क्या सचमुच फौजी था भी, खुदकुशी करने वाला तथाकथित पूर्व सैनिक!

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जैसे रोहित वेमुला फ़र्ज़ी दलित था वैसे ही राम किशन एक फ़र्ज़ी Ex Serviceman था.

उसने सिर्फ 6 साल फ़ौज की नौकरी की. बाकी 24 साल DSC की चौकीदारी में बिताये. DSC की चौकीदारी की तुलना हमारे फौजियों के शौर्य और पराक्रम से न करें.

भारतीय नौसेना में कार्यरत एक मित्र चंद्रपाल सिंह ने इस बारे में आँखे खोल देने वाली जानकारी दी है.

उनके मुताबिक़, राम किशन तो फ़ौज में कभी था ही नहीं. वो तो TA बोले तो Territorial Army में था.

उसने 105 इन्फेंट्री बटालियन (TA) राजपूताना राइफल्स में 6 साल नौकरी की है. TA वाले तो फौजी होते ही नहीं.

आपको याद होगा ये सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी और फिल्म एक्टर अक्षय कुमार भी TA में कर्नल हैं.

राम किशन ने 6 साल भी आर्मी में नहीं बल्कि टेरिटोरियल आर्मी में नौकरी की है जिनको बन्दूक ढंग से पकड़ने तक का मौका नहीं मिलता.

अब टेरिटोरियल वालों को भी गलती से DSC में भर्ती का चांस दे देते हैं और DSC में 15 साल नौकरी वाला आदमी पेंशन का हकदार होता है.

अगर कोई आदमी फ़ौज में पेंशन पकाकर DSC के 15 साल भी पूरे कर ले तो DSC के नौकरी के समय फ़ौज की पेंशन और डीएससी की तनख्वाह दोनों और 15 साल बाद फ़ौज और डीएससी दोनों की अलग अलग पेंशन यानि डबल पेंशन पाता है.

ये एक नौकरी की तनख्वाह के साथ पिछली नौकरी की पेंशन और बाद में डबल पेंशन पाने की छूट इधर रक्षा मंत्रालय के अलावा और कहीं नहीं मिलेगी.

मीडिया और विपक्षी दलों सवारा अभी तक ये बताया जा रहा है कि राम किशन ने 30 वर्ष आर्मी में नौकरी की.

सबसे पहले तो राम किशन ग्रेवाल की हकीकत जान लीजिए. उन्होंने सिर्फ 6 साल सेना की नौकरी की और फिर डिस्चार्ज ले लिया.

राम किशन ने फ़ौज की नौकरी छोड़ने के बाद DSC यानी Defence Security Corpse नामक एक अर्धसरकारी संगठन में 24 साल तक नौकरी की.

ये DSC सैन्य और सामरिक महत्व के संस्थानों की सुरक्षा का काम करती है. इसमें आम तौर पर retired फौजी भाइयों को रोजगार देने के लिए ड्यूटी पे रख लिया जाता है.

जैसे आजकल CISF है या निजी सुरक्षा एजेंसियां हैं वैसे ही 1947 में इस DSC का गठन हुआ था. इसमें आमतौर पर retired फौजी भाई अपने घर के नज़दीक रोज़गार पा जाते हैं.

फौजी की पोस्टिंग देश के किसी भी कोने में, यथा सियाचिन, कश्मीर, असम, चीन तिब्बत बॉर्डर, या लेह लद्दाख कहीं भी हो सकती है जबकि DSC का जवान सारी जिंदगी एक ही स्टेशन पर पहरेदारी / चौकीदारी / सुरक्षा गार्ड बन के बिता देता है .

राम किशन ने सिर्फ 6 साल सेना में नौकरी की और बाकी 24 साल वो DSC में रहे. आज कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के साथ साथ पूरा मीडिया जो राम किशन को exservice man बता रहा है, वो गलतबयानी है.

हकीकत ये है कि रामकिशन भिवानी जिले के बामला गाँव का पूर्व सरपंच था, जिस पर खुले में शौच मुक्त भारत के अभियान में सरकारी पैसे के गबन का आरोप है.

आरोप है कि राम किशन ने गाँव के शौचालय बनाने में बड़ा घोटाला किया था जिसके चलते इसके खिलाफ जांच बैठायी गयी है.

इसके अलावा ये जो दुष्प्रचार किया जा रहा है कि इसने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर से मिलने का समय माँगा, वो भी झूठ है क्योंकि इसने 31 अक्टूबर को रक्षा मंत्री को पत्र लिखा और एक दिन बाद ही आत्महत्या कर ली.

सवाल ये उठता है कि आम आदमी पार्टी के धरने में उसको आत्महत्या करने के लिए किसने उकसाया?

उसके पास सल्फास कहां से आयी? कब खरीदी? किसने ला कर दी? क्या ‘किसी‘ ने उसे साज़िश के तहत आत्म हत्या के लिए उकसाया?

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