भारत-नेपाल की साझी सांस्कृतिक विरासत है जनकपुर, राष्ट्रपति पहुंचे जानकी मंदिर

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जनकपुर. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शुक्रवार को जनकपुर, नेपाल में अपने सम्मान में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में शामिल हुए.

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि वह देवी सीता के शहर जनकपुर में आकर बहुत प्रसन्न हैं. सीता भारत और नेपाल दोनों देशों में ही पूजनीय है. जनकपुर हमारी साझी सांस्कृतिक विरासत का सबसे अच्छा उदाहरण है.

उन्होंने कहा, जनकपुर प्राचीन काल से ही शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और इसने दुनिया के हर कोने से विद्वानों को आकर्षित किया है. यह सभी धर्मों के बुद्धिजीवियों और विद्वानों के लिए ज्ञान का मिलन स्थल रहा है.

राष्ट्रपति ने कहा, अति प्राचीन काल से ही यह शहर विविध संस्कृतियों और धर्मों का विलय स्थल है. हमारी लोककथाओं में ऐसी अनेक कहानियां हैं जो यह बताती हैं कि किस प्रकार भगवान बुद्ध और भगवान महावीर ने अपने आध्यात्मिक भ्रमण के दौरान जनकपुर की यात्रा की.

इसके अलावा, हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और इस्लाम की जड़ें भी जनकपुर में पाई गई हैं. यह ऐसा शहर है जिसकी स्थापना विद्वता, आतिथ्य और समन्वयता की नींव पर हुई है.

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत नेपाल के साथ विविध क्षेत्रों में अपनी भागीदारी को बहुत महत्व देता है. एक घनिष्ठ एवं मैत्रीपूर्ण पड़ोसी के रूप में भारत की नेपाल में शांति, स्थिरता और समृद्धि के बारे में गहरी दिलचस्पी है.

उन्होंने समग्र आर्थिक विकास और वहां की जनता के शांतिपूर्ण और समृद्ध जीवन को सुनिश्चित करने के लिए नेपाल की जनता और सरकार के प्रयासों की सराहना की.

उन्होंने कहा, भारत को नेपाल के साथ अपनी घनिष्ठ विकास भागीदारी और नेपाल की मैत्रीपूर्ण जनता की उपलब्धियों के बारे में गर्व होता है.

भारत की जनता और सरकार आपसी विश्वास और आपसी लाभ के आधार पर नेपाल के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों का विस्तार करने और उन्हें मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

राष्ट्रपति ने कहा कि जनकपुर का आर्थिक विकास पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने में निहित है. हाल ही में, जनकपुर और अयोध्या ने अपने प्राचीन संबंधों को दोनों शहरों के मध्य हुए अनुबंध से मजबूत बनाया है.

लाखों तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं से युक्त रामायण पर्यटन सर्किट के विकास से न केवल रोजगार के अवसर जुटेंगे बल्कि हमारी साझी विरासत की कहानी भी मजबूत होगी. जनकपुर आध्यात्मिक और भौगोलिक दोनों दृष्टि से भारत के बहुत करीब है.

राष्ट्रपति ने कहा, इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि हम सीमा बुनियादी ढांचे के विकास तथा लोगों के आवागमन में सहायता के लिए कनेक्टिविटी के बारे में पर्याप्त ध्यान दें.

राष्ट्रपति ने जनकपुर के चारों ओर परिक्रमा मार्ग पर दो धर्मशालाओं का निर्माण कराए जाने की घोषणा की. उन्होंने आशा व्यक्त की है कि इन दोनों धर्मशालाओं से भारत और नेपाल के तीर्थयात्रियों को लाभ होगा.

राष्ट्रपति ने कहा कि हम भारत और नेपाल के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजदूत हैं. हम संयुक्त प्रयासों से दुनिया में भगवान राम और देवी सीता द्वारा दिए गए शांति और प्रेम के संदेश का प्रचार कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, अपने पूर्वजों की विरासत को मजबूत बनाने की हमारी साझा जिम्मेदारी है जो वही हमारे पूर्वजों के लिए उचित श्रद्धांजलि होगी. आइये हम सभी उनका आशीर्वाद लेकर इस महान उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मिलजुल कर काम करें.

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