दानिश उस ‘ग्रेवाल की कैटेगरी’ में नहीं, दिया है सर्वोच्च बलिदान

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आज़मगढ़ के दानिश खान, घर के बड़े बेटे थे. कश्मीर में इनकी तैनाती थी.

इनके दो छोटे भाई हैं. एक यूपी पुलिस में, दूसरा इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है.

बहन की शादी इसी साल 24 फरवरी को की थी, और दो दिन बाद यानी 26 फरवरी को दानिश का निकाह हुआ था, महज 9 महीने हुए थे शादी को.

दानिश खान कश्मीर के पुँछ घाटी में तैनात थे जहाँ पाकिस्तान ने संघर्षविराम का उल्लंघन करते हुए गोलीबारी की और आतंकियों को भारत में घुसाने का प्रयास किया.

दानिश खान की टुकड़ी ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया और घुसपैठ को नाकाम करके 2 आतंकी मार गिराए.

इस गोलीबारी और लड़ाई में दानिश खान ने सर्वोच्च बलिदान दिया… दानिश खान शहीद हो गए…..

अफ़सोस की बात है कि दानिश खान के अंतिम यात्रा में इलाके के एसडीएम को छोड़कर कोई नहीं पहुँचा. कोई नेता या मंत्री नहीं पहुँचा.

यूपी सरकार रथयात्रा में व्यस्त है. दिल्ली में बैठे राहुल और केजरीवाल अपने मोहरे आत्मघाती रामकिशन ग्रेवाल को शहीद बनाने में व्यस्त है.

इस कांग्रेसी मोहरे को दिल्ली सरकार 1 करोड़ दे रही है, हरियाणा सरकार 10 लाख के साथ परिवार के एक लोग को नौकरी.

दिन भर तथाकथित जबरदस्ती के शहीद रामकिशन के गांव के बच्चे-बच्चे का इंटरव्यू चलाने वाले चैनल भी वहां नहीं पहुंच पाए…

भारतीय सेना के द्वारा किये गए सर्जिकल स्ट्राइक पर आजमगढ़ के सांसद और भूतपूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने बयान दिया था कि उनके कहने और राय देने पर ये सर्जिकल स्ट्राइक किया गया है.

उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पोस्टर लगवाए थे. आजमगढ़ के किसी विधानसभा का कोई विधायक और वहां के सांसद भी नहीं पहुंचे और न ही सांसद महोदय ने इस शहादत पर कोई बयान ही दिया.

दानिश उस ग्रेवाल की कैटेगरी में नहीं हैं… दानिश ने सर्वोच्च बलिदान दिया है… दानिश के लिए कोई नहीं है…

है, तो सिर्फ जनता, जो अपनी बेचारगी के आंसू बहाती हुई शहीद को विनम्र श्रद्धांजलि दे रही है….

शहीद दानिश खान अमर रहे…. शहीद दानिश खान जिन्दाबाद….

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  1. दानिश खान के बलिदान का असर इन नेताओं पर नहीं पडेगा कारण इस सच्चे शहीद पर भोट की राजनीति नहीं हो सकती है

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