माल्या में कानून के प्रति सम्मान की कमी, कोर्ट ने जारी किया गैरज़मानती वारंट

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नई दिल्ली. फेरा उल्लंघन मामले में कथित रूप से समन की तामील नहीं करने के लिए विजय माल्या के खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी किया गया है.

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा, देश के कानून के प्रति माल्या में सम्मान की कमी है और भारत लौटने का कोई इरादा नहीं है.

अदालत ने यह भी कहा, माल्या का यह दावा गलत और प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वाला है कि वह भारत लौटना चाहते हैं लेकिन उनका पासपोर्ट निरस्त कर दिया गया है.

पटियाला हाउस कोर्ट ने फेरा उल्लंघन और चेक बाउंस मामले में विजय माल्या के खिलाफ दो गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं.

मौजूदा मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने माल्या के खिलाफ विदेशी विनिमय नियमन अधिनियम (FERA) के तहत एक मामला दर्ज किया था.

एजेंसी ने फेरा के सेक्शन 40 के तहत माल्या को समन जारी किया था और एक जांच के संबंध में एजेंसी के सामने हाजिर होने का निर्देश दिया था.

माल्या पर आरोप है कि लंदन स्थित बेनेटन फॉर्म्युला लि. के फ्लेवियो ब्रिटोर के साथ एक ट्रांजैक्शन के संबंध में उन्होंने फेरा रेग्युलेशन का उल्लंघन किया था. उसी मामले में यह जांच चल रही है.

वहीं, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट 7.5 करोड़ रुपये के चेक बाउंस के मामले में माल्या के खिलाफ चार केस दर्ज करवा चुका है.

माल्या जब किंगफिशर के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर थे, तब उनकी एयरलाइन्स ने दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी लिमिटेड (DIAL) को कुल 7.5 करोड़ रुपए के चार चेक जारी किए थे. लेकिन एयरलाइन्स के बैंक अकाउंट में बैलेंस नहीं होने की वजह से ये बाउंस हो गए

ईडी का कहना है कि किंगफिशर ब्रैंड के विदेश में प्रमोशन के लिए लंदन स्थित बेनेटन फॉर्म्युला लि.के साथ दिसंबर 1995 में हुए एक करार के संबंध में माल्या को पूछताछ के लिए चार बार समन जारी किया गया है.

जब माल्या पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुए तो उनके खिलाफ यहां एक कोर्ट में 8 मार्च, 2016 को एक शिकायत दर्ज कराई गई और बाद में फेरा के तहत उन पर मामला दर्ज किया गया.

एजेंसी का कहना है कि फेरा नियमों का उल्लंघन करते हुए आरबीआई की पूर्व मंजूरी के बैगर कथित रूप से पैसे का भुगतान किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने उनको हलफनामा दायर कर देश-विदेश में जमा की गई सारी संपत्ति की जानकारी देने को कहा था. इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट माल्या को भगोड़ा घोषि‍त कर चुका है.

उल्लेखनीय है कि माल्या पर बैंकों का 9400 करोड़ रुपए बकाया है. उनके खिलाफ 17 बैंकों के कन्सोर्टियम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. कोर्ट ने माल्या को हलफनामा दायर करने के लिए चार हफ्तों का समय दिया है.

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