घुटनों तक बर्फ में धंसे, 21000 फुट की ऊंचाई पर तैनात फौजी को क्या संदेश दे रहे हैं राहुलजी!

indian-army-siachen-rahul-gandhi-orop

राम किशन ने ज़िन्दगी में बन्दूक नहीं पकड़ी. ज़िन्दगी में कभी बॉर्डर नहीं देखा… पर आज वो हमारी फ़ौज का प्रतिनिधि बना हुआ है.

एक भगोड़ा जो फौजी कभी था ही नहीं, उसे फौजियों का नेता बना दिया गया… क्या अब फौजियों के हक़ की लड़ाई DSC के चौकीदार लड़ेंगे?

जब आप राम किशन जैसे लोगों को फ़ौज का प्रतिनिधि बनाते हैं तो दुनिया को क्या मैसेज जाता है?

[क्या सचमुच फौजी था भी, खुदकुशी करने वाला तथाकथित पूर्व सैनिक!]

फ़ौज के सिपाही की पेंशन 5000 रु कम लग गयी तो आत्महत्या कर लेता है.

फौजी 5000 के लिए आत्महत्या कर लेता है.

50,000 के लिए क्या करेगा?

और 5 लाख के लिए?

5 करोड़ के लिए?

जो 5000 के लिए आत्महत्या कर रहा है, वो 5 लाख के लिए तो देश बेच देगा?

[हुज़ूर ये अस्पताल है, आपकी नौटंकी से मरीजों को कितनी तकलीफ होगी!]

ईश्वर न करे कि कभी ऐसी नौबत आ जाए कि देश फ़ौज को तनख्वाह देने की स्थिति में न रहे…. तो राम किशन जैसे फौजी क्या करेंगे?

अब एक सवाल राहुल गांधी से….

राहुल जी, पिछले 40 साल में, जब से आपकी दादी ने ये One Rank One Pension हटाई…. तब से लेकर आज तक कितने फौजियों ने OROP के लिए आत्महत्या की?

अब जबकि मोदी सरकार ने OROP दे दिया है. पुराने फौजी अफसर कह रहे हैं कि OROP का मुद्दा लगभग हल हो गया है.

छोटी मोटी कुछ समस्याएं रह गयी है और सरकार उनपे बड़ी संजीदगी से काम कर रही है और अगले 2 महीने में उन्हें हल कर लिया जाएगा.

हाथी निकल गया है, बस पूंछ रह गयी है, ऐसे में अब फौजियों को आत्महत्या के लिए क्यों उकसाया जा रहा है?

इस फ़र्ज़ी फौजी की फ़र्ज़ी आत्महत्या को मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है ?

और इसे मुद्दा बना के 20 साल के उस लड़के को, जो आज घुटनों तक बर्फ में धंसा, 21000 फुट की ऊंचाई पर देश के बॉर्डर की रक्षा कर रहा है, उसे क्या संदेश दिया जा रहा है?

यही न, कि आज जिसके लिए तुम अपनी जवानी कुर्बान कर रहे हो, वो अहसान फरामोश मुल्क बुढापे में तुम्हारी देखभाल नहीं करेगा???

OROP की मांग पिछले 40 साल से लंबित थी और इन्हीं राहुल गांधी की दादी और माँ-बाप ने उसे लटका के रखा.

और उस इतने पुराने मुद्दे को मोदी जी ने सिर्फ 2 साल में लागू कर दिया. जो थोड़ी बहुत कमीबेशी है उसे भी हल कर लेंगे.

राहुल जी, फ़ौज से राजनीति मत कीजिये, फौजियों को आत्महत्या के लिए मत उकसाइये.

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया ऑनलाइन (www.makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया ऑनलाइन के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया ऑनलाइन उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY