डॉनल्ड ट्रम्प की जीत के बहाने, चिंता विज्ञान-गणित की

डॉनल्ड ट्रम्प के जीतने पर विचित्र प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

कोई कहता है कि डॉनल्ड ट्रम्प, व्लादिमीर पुतिन और नरेंद्र मोदी विश्व से इस्लामी आतंक का ख़ात्मा कर देंगे.

एक पूर्व सैन्य अधिकारी से पत्रकार बने सज्जन जो लेफ्ट-लिबरल टाइप का स्वभाव रखते हैं, उन्होंने ‘भक्तों’ को नसीहत दी है कि ऑस्ट्रेलिया में किसी को अमरीका के राष्ट्रपति पद के चुनाव से कोई मतलब नहीं.

और भी बहुत से लोग हैं जो हिलेरी की पराजय को बरखा दत्त संग उनकी तस्वीरों से जोड़ कर विश्लेषण कर रहे हैं. भावी फर्स्ट लेडी का भी मजाक उड़ाया जा रहा है.

मैं कुछ और ही देखने की जुगत में लगा था.

आज जब ट्रम्प ने चुनाव में जीत के उपरांत माइक थामा तो उन्होंने सबसे पहले अपनी प्रतिद्वंद्वी हिलेरी क्लिंटन की जम कर तारीफ की और उनके प्रयासों को सराहा. ये चीज भारत में देखने को नहीं मिलती.

दूसरी महत्वपूर्ण बात ये कि प्रतिष्ठित नेचर पत्रिका में अमरीका की वैज्ञानिक बिरादरी की प्रतिक्रिया और चिंताएं साफ़ ज़ाहिर हुई हैं.

अमरीका के वैज्ञानिकों ने ट्रम्प के बयानों के आधार पर चिंता प्रकट की है कि कहीं ये व्यक्ति साइंस की फंडिंग को न प्रभावित करे जिसके कारण शोध में बाधाएं उत्पन्न हों.

भविष्य में क्या होगा ये किसी को नहीं पता. मगर मैं ये देख कर आश्चर्य में हूँ कि वहाँ राष्ट्रपति चुने जाने पर वैज्ञानिक बिरादरी की भी प्रतिक्रिया ‘आती’ है और इस पर मंथन होता है.

कुछ दिन पहले ही मैथमेटिकल एसोसिएशन ऑफ़ अमेरिका (MAA) ने राष्ट्रपति चुनाव की व्यवस्था का गणितीय विश्लेषण कर एक व्याख्यान आयोजित करवाया था.

इस व्याख्यान की फंडिंग अमेरिका के लिए टेक्निकल इंटेलिजेंस जुटाने वाली एजेंसी NSA ने की थी.

मुझे तो पता ही नहीं था कि NSA गणितीय रिसर्च की भी फंडिंग करती है. हालांकि यह स्वाभाविक ही है क्योंकि NSA का मुख्य कार्य cryptology के ज़रिये दुनिया भर से सूचनाएं जुटाना है.

क्रिप्टोलॉजी पूरी तरह से गणितीय विधा है. हमारे देश में तो कोई इतना सोच ही नहीं सकता.

यहाँ साइंस की बात कीजिए तो या तो लोग फंतासी पतंग उड़ाने लगते हैं या ये कह कर ख़ारिज कर देते हैं कि यार, विज्ञान-गणित से तो हमारा छत्तीस का आंकड़ा है.

गणितीय विज्ञान से ही encryption किया जाता है जिससे क्रेडिट डेबिट कार्ड की गोपनीयता बनी रहती है. कुछ दिन पहले ही लाखों क्रेडिट कार्ड में सेंध लग चुकी है.

टेक्निकल इंटेलिजेंस जुटाने के लिए पूर्ववर्ती NDA शासन में NTRO बनाया गया था जहाँ UPA के समय में अफसरों के सगे सम्बंधियों को घुसाया गया और एक अहम राष्ट्रीय सुरक्षा की संरक्षक एजेंसी की भ्रूण हत्या कर दी गयी.

अब जाकर कुछ वैज्ञानिकों की भर्ती की खबरें आ जाया करती हैं. वर्तमान मोदी सरकार NATGRID यानि नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड की पुनर्संरचना के लिए भी प्रतिबद्ध है.

फिर भी कोई ठोस संस्थागत ढांचा तभी खड़ा होगा जब गणित विज्ञान में मौलिक शोध के लिए नीतिगत स्तर पर फंडिंग की जायेगी.

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी इन बातों पर और भी चीजें हैं. उन पर बाद में लिखूंगा. अब मैं हर चीज में विज्ञान खोज लेता हूँ ये अलग बात है.

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