International Day Of Tolerance : आप भी बराबरी के कट्टर हैं, महोदय

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International Day Of Tolerance

आप के ईगो का गुब्बारा ज्यूपिटर बराबर है. आपके प्रगतिशील विचारों में इतनी कट्टरता है कि कोई आम जन आपकी वैचारिकता से टकरा जाए तो उसका सिर फट जाए.

आप चौबीस में से अठारह घंटे सोशल मीडिया पर आम जन के मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श करते पाए जाते हैं, विचार-विमर्श के अलावा आप करते क्या हैं, ओनली हातिमताई नोज़.

आप दुनिया बदल डालिये, इस बासी दुनिया को बदल ही डालना चाहिए. मगर ज़रा एक बार खुद को भी तो देखिए कि कितने बासी हैं आपके तरीक़े और तार्किकता.

आप असहिष्णुता के विरोध में वर्चुअल क्रान्तियाँ करते हैं और आप ताज़ा खिलते फूलों की महक नहीं सहन कर पाते.

आप औरतों की आज़ादी का झंडा बुलन्द करते करते हैं और आप प्रेम गीत गुनगुनाती किसी औरत से घबराते हैं.

आप नएपन की बातें करते हैं और नए की चमक से हिचकिचाते हैं. आप इस देश की बौद्धिक जमात हैं. आप अपने आप को और अपने विचार को संसार का अंतिम सत्य मानते हैं तो आप भी बराबरी के कट्टर हैं, महोदय !

साल 1995 में आज के दिन को यानी सोलह नवम्बर को यूनेस्को ने ‘इंटरनेशनल डे फ़ॉर टॉलरेन्स’ घोषित किया था. एक अनौपचारिक बातचीत में अपने इर्द-गिर्द जमा लोगों से ये सब कहा.

और ये भी कहा कि आपके पास हर बात के लिए एक सुविधाजनक तर्क होता ही है.
शायद एक दिन आप जान जाएँगे कि सारे तर्क अंततः कुतर्क होते हैं.

– बाबुषा कोहली

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