे इस पर एक रुपये का रेवेन्यु स्टाम्प लगाना पड़ेगा.

ये सुनते ही हमारे मन में शकुनि टाइप ख़याल जागे. हमने पूछा, ‘मतलब 25-08-2017 को कहीं जमा कर दें तो दिक्कत होगी.’

कर्मी खिलखिलाए, बताया, ‘कुछ NGO वाले ऐसा करते हैं. मगर RTI अधिकारी को ऑफिस के पेट्टी कैश अकाउंट से एक रुपये वाला रेवेन्यु स्टाम्प दिया जाता है.’

‘ऐसे सभी पोस्टल ऑर्डर पर वो पहले ही रेवेन्यु स्टाम्प लगा के भेजेगा और चतुराई काम नहीं आएगी’, कहकर श्री कृष्ण टाइप मुस्कुराते सरकारी कर्मी महोदय ने, समझ गए बच्चू वाले भाव में सर हिलाया.

ज्ञान प्राप्ति से संतुष्ट हमने, ‘जी धन्यवाद’ कहकर हाथ जोड़े, और घर की ओर रवाना हुए.

ओह ये तस्वीर… ये आज दोपहर पटना जी.पी.ओ. (मुख्य पोस्ट ऑफिस) में लगी लम्बी-लम्बी कतारों की है.

हमें दुखी, हैरान, परेशान लोगों की लम्बी कतारें देखने और “मोदी हाय-हाय” सुनने का मन था, लेकिन लगता है इसके लिए शहर के बाहर के पीर-मुहानी या फिर अनिशाबाद बाय पास जैसे इलाकों तक जाने की मेहनत करनी पड़ेगी.

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