इस्लामिक स्टेट की तरफ से लड़ रहे कौन हैं ये भारतीय!

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नई दिल्ली. इस्लामिक स्टेट के एक भारतीय आतंकवादी सुब्हानी हजा मोइदीन ने खुलासा किया है कि ISIS के स्वघोषित खलीफा की राजधानी और सीरिया के शहर रक्का में अधिकांश भारतीय लड़ रहे हैं.

इस चौंकाने वाले  खुलासे को करने वाले भारतीय आतंकी सुब्हानी की ISIS में ट्रेनिंग साल 2015 में इराक में हुई थी और वह पेरिस हमला करने वालों से भी मिल चुका है.

ISIS से जुड़े तमिलनाडु के इस आतंकी सुब्हानी हाजा मोइदीन ने सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.

मोसुल में पिछले पांच महीनों के दौरान सुब्हानी ISIS में शामिल अन्य भारतीय सदस्यों के संपर्क में था जिसके बाद उसे पता चला कि अधिकांश भारतीय आतंकियों को रक्का में रखा गया है.

इस खुलासे के बाद खुफिया एजेंसियां उसके दावों की जांच कर रही हैं क्योंकि एजेंसियों का ऐसा मानना है कि ISIS में शामिल भारतीय, जिनमें केरल के 22 लोग भी शामिल हैं, अफगानिस्तान में ISIS के लिए लड़ रहे हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पूछताछ में सुब्हानी ने बताया कि 2014 से अब तक 60 से ज्यादा भारतीय नागरिक बगदादी के आतंकी संगठन आईएस में शामिल हो चुके हैं. इनमें से कुछ लोगों की लड़ाई में मौत भी हो चुकी है.

एक अनुमान के मुताबिक, रक्का में 7 से 10 हजार आईएस लड़ाके हैं जबकि अन्य इराकी फौजों द्वारा मोसुल से खदेड़े जाने के बाद आसपास के इलाकों से अपने परिवारों के साथ रक्का पहुंच रहे हैं.

सुब्हानी ने बताया कि साल 2015 में वह तुर्की के शहर उर्फा में बॉर्डर पर लगे तारों को काट कर इराक में दाखिल हुआ था. उस वक्त उसके साथ कई देशों के आईएस आतंकी थे, जो अपने परिवारों के साथ इराक पहुंचे थे.

सुब्हानी का दावा है कि उसकी तरह जब कोई विदेशी लड़ाका इराक या सीरिया में आईएस के इलाके में पहुंच जाता है तो उसे हमेशा 22 से 25 लड़ाकों के ग्रुप में रखा जाता है.

सुब्हानी ने बताया, ‘हमें दिन में दो बार सुबह 10 बजे और शाम को सूरज ढलने के बाद खाना दिया जाता था. दिन की शुरुआत सुबह नमाज के साथ होती थी जिसके बाद हम कसरत करते थे.

इसके बाद भरती लोगों का ब्रेन वाश करने के लिए दो घंटे की धार्मिक उपदेशों की क्लास होती थी जो अरबी और अंग्रेजी भाषा में होती थी.

उसने बताया कि आईएस के बड़े लड़ाके दिन में छह बार बगदादी के नाम पर उन्हें शपथ भी दिलाते थे. दो हफ्ते तक चली इस धार्मिक कक्षा के बाद उन्हें मिलिटरी ट्रेनिंग के लिए मोसुल ले जाया गया.

सुब्हानी को उमर इब्नु खताब खतीबा नाम के ग्रुप में रखा गया था जिसका लीडर एक फ्रांसीसी था जिसे अबु सुलेमान अल-फ्रांसीसी नाम दिया गया था.

उसके ग्रुप में पाकिस्तान के लश्कर ए तैयबा का एक पूर्व सदस्य मोहम्मद गनी उस्मान भी था जो बम बनाने में एक्सपर्ट था.

इसी साल उस्मान को 2015 में हुए पेरिस हमलों के आरोप में ऑस्ट्रेलिया से गिरफ्तार किया गया था.

हथियारों की ट्रेनिंग में इन लड़ाकों को एके रायफल, रॉकेट लॉन्चर सिखाने के अलावा लड़ाई के दांव-पेच भी सिखाए जाते थे.

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के नेतृत्व में सहयोगी सेनाएं अब रक्का की ओर रवाना होने की तैयारी कर रही हैं ताकि इस तेल से भरपूर शहर से आईएस का कब्जा खत्म किया जा सके.

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