International Day Of Tolerance : अबे और कितना झेलें?

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International Day Of Tolerance

सहिष्णु होने का अर्थ होता है सहनशील होना.
सहना ……. बर्दाश्त करना ……….
सहन किसे करते हैं आप?
किसको बर्दाश्त करना पड़ता है?
सहन करना ……. ये शब्द लिया ही negative sense में है.
हम किसी की ज़्यादतियाँ बदतमीजियां अत्याचार को सहन करते हैं.
आज सारी दुनिया ……. सारी सेक्युलर जमात हमको शिक्षा दे रही है कि सहिष्णु बनो.
अबे और कितना झेलें?

1400 साल की गुलामी झेल ली. मोहम्मद बिन कासिम से ले के तैमूर लंग और अहमद शाह अब्दाली गज़नी गोरी टीपू सब बर्दाश्त किया.

सोमनाथ से ले के अयोध्या काशी मथुरा तक सहन ही तो किया …..

शहर के शहर क़त्ल कर दिए गए. सहन किया.

चित्तौड़ में 16000 क्षत्राणियों का जौहर हुआ …….. सहन ही तो किया.

पहले मुसलमाँ फिर पुर्तगाली फ्रेंच अंग्रेज सब आये और लूट के चलते बने.

सहन ही तो कर रहे थे ………..

मुल्क के तीन टुकड़े हुए. सहन ही तो किया ……….

हमसे ज़्यादा कौन सहन करेगा बे?

अबे हमको सहनशीलता का पाठ पढ़ाते हो?

5000 हज़ार साल के इतिहास के हमने कब किसे मारा?

किसपे ज़ुल्म अत्याचार किये धर्म के नाम पे?

कब किसकी गर्दन पे तलवार रख के उसे हिन्दू बनाया?

सहिष्णुता का पाठ हमको मत पढ़ाओ भैया.

तुम खुद ऐसे बनो कि तुम्हें बर्दाश्त न करना पड़े.

चाल चरित्र तुम बदलो. आक्रामकता तुम्हारा चरित्र है.

उसे बदलो. ऐसा व्यवहार मत करो कि किसी को तुमको बर्दाश्त करना पड़े.

सहन करना पड़े.

क्योंकि कभी कभी सहन नहीं भी होता ………..

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