हराम के 15 लाख सबको चाहिए अपने खाते में, पर कष्ट ज़रा बर्दाश्त नहीं

बहुत पहले हमारे पास एक भैंस थी. न जाने कैसे उसके सींग के नीचे सिर में चोट लगी और फिर उसमें कीड़े पड़ गए.

य्य्य्ये लंबे लंबे कीड़े…

अब भैंस परेशान. और उस से ज़्यादा हम परेशान. क्योंकि कीड़े सींग के नीचे पड़े थे जहां ऊँगली जाती न थी.

दूसरे वो भैंस टिकती न थी. कोई छूता तो जोर से झटक देती. हमने बहुत कोशिश की पर सफलता न मिली.

गाँव में पशुओं के लिए चिकित्सा इतनी आसानी से नहीं मिलती. न तो डॉक्टर आसानी से उपलब्ध होते हैं, न उनके सहायक और न उपकरण संसाधन.

भैंस बिलकुल भी सहयोग नहीं कर रही थी और बेबसी में मुझे खीझ उठ रही थी.

मैं बार बार यही सोच रहा था कि काश ये भैंस समझ पाती कि हम इसकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं.

हमारा इरादा इसकी मदद करने का है, न कि इसे कोई कष्ट पहुंचाने का. पर भैंस तो आखिर भैंस ठहरी. उसे कोई कैसे समझायेगा?

अंततः शाम को पशु चिकित्सालय से एक कम्पाउण्डर बुलाया गया. उसने पूरा उपाय बनाया… भैंस को गिरा के, उसके चारों पैर बाँध के लिटा दिया गया… बांस का एक देसी जुगाड़ बना के उसे ऐसा जकड दिया कि हिल भी न पाए.

फिर एक चिमटी से पकड़ के सारे कीड़े निकाले और घाव को धो के उसकी मरहमपट्टी की. पूरे 15 दिन सेवा और प्रयास हुआ तो जान बची वरना मर जाती.

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गुलाम कौम का गुलामी वाला चरित्र सामने आने लगा है.

गुलाम की सबसे बड़ी निशानी होती है कि वो Status Quo मने यथा स्थिति बहाल रखने में विश्वास करता है.

अपने Comfort Zone से, सुविधाजनक स्थिति से बिलकुल बाहर नहीं आता.

दिमाग से कुंद होता है. आत्मरक्षा कौशल (survival skills) शून्य होता हैं.

सारी जिंदगी नाली में पड़ा कराहता रहेगा.

खुद नाली से बाहर आ नहीं सकता. पर जैसे ही कोई नाली से निकालने के लिए कोशिश करेगा तो बिलकुल भी सहयोग नहीं करेगा.

एक समय आ जाता है जब गुलाम अपनी गुलामी में भी आनंद लेने लगता है.

बड़े नोटों के बंद होने से, demonetization से गुलामों को दिक्कत होने लगी है. सिर्फ तीन दिन में सारा आदर्शवाद और सारा राष्ट्रवाद हवा हो गया है.

उड़ी हमला हुआ था तो सब एक सुर में युद्ध-युद्ध चिल्ला रहे थे.

अब शान्तिकाल में ही सिर्फ तीन दिन की दिक्कत बर्दाश्त नहीं हो रही.

हाय मर गए… हाय मर गए… का सामूहिक गान शुरू हो गया है.

दो-चार घंटे लाइन में खड़ा होना पड़ गया तो सारी मर्दानगी हवा हो गयी. नमक जैसी चीज़ के लिए 500 का नोट ले के दौड़ पड़े. मने नमक न मिला तो मर जायेंगे…..

हराम के 15 लाख सबको चाहिए अपने खाते में, पर उस 15 लाख के लिए ज़रा सा भी कष्ट बर्दाश्त नहीं.

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