इज़रायली राष्ट्रपति का पिछले 20 साल में पहला भारत दौरा

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Union Minister Dr Harshvardhan welcomes President of Israel Reuven Rivlin

नई दिल्ली. इजरायल के राष्ट्रपति रियुवेन (रुवि) रिवलिन आज अपनी राजकीय भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे. किसी भी इजरायली राष्ट्रपति द्वारा पिछले 20 साल में भारत की यह पहली आधिकारिक यात्रा है.

अक्टूबर 2015 में भारत के राष्ट्रपति मुखर्जी की इजरायल दौरे के मद्देनजर रिवलिन पारस्परिक आधिकारिक यात्रा पर भारत आ रहे हैं. उनकी यह यात्रा भारत के साथ इजरायल के बढ़ रहे सहयोग संबंधों का प्रतीक है.

इस्राइली राष्ट्रपति ने एक साक्षात्कार में विभिन्न मुद्दों पर बोलते हुए स्वीकार किया कि फलस्तीन मुद्दे पर भारत के साथ मतभेद हैं.

उन्होंने भारत इस्राइल के बढ़ते संबंधों के बारे में गर्मजोशी से बोला क्योंकि दोनों देश अगले वर्ष उनके राजनयिक संबंध कायम होने के 25 वर्ष मनाने की तैयारी कर रहे हैं.

रिवलिन ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को पूरा सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है.

उन्होंने कहा है कि भारत एवं इस्राइल की मित्रता लम्बे समय से सतत रूप से चल रही है तथा यह ऐसा सम्बन्ध नहीं है जिसे हमें छिपाने की जरूरत पड़े.

रिवलिन आठ दिनों की भारत यात्रा पर आज यहां पहुंचे. पिछले करीब 20 साल में किसी इस्राइली राष्ट्रपति की यह पहली भारत यात्रा है.

भारत में रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करने वाले सबसे बड़े देशों में इस्राइल शामिल है तथा आतंकवाद से निबटने में वह व्यापक स्तर पर भारत का सहयोग कर रहा है.

रिवलीन के साथ व्यवसायियों का एक बड़ा शिष्टमंडल भी आया है. इस्राइली राष्ट्रपति कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत करेंगे.

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को पूरा समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताते हुए रिवलिन ने कहा कि उनके देशों को लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा में भारत के साथ खड़ा होने पर गर्व है.

उन्होंने कहा, आतंकवाद, आतंकवाद होता है, भले ही इसे कोई भी अंजाम दे या कोई भी इसका पीड़ित बने. इस भयानक बुराई के खिलाफ अपने वचनों से इसकी भर्त्सना करना और अपने कमों से इसके विरुद्ध लड़ना, हम सबका दायित्व है.

भारत के अरब के साथ करीबी संबंधों एवं भारत की घरेलू राजनीति पर रिवलिन ने कहा, इस्राइल को भारत के साथ उसकी मित्रता पर गर्व है तथा मेरा मानना है कि भारत को भी इस्राइल के साथ उसकी मित्रता पर गर्व है.

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस्राइल एवं फलस्तीन को प्रत्यक्ष बातचीत करने के लिए काम करना चाहिए.

स्वतंत्र फलस्तीन और पूर्वी यरूशलम में उसकी राजधानी को भारत के समर्थन पर उन्होंने कहा, यह जरूरी नहीं है कि मित्र हर बात में आंख से आंख मिलाकर देखें. मित्रों के रूप में हम सम्मान एवं समझ के साथ असहमत होने के लिए सहमत हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, इस्राइल समझता है और भारत की इस इच्छा को साझा करता है कि हमारे एवं फलस्तीन के बीच न्यायोचित एवं स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए.

साथ ही उन्होंने जोड़ा, किन्तु ऐसे किसी समाधान के सफल होने की गुंजाइश नहीं है जब तक कि हम लोगों के बीच अभी से विश्वास बहाली के लिए काम नही करें.

रिवलिन ने कहा कि यह केवल नेताओं एवं सरकारों की मित्रता नहीं है. यह समाज के सभी वर्गों के लोगों के बीच मित्रता है.

उन्होंने जहा, यह ऐसी मित्रता नहीं है कि जिसे हमें छिपाना चाहिए. यह ऐसी मित्रता है जो हमें सतत रूप से दिखाई पड़ती है.

रिवलिन ने कहा कि यह किसी इमारत के उस प्रवेश स्थल की तरह है जिसमें इस्राइलियों, भारतीयों एवं सभी लोगों के लिए बेहतर विश्व हो.

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