NDTV पर रोक : बिलबिलाए ‘ख़ास किस्म’ के पत्रकार, जनता ने किया स्वागत

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नई दिल्ली. पठानकोट हमले के दौरान गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग, जो आतंकवादियों की मददगार हो सकती थी, के लिए NDTV को एक दिन का प्रसारण बंद करने की सज़ा मिली है.

भारत सरकार के इस फैसले से जहां आम जनता में खुशी और संतोष है वहीं मीडिया जगत की एक ख़ास किस्म की जमात इससे बिलबिलाई हुई है.

अपने भाजपा या कहें मोदी-विरोधी रुख के लिए कुख्यात राजदीप सरदेसाई को उन पर या जिस चैनल में वो नौकरी कर रहे हैं उस पर कार्रवाई का डर सता रहा है.

अमेरिका में पीएम के कार्यक्रम के दौरान लोगों से मारपीट करने वाले सरदेसाई ने इस डर को ज़ाहिर करते हुए कहा है, भारत के सबसे संयमित और ज़िम्मेदार चैनलों में से एक एनडीटीवी इंडिया को प्रसारण मंत्रालय एक दिन के लिए बंद कर रहा है. आज एनडीटीवी है, कल कौन होगा?

वहीं उनकी पत्नी और इस जमात का प्रमुख नाम सगारिका घोष ने ट्वीट किया है कि एनडीटीवी को प्रतिबंधित करना स्वतंत्र मीडिया पर सरकार का शक्ति प्रदर्शन है. मीडिया की हत्या मत करो.

कांग्रेस समर्थक समझे जाने वाले NDTV पर कार्रवाई के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के बहनोई तहसीन पूनावाला की प्रतिक्रिया भी कुछ अलग नहीं थी.

पूनावाला ने लिखा, अगर एनडीटीवी ऑफ़ एयर हुआ तो मैं प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठकर ऑनलाइन एनडीटीवी देखूंगा.

ये पूनावाला, हाल के दिनों में जैन मुनि तरुण सागर पर विवादास्पद ट्वीट मामले में फंस चुके हैं.

पत्रकार सिद्धार्थ वर्दराजन ने एनडीटीवी पर सरकार के एक दिन के प्रतिबंध को सरकार की मनमानी और ताक़त का दुर्भावनापूर्ण उपयोग बताते हुए एनडीटीवी को कोर्ट जाने की सलाह दी है.

वर्तमान सरकार के प्रति अपने जाने-पहचाने रुख वाले इन चुनिन्दा नामों को छोड़ दिया जाए तो आम जनता ने इस कार्रवाई का स्वागत और समर्थन किया है.

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस बात की शिकायत ज़रूर की है कि सरकार ने इस चैनल को बहुत हलकी सज़ा दी. इस पर तो हमेशा के लिए प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए था.

वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुमार झा ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे भारतीय पत्रकारिता के इतिहास की सबसे बड़ी ख़बर बताया है.

पत्रकार संदीप देव ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है, सरकार के इस निर्दश के बाद स्पष्ट हो गया है कि एनडीटीवी और उसके रिपोर्टर-एंकर भारत की कीमत पर पाकिस्तान को लाभ पहुंचाने वाली रिपोर्टिंग करते रहे हैं!

देव ने लिखा, शायद यही वजह है कि एनडीटीवी की रिपोर्टर बरखा दत्त की तारीफ खुलेआम आतंकवादी हाफिज सईद किया करता था!

तेजिंदर पाल बग्गा ने ट्वीट किया, एनडीटीवी की पठानकोट हमलों की लाइव कवरेज के दौरान दी गई अहम जानकारियां चरमपंथियों के हाथ में भी आ सकती थी जिससे लोगों की जान ख़तरे में पड़ सकती थी.

कुलदीप वर्मा ने लिखा है कि NDTV पर सरकार के फैसले से अभिव्यक्ति की आज़ादी और पत्रकारिता की नैतिक ज़िम्मेदारी सही तरीके से परिभाषित हो जायेगी.

राहुल सिंगला ने लिखा, एनडीटीवी की सज़ा तीस दिनों से कम करके एक दिन कर दी गई है. लेकिन क्यों? इसे पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, हमें इसकी ज़रूरत नहीं है.

इसके अलावा NDTV के एंकर रविश कुमार का भी खूब मज़ाक बन रहा है. रविश ने कथित असहिष्णुता के मुद्दे पर अपने एक घंटे के शो के दौरान टीवी स्क्रीन काली की थी.

इसी की याद दिलाते हुए सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि बहुत शौक था स्क्रीन काली करने का, अब सरकार ने एक घंटे के लिए नहीं पूरे एक दिन के लिए चैनल को ही काला कर दिया.

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