दिखने लगे हैं मोदी सरकार के परमाणु कार्यक्रम के नतीजे : डॉ जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली. केन्‍द्रीय राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्‍व में पिछले दो वर्षो में भारत के परमाणु कार्यक्रम ने हर दूसरे क्षेत्र और विभाग की तरह से तेजी से प्रगति की है और अब इसके परिणाम दिखने प्रारंभ हो गये हैं.

डॉ जितेंद्र सिंह के पास परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष, प्रधानमंत्री कार्यालय, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार), कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन मंत्रालय का प्रभार है.

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने रविवार को ये विचार ‘’हॉल ऑफ न्‍यूक्‍लियर पॉवर’’ की यात्रा के दौरान आगंतुकों विशेष रूप से छात्रों से वार्तालाप करते हुए व्‍यक्‍त किए.

इस दौरान उन्‍होंने भारत के परमाणु विकास के विभिन्‍न गौरवशाली पहलुओं की भी जानकारी दी.

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि प्रगति मैदान में हाल ही में ‘’ हॉल ऑफ न्‍यूक्‍लियर पॉवर’’ के गठन की अवधारणा इस अनुभूति से प्रेरित थी कि परमाणु ऊर्जा विभाग को भारत के पश्‍चिमी और दक्षिणी भागों में अधिक जाना जाता है और इस कारण विभाग को देश के इस भाग में कम लोग जानते हैं.

उन्‍होंने अपनी यात्रा में अधिकारियों को सलाह दी कि वे देशभर के शिक्षा संस्‍थानों को ‘’हॉल ऑफ न्‍यूक्‍लियर पॉवर’’ की यात्रा करने के लिए परिपत्र भेजें ताकि वे अपने शैक्षिक दौरों के समय दिल्‍ली में इसे अपनी अपनी यात्रा का एक आवश्‍यक अंग बनाएं.

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश के परमाणु कार्यक्रम के रूप में केंद्र सरकार स्पष्ट रूप से भारत के परमाणु कार्यक्रम को उत्तर में लाने का श्रेय ले सकती है.

उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में ही दिल्ली के उत्तर में हरियाणा में गोरखपुर नामक स्‍थल पर एक परमाणु संयंत्र स्थापित किया गया है.

उन्होंने कहा इसी प्रकार पंजाब और उत्तराखंड सहित अन्य उत्तरी राज्यों में भी और अधिक परमाणु प्रतिष्ठानों की स्थापना की संभावनाओं का पता लगाया जा रहा है.

उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रत्यक्ष और व्यक्तिगत संरक्षण के साथ, अपने परमाणु कार्यक्रम के मामले में भारत ने अग्रिम पंक्ति के देशों में जगह बना ली है.

डॉ. सिंह ने कहा, आने वाले वर्षों में भारत की बढ़ती जरूरतों के लिए परमाणु ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत बन जाएगी.

उन्होंने कहा कि एनएसजी (परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह) की सदस्यता के लिए भारत के दावे को भी दुनिया के देशों द्वारा तेजी से स्वीकार किया जा रहा है.

(source : pib.nic.in)

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