अब यह युद्ध पार्टी और विचारधारा से ऊपर उठ बन चुका है धर्मयुद्ध

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जिसने चौबीस साल नौकरी की हो, ठीक – ठाक पेंशन मिल रही हो; गाँव में खेती -बाड़ी हो , बेटे नौकरी कर रहे हों और खुद सरपंच रह चुका हो.

ग्रामीण परिवेश को जानने वाले बड़ी आसानी से बता देंगे कि एसे की छाती कितनी चौड़ी होती है ..लोग लम्बरदार ..प्रधान जी ..फौजी भाई जैसे सम्मानित शब्दों से अभिवादन करते हैं …आस पड़ोस के लोग सलाह – मशविरा करने आते हैं …

ऐसे व्यक्ति का दो – चार हजार की रकम के लिए आत्महत्या करना अपने आप में बहुत बड़ा संदेह पैदा करता है ..तमाम लोग शंका के घेरे में आते हैं ..

आज की तारिख में सेना से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति मोदी जी को युग प्रवर्तक के रूप में देखता है …पहले OROP फिर साजो-सामान उसके बाद सेना की सुख – सुविधा और मनोबल पर ध्यान …सर्जिकल स्ट्राइक ने तो कमाल ही कर दिया.

उसके बाद सेना के साथ दीवाली मनाना …कुल मिलाकर सेना में मोदी जी की लोकप्रियता चरम पर है ..इतनी चरम पर कि जैसा आजाद भारत में कभी किसी ने नहीं देखा …

किसी भी राष्ट्र के लिए सेना का मनोबल ऊँचा रहना गर्व और संतोष का विषय है पर दुश्मनों के लिए अवसाद का ….सेकुलर गिद्धों की जमात मोदी का विजय रथ उत्तर प्रदेश में किसी भी हाल में रोकना चाहते हैं, उसके लिए चाहे देश का सौदा ही क्यों ना करना पड़े …..

सेना और सैनिक के साथ प्रत्येक देशभक्त नागरिक का मनोवैज्ञानिक जुड़ाव होता है ..यह बात सेकुलर गैंग अच्छी तरह समझती है, इसी मनोविज्ञान को भुनाने के लिए कजरी गैंग ने एक एसे भूतपूर्व सैनिक को खोजा जिसकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा हो ….

चूँकि रामकिशन ग्रेवाल सरपंच रह चुके थे उनकी राजनितिक महत्वाकांक्षा जाग गई …क्या सौदा हुआ यह तो जांच का विषय है पर पिता – पुत्र के वार्तालाप का ऑडियो सुनने से ही शक बहुत गहरा जाता है ..

कोई भी बेटा, अपने बाप से बात करते हुए फोन का ऑडियो रिकार्ड करे …यह जानने के बाद भी कि बाप ने सल्फास खा लिया है चुप – चाप तठस्थ रहे अपने आप में असामान्य घटना है …या तो बेटे को मालूम है कि बाप नौटंकी कर रहा है या फिर बेटा सब जान रहा है …तमाम सुराख यहीं हैं ..पुलिस थोड़ी सी ऊँगली टेढ़ी करेगी तो घी भी निकलेगा …

ऑडियो में स्पष्ट है कि पीछे से कुछ लोग दिवंगत को निर्देष दे रहे हैं. यही लोग हैं जो सेकुलर गैंग और रामकिशन के बीच में कड़ी का काम कर रहे होंगे. इन सबके बाद कजरी और राहुल के चेहरे की चमक सब कुछ बता रही है; जैसे गिद्ध को लाश ….

ममता बानो का तुरंत बयान देना बहुत कुछ कह रहा है… और उसे यदि एक पंक्ति में कहा जाय तो लगता यह है कि “प्रशांत किशोर ने सुपारी सिर्फ कांग्रेस से नहीं ली है बल्कि पूरे सेकुलर गैंग से ली है”

इस पटकथा के पटाक्षेप की लकीरें बहुत भयानक दिख रही हैं. अब यह युद्ध पार्टी और विचारधारा से बहुत ऊपर उठ चुका है. यह अब धर्मयुद्ध बन चुका है.
अब यह देशभक्त बनाम देशद्रोही हो गया है. साम, दाम, दंड और भेद के सभी दांव खेले जायेंगे ….हिन्दुओं मायावी शक्तिवों से अति सावधान रहकर चलने का समय आ गया है …अगला दांव भविष्य के गर्त में छुपा है.

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जन्म : 18 अगस्त 1979 , फैजाबाद , उत्त्तर प्रदेश योग्यता : बी. टेक. (इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग), आई. ई. टी. लखनऊ ; सात अमेरिकन पेटेंट और दो पेपर कार्य : प्रिन्सिपल इंजीनियर ( चिप आर्किटेक्ट ) माइक्रोसेमी – वैंकूवर, कनाडा काव्य विधा : वीर रस और समसामायिक व्यंग काव्य विषय : प्राचीन भारत के गौरवमयी इतिहास को काव्य के माध्यम से जनसाधारण तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत, साथ ही राजनीतिक और सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग के माध्यम से कटाक्ष। प्रमुख कवितायेँ : हल्दीघाटी, हरि सिंह नलवा, मंगल पाण्डेय, शहीदों को सम्मान, धारा 370 और शहीद भगत सिंह कृतियाँ : माँ भारती की वेदना (प्रकाशनाधीन) और मंगल पाण्डेय (रचनारत खंड काव्य ) सम्पर्क : 001-604-889-2204 , 091-9945438904

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