दिल्ली की धुंध : एनजीटी के सवालों का केजरी के पास नहीं कोई जवाब

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नई दिल्ली. राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में छाई धुंध और प्रदूषण पर नाराज़गी जताते हुए पूछा है कि जिसने भी हमारा आदेश नहीं माना उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?

एनजीटी ने इस संबंध में सोमवार को बुलाई बैठक में दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार से कई सवाल किए जिसका उनके पास कोई जवाब नहीं था.

केजरीवाल सरकार से एनजीटी ने पूछा कि अगर दिल्ली सरकार ने इमरजेंसी घोषित की है तो बताइए कि रविवार को बिल्डर्स के, कूड़ा जलाने वालों के कितने चालान किए गए. इस पर केजरीवाल सरकार को कोई जवाब नहीं सूझा.

एनजीटी ने कहा कि ‘एक्शन में आइये, कागजी कार्रवाई से कुछ नहीं होगा, वरना हम अफसरों की तनख्वाह काटेंगे और जरूरत पड़ी तो जेल भी भेजेंगे.’

एनजीटी ने पूछा कि आपने प्रदूषण का अंदर और बाहर का स्तर बिना जाने स्कूलों की छुट्टी कर दी. घर और स्कूल दोंनो के अंदर प्रदूषण का स्तर बराबर है तो फिर छुट्टी की जरुरत ही नहीं है. सरकार ने इस पर कोई रिसर्च करने की जरूरत समझी ही नहीं.

एनजीटी ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए आगे कहा कि क्या हेलीकॉप्टर सिर्फ वीवीआईपी लोगों के लिए ही है. प्रदूषण को कम करने के लिए हेलीकॉप्टर से पानी का छिड़काव अब तक क्यों नहीं करवाया गया. जो एनजीटी ने सोचा वो सरकार और एजेंसी सोच ही नहीं पाई तो फिर करती कैसे.

एनजीटी का सवाल था कि पंजाब में 70 फ़ीसदी किसान फसल जला रहे हैं. उनको वो मशीन कैसे और कब तक दी जा सकती है जिससे फसलों को खेत में जलाया न जाए. सरकारों ने इस पर भी कुछ करना तो दूर सोचना भी जरूरी नहीं समझा.

एनजीटी ने केजरीवाल की बहुप्रचारित योजना पर निशाना साधते हुए पूछा कि ऑड-ईवन क्यों फेल हुआ? सरकार ने लागू करने से पहले कोई रिसर्च क्यों नहीं की?

सरकार हर साल प्रदूषण बढ़ने के बाद ही उस पर लगाम लगाने के उपाय क्यों क्यों सोचती है. पूरे साल क्या करती रहती है?

उल्लेखनीय है कि धुंध और प्रदूषण के चलते केजरीवाल सरकार ने सोमवार से तीन दिनों के लिए सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश सुनाया है. इसके अलावा सभी प्रकार के निर्माण कार्य और ध्वस्त कार्य पर फिलहाल पाबंदी लगा दी है.

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