इसे NDTV की वकालत के रूप में न देखा जाए…

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ये पोस्ट मुख्यतया आज की electronic और print मीडिया की दशा पे केंद्रित है. इसे NDTV की वकालत के रूप में न देखा जाए.

जब मैं ये पढता हूँ कि TRP में NDTV 11वें नंबर पे चला गया है, तो मुझे ताज्जुब होता है.

यदि चुनावी वोटिंग को एक पैमाना मान लिया जाए तो लगभग 65% हिंदुस्तान Anti भाजपा विरोधी, NDA विरोधी और मोदी विरोधी है.

विचारधारा की कुदृष्टि से NDTV इस मोदी विरोधी भावना का ही पोषण करता है.

मोदी विरोधी लोगों की संख्या भी इस देश में मोदी भक्तों से ज़्यादा है.

इसके बावजूद लोग इसे देखते नहीं?

क्यों???

चलिये इसी प्रश्न को थोड़ा घुमा कर पूछते हैं.

सुदर्शन चैनल तो हिंदुत्व का पक्षधर और कांग्रेस विरोधी है…. मोदी भक्त उसे कितना देखते हैं?

मैंने एक-दो बार देखने की कोशिश की… दो मिनट से ज़्यादा बर्दाश्त ही न हुआ…

इसका मतलब हुआ, विचारधारा के अलावा और भी बहुत से कारक हैं जो दर्शक-संख्या पर असर डालते हैं.

उस ज़माने में, जब कि समाचारों के लिए दूरदर्शन के न्यूज़ बुलेटिन के अलावा कोई अन्य इलेक्ट्रॉनिक विकल्प न था, मूर्धन्य पत्रकार एसपी सिंह ने ‘आज तक’ की शुरुआत की थी.

शुरू में एकाध घंटे का एक न्यूज़ बुलेटिन हुआ करता था जो बेहद लोकप्रिय हुआ और जल्दी ही 24×7 न्यूज़ चैनल बन गया.

फिर और दूसरे चैनल आये. उनमें zee न्यूज़ और रजत शर्मा का India TV भी था.

NDTV के प्रणय रॉय पहले World this week नामक एक बेहद लोकप्रिय साप्ताहिक कार्यक्रम देते थे, वो NDTV ले आये.

फिर शुरू हुई TRP की दौड़. उसमें सबसे पहले गंदगी फैलानी शुरू की रजत शर्मा ने.

इस आदमी न्यूज़ चैनल का स्तर इस कदर गिराया कि न्यूज़ शब्द से ही नफरत हो गयी.

पर रजत शर्मा के गंदे, घटिया, गलीज़ न्यूज़ चैनल को बहुत ज़्यादा लोग देखने लगे और देखते ही देखते वो TRP में टॉप पर पहुँच गया.

फिर शुरू हुई TRP की चूहा दौड़…. नीचे गिरने की होड़ लग गयी. लोग स्तर गिराने लगे.

प्रिंस गड्ढे में गिर गया और 3 दिन बाद निकला. एक चैनल पर तो बिना ड्राईवर की एक कार दिन भर चलती रही. फिर न्यूज़ चैनल पर लाफ्टर चैलेंज और बिग बॉस दिखने लगा.

तभी ABP news ने, जो कि तब Star News हुआ करता था, एक क्राइम शो शुरू किया, जिसे श्रीवर्धन त्रिवेदी नाम का एक अजीब सी शक्लोसूरत वाला आदमी पेश करता था। वो ऐसे बोलता था कि देखने वाला एक साथ हंस और रो सकता था.

आश्चर्यजनक रूप से उसका वो अंदाज़ चल निकला। हर चीज़ को सनसनीखेज़ तरीके से, रजनीकान्त के माफ़िक़ नाटकीय अंदाज़ में प्रस्तुत करना….

क्राइम शो में तो ऐसी प्रस्तुति चल गयी पर फिर धीरे-धीरे न्यूज़ भी लगभग उसी अंदाज में पढ़ी / पेश की जाने लगी.

अब तो कई बार ऐसा लगता है कि न्यूज़ बताते-बताते एंकर गोली चला देगा या फिर आग लगा देगा.

न्यूज़ के प्रस्तुतीकरण में भयंकर नाटकीयता आ गयी.

वहीं जब हम विदेशी अंग्रेजी चैनल देखते, मसलन Al Jazeeraa या Russia Today या BBC, तो वहाँ न्यूज़ रूम में माहौल एकदम सामान्य दीखता था.

इसका मतलब, भारत की जनता इस नाटकीयता को, इस सनसनीखेज़ ढंग को पसंद कर रही थी???

TRP की होड़ में तकरीबन हर चैनल ने अपना स्तर गिराया। एंकर आगबबूला हो चिल्लाने लगे….

ऐसे में (गुस्ताखी माफ़) सिर्फ एक चैनल ने अपने को बचा के रखा इस नाटकीयता से, NDTV ने… और शायद इसीलिए वो TRP की दौड़ में पिछड़ता हुआ 11वें नंबर पर जा गिरा.

आज हमें NDTV से जो नाराज़गी है वो उसके एजेंडा पोषण और उसकी विचारधारा से है, जो उसकी रिपोर्टिंग को पक्षपातपूर्ण बना देती है.

यदि उनके सिर्फ इस एक पहलू में सुधार कर दिया जाए, उनके इस वामपंथी ईसाई मिशनरी पंथी एजेंडा पोषण और मोदी द्वेष को छोड़ दें तो कंटेंट और प्रस्तुतीकरण की दृष्टि से वो आज भी देश का बेहतरीन चैनल है.

शायद यही कारण है कि इस से लाख घृणा होने के बावजूद इसे देखने का लोभ संवरण मैं नहीं कर पाता.

वैसे आपको बता दूं कि जिन कारणों से मैं NDTV को नापसंद करता हूँ, उन्ही कारणों से Zee news और रजत शर्मा के India TV को भी करता हूँ.

मई 2014 के बाद ये दोनों चैनल जिस तरह मोदी और सरकार के चरणों में बिछ गए और चरण चाटन कर चरण प्रक्षालन करने लगे…..

न्यूज़ को न्यूट्रल होना चाहिए…. न चाटन न काटन…. न्यूज़ को न्यूट्रल होना ही चाहिए.

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  1. ये जो लेख के आखिर में आपने Zee News और INDIA TV के मोदी और सरकार के चरणों में बिछ जाने और चरण चाटन करने की जो धारणा आपने व्यक्त की है वही धारणा सोशल मीडिया पे आपके ( यानी इस लेख के लेखक महोदय अजीत सिंह जी के ) विषय में बहुत मजबूत है की अजीत सिंह मोदी और सरकार के चरण चाटन करने में सभी हदें पार कर देते हैं

    आज दो न्यूज चैनल के न्यूट्रल होने की जगह मोदी-समर्थक हो जाने से आपको तकलीफ हो रही है लेकिन इससे पहले जो सारे के सारे चैनल चाहे ABP NEWS, NDTV, AAJ TAK, ZEE-NEWS, INDIA TV, IBN7 etc etc न्यूट्रल होने की जगह मोदी-विरोधी रहे और 12 साल तक उस व्यक्ति को बदनाम करते रहे उसका हिसाब कौन देगा ????

    मुझे May 2014 के बाद Zee News और INDIA TV के Pro-MODi हो जाने से कोई दुःख नहीं बल्कि ख़ुशी ही है की अब मीडिया जगत में अब केवल Leftist Ideology की Monoply नहीं रहेगी और Right Wing Ideology को भी स्थान मिलना शुरू हुआ है , वरना इससे पहले हर मीडिया चैनल में राष्ट्रवादी विचारधारा को बराबरी की जगह भर देना तो दूर की बात उसे नष्ट करने की हद तक जो प्रोपोगंडा चलाया जाता था इस NDTV समेत सभी मीडिया चैनलों द्वारा वो पीड़ा के साथ-२ एक क्रोध पैदा करता था

    अब May 2014 के बाद से मुकाबला थोडा बराबरी का होना शुरू हुआ है –

    Pro-Secularist – NDTV, AAJ-TAK, INDIA-TV, CNN-IBN

    Pro-NationaList- ZEE-News, INDIA TV, TIMES NOW, NEWS-X

    SomeWhat NeutraL – IBN7, NEWS-NATION

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