दस नक्सलियों को फांसी, 3 को उम्रकैद, सेनारी नरसंहार पर फैसला

जहानाबाद. बिहार में करीब सत्रह साल पहले, चारा घोटाले में सज़ायाफ़्ता लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में हुए खौफनाक सेनारी नरसंहार मामले में मंगलवार को जहानाबाद की सिविल कोर्ट ने 15 दोषियों को सजा सुनाई है.

अदालत ने इस मामले में 10 दोषियों को फांसी, तीन को आजीवन कारावास की सज़ा दी है. वहीं, दो दोषियों को बाद में सजा सुनायी जायेगी.

जंगलराज के उस दौर में प्रतिबंधित नक्सली संगठन एमसीसी ने 18 मार्च 1999 को जहानाबाद जिले के सवर्ण बाहुल्य सेनारी गांव में 34 लोगों को उनके घरों से खींच कर मौत के घाट उतार दिया था.

लगभग 500-600 की संख्या में आए हथियारबंद नक्सलियों ने उस समय सेनारी गांव के 34 लोगों को उत्तर सामुदायिक भवन के पास ले जाकर गर्दन रेतकर हत्या कर दी थी.

इस घटना में सात लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. बताया जाता है कि नक्सलियों ने करीब 40 से अधिक लोगों को अपने कब्जे में ले लिया था.

इस मामले की सुनवाई करते हुए 27 अक्टूबर को अपर न्यायाधीश तृतीय रंजीत कुमार सिंह की अदालत ने 15 आरोपितों को दोषी करार दिया था. वहीं, सबूतों के अभाव में 23 लोगों को रिहा किया गया था.

अदालत ने धारा 146, 302, 149, 307, 149, 3/4 एस एक्ट के तहत अभियुक्तों को दोषी करार दिया था. अदालत ने सजा सुनाने के लिए 15 नवंबर की तिथि मुकर्रर की थी.

गांव की ही चिंतामणि देवी ने करपी थाने में 15 नामजद समेत चार-पांच सौ अज्ञात हमलावरों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी थी.

चिंता देवी के बयान पर गांव के 14 लोगों सहित कुल 70 नामजद लोगों को अभियुक्त बनाया गया था.

चिंता देवी के पति अवध किशोर शर्मा व उनके बेटे मधुकर को भी इस वारदात में मौत के घाट उतार दिया था.

चिंता देवी की तकरीबन पांच वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है. मामले में कुल 67 लोग गवाह बने थे जिसमें से 32 ने सुनवाई के दौरान गवाही दी थी.

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