जापान की धरती पर नमो उद्घोष : चिंता कर रहे थे परेशानियों की, बरसा आशीर्वाद

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PM Modi

टोक्यो. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जापान की ज़मीन पर भी भारतीय बीज बो दिए हैं. नमो की विदेश यात्राओं पर ताने कसने वाले लोग नहीं जानते कि यही बीज आगे जाकर वटवृक्ष बनेंगे और भारत के वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत को पल्लवित करेंगे.

भारत में हाल ही में हुए Demonitization पर बोलते हुए बोलते हुए उन्होंने लोगों की तकलीफ को उस प्रसव पीड़ा की तरह बताया जिससे नया जीवन जन्म लेता है. और इसी वजह से देश के लोग उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं.

मोदी ने इसे देश का सबसे बड़ा ‘स्वच्छता अभियान’ बताते हुए कहा कि जो लोग गंगा में चवन्नी तक नहीं डालते थे आज वो नोट बहा रहे हैं. काले धन के पाप का प्रायश्चित भला और क्या हो सकता है कि माँ गंगा ही उनका पाप धो रही हैं.

हालांकि उन्होंने सीधे सीधे कह दिया कि जो लोग अपने अकाउंट्स में ब्लैक मनी जमा करेंगे, उसके खिलाफ सरकार बेहद सख्त कार्रवाई करेगी.

जापान में नमो की बातें –

उन्होंने जापान के फुकुशिमा में 2011 में सुनामी की आपदा का किस्सा सुनते हुए कहा कि सरकार ने सरकारी कर्मचारियों से बिजली, एसी बंद करने को कहा, लेकिन पूरी जनता ने इसे अपनी जिम्मेदारी माना. मुझे लगता था कि कैसे महान लोग हैं. देश के लिए क्या कुछ कष्ट नहीं झेलते.

मैं सोचता था कि क्या हमारे देश में ऐसा हो सकता है. लेकिन आज मैं बड़े विश्वास से कह सकता हूं कि हिंदुस्तान के आम आदमी को भी मौका मिले तो वह जिम्मेदारी से पीछे रहने वालों में से नहीं है. यह मैं अनुभव से कह सकता हूं. अभी-अभी का मेरा ताजा अनुभव है.

उन्होंने जापान के लोगों को भी वैसे ही संबोधित होते हुए कहा जैसे वो भारतीय नागरिकों को प्रेम और सम्मान से संबोधित करते हैं कि आपको भी पता चला होगा… अचानक रात को आठ बजे 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए गए.

मैं सवा सौ करोड़ देशवासियों को नमन और सलाम करता हूं. घर मे शादी है… पैसे नहीं हैं… मां बीमार है… मुश्किल है… लेकिन इन सबके बावजूद… तकलीफ के बाद भी…. लोग मुंह में ऊंगली डाल डालकर पुछवाते थे कि मोदी के खिलाफ कुछ बोलो…

लेकिन मैं देश के लोगों को सौ सौ सलाम करता हूं. कोई चार घंटे तो कोई छह घंटे लाइन में खड़ा रहा, लेकिन तकलीफ झेली… लेकिन दिश के हित में इस फैसले को स्वीकार किया.

जब मैं यह फैसला ले रहा था तो मुझे भी पता नहीं था कि जनता से ऐसा आशीर्वाद मिलेगा. मैं तो बस तकलीफों का अंदाजा लगा रहा था.

यह फैसला ऐसा था कि मैं किसी को बता भी नहीं सकता था. मैं अपनी छोटी सी टीम के साथ सोच रहा था कि यह तकलीफ होगी, वह तकलीफ होगी. मैंने नहीं सोचा था कि आशीर्वाद भी मिलेगा.

हमने कह दिया है कि कोई गृहिणी ढाई लाख रुपये जमा कर देगी, तो सरकार उसे नहीं पूछेगी कि यह कहां से आए. इसका परिणाम यह हुआ कि कई बेटे और बहुएं जिन्होंने मां को वृद्धाश्रम में रखा था, वे उन्हें लाकर खाते में ढाई-ढाई लाख जमा कर रहे हैं. बताइए क्या वह मां मुझे आशीर्वाद नहीं देगी?

यह स्वच्छता का अभियान है. यह किसी को परेशान करने के लिए नहीं है. तकलीफ होगी. लेकिन जल्दबाजी की जरूरत नहीं है. नोट वापसी के लिए 50 दिन दिए गए हैं. आपका हक आपके खाते में आ जाएगा.

उन्होंने साफ़ साफ़ चेतावनी देते हुए कहा कि – मैं स्पष्ट कह रहा हूं कि बिना हिसाब का कुछ हाथ आया, तो देश की आजादी से लेकर अब तक का हिसाब करने वाला हूं. जितने लोगों को लगाना पड़े, उतने लोगों को इस काम में लगाऊंगा.

अगर किसी ने कालाधन बैंक में यह सोचकर जमा किया कि देखा जाएगा तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा. जो मुझे जानते हैं, वह समझदार हैं. ऐसे लोग अब सोचते हैं कि गंगाजी में बहाना बेहतर है. पैसे मिले न मिले, पुण्य तो मिल जाएगा. ईमानदार लोगों के लिए मेरी सरकार सबकुछ करेगी, बेईमान का हिसाब बराबर किया जाएगा.

जिन लोगों को यह लगता है कि यह फैसला अचानक एक दिन मुंह उठाकर कर दिया उनको भी मोदीजी ने यह सन्देश पहुंचा दिया कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है. पहले एक स्कीम निकाली था. 67 हजार करोड़ उससे आए. लोग कहते रहे कि मोदी फेल हो गए. पिछले दो साल में सवा लाख करोड़ रुपया वापस आया. है. मौका दिया गया था. अब गलती मेरी नहीं है.

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 30 दिसंबर तक लोगों के पास समय है. तब तक कोई मुश्किल नहीं होगी. जिनका जो हक़ है उनको मिल जाएगा.

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