आम्बा हल्दी या आमा हल्दी : किचन गार्डन में उगाइये सफेद हल्दी भी

आपने आज तक सिर्फ पीली हल्दी देखी होगी, आज मैं आपको दिखा रही हूँ सफेद हल्दी जिसे कुछ लोग अंबा हल्दी या आमा हल्दी कहते हैं, लेकिन गुजरात में इसे आम्बा हल्दी कहा जाता है.

हमारे पड़ोस में एक आंटी गुजराती है, जब भी गुजरात से लौटती है, मेरे लिए ऐसी कोई चीज़ ज़रूर लेकर आती है जो मेरे शहर में नहीं मिलती. क्योंकि उन्हें पता है मैं गुजराती हूँ और उनकी लाई हुई चीज़ों में माँ सा प्यार करती हूँ.

क्योंकि मेरी माँ ने बचपन में मुझे ऐसी बहुत सारी चीज़ें खिलाई है जिसका स्वाद मेरी ज़ुबान पर उम्र भर रहेगा. उसमें से एक है ये आम्बा हल्दी.
आंटी पिछली बार गुजरात से मेरे लिए आम्बा हल्दी लेकर आई.

मैंने उसे खाया नहीं पता है क्यों क्योंकि मैं यदि उस दिन वो थोड़ी सी आम्बा हल्दी खा लेती तो आज आपके सामने इस फोटो में दिख रही अपने किचन गार्डन में ऊगी खूब सारी हल्दी के गुण नहीं बता पाती. उसे मैंने अपने आँगन में बो दिया था और इस मौसम में मिली मुझे ढेर सारी आम्बा हल्दी.

जी हाँ, ऐसी भी हल्दी होती है जिसका उपयोग हम मसालों में नहीं करते लेकिन इसकी उपयोगिता पीली हल्दी से बिलकुल उन्नीसी नहीं.

आमा हल्दी का वानस्पतिक नाम क्यूरकुमा अमाडा है. इसमें कच्चे आम की सी गन्ध आती है. इसीलिए इसे आमा हल्दी या आम्रगन्धि हरिद्रा कहा जाता है.

इस प्रकार की हल्दी भारत के प्रायः सभी प्रान्तों में विशेष रूप से बंगाल, कोंकण, गुजरात और तमिलनाडु में उत्पन्न होती है.

आमा हल्दी शीतल, मधुर, पित्तशामक, आम की सी गन्ध वाली, पेट से वायु निकालने वाली, भोजन का पाचन कराने वाली, भूख बढ़ाने वाली एवं मल बांध कर लाने वाली होती है.

सुगन्धित होने के कारण इसे चटनी आदि बनाने में उपयोग में लाते हैं. मिठाइयों आदि में भी आम की गन्ध लाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है. इसे आप काटकर सिर्फ नमक के पानी में रखकर भी साल भर तक खा सकते हैं. जैसे मेरी माँ खिलाया करती थी.

आचार्य बालकृष्ण ने आम्बा हल्दी के कुछ गुण बताए हैं मैं आपको आज वो बताने जा रही हूँ –

परिचय : आम्बा हल्दी के पेड़ भी हल्दी की ही तरह होते हैं. दोनों में अंतर यह है कि आंबा हल्दी के पत्ते लम्बे तथा नुकीले होते हैं. आंबा हल्दी की गांठ बड़ी और भीतर से हल्की पीली लगभग सफेद होती है, आंबा हल्दी में सिकुड़न तथा झुर्रियां नहीं होती हैं.

गुण : यह वायु को शांत करती है, पाचक है, पथरी को तोड़ने वाली, पेशाब की रुकावट को खत्म करने वाली, घाव और चोट में लाभ करने वाली, मंजन करने से मुंह के रोगों को खत्म करने वाली है. यह खांसी, सांस और हिचकी में लाभकारी होती है.

विभिन्न रोगों में आंबा हल्दी से उपचार:

1 सूजन पर: – आंबा हल्दी को ग्वारपाठा (ऐलोवेरा) के गूदे पर डालकर कुछ गरम करके बांधने से सूजन दूर होती है तथा घाव को भरती है.

2 शीतला (मसूरिका) ज्वर के निशान होने पर: – आमाहल्दी, सरकण्डे की जड़ और जलाई हुई कौड़ी को कूटकर छान लें. फिर भैंस के दूध में मिलाकर रात के समय चेहरे पर लगाकर सो जायें.
पानी में भूसी को भिगो दें. सुबह और शाम उसी भूसी वाले पानी से मुंह को धोने से माता के द्वारा आने निशान (दाग-धब्बे) दूर हो जाते हैं.

3 चोट लगने पर: – चोट सज्जी, अम्बा हल्दी 10-10 ग्राम को पानी में पीसकर कपड़े पर लगाकर चोट (मोच) वाले स्थान पर बांध दें.

आंबा हल्दी को पीसकर, गरम करके बांधने से चोट को अच्छा करती है तथा सूजन दूर होती है.

पपड़िया कत्था 20 ग्राम अम्बा हल्दी 20 ग्राम कपूर, लौंग 3-3 ग्राम पानी में पीसकर चोट मोच पर लगाकर पट्टी बांध दें.

अम्बाहल्दी, मुरमक्की, मेदा लकड़ी 10-10 ग्राम लेकर पानी में पीसकर हल्का गर्म कर चोट पर लगायें.

4 घाव: – अम्बाहल्दी, चोट सज्जी 10-10 ग्राम पीसकर 50 मिलीलीटर गर्म तेल में मिला दें. ठंडा होने पर रूई भिगोकर घाव, जख्म पर बांध दें.

5 हड्डी कमजोर होने पर:- चौधारा, अम्बा हल्दी 10-10 ग्राम पीसकर घी में भून लें. उसमें सज्जी और सेंधानमक 5-5 ग्राम पीसकर मिला लें. फिर टूटी हड्डी और गुम चोट पर बांधने से लाभ होता है.

अम्बा हल्दी 3-3 ग्राम पानी से सुबह-शाम लें और मैदालकड़ी, कुरण्ड, चोट सज्जी, कच्ची फिटकरी, अम्बा हल्दी 10-10 ग्राम पानी में पीसकर कपड़े पर फैलाकर चोट पर रखकर रूई लगाकर बांध दें.

6 गिल्टी (ट्यूमर): – आमाहल्दी, अलसी, घीग्वार का गूदा और ईसबगोल को पीसकर एक साथ मिलाकर आग पर गर्म करने के बाद गिल्टी पर लगाने से लाभ होता है और सूजन मिट जाती है.

10 ग्राम आमाहल्दी, 6 ग्राम नीलाथोथा, 10 ग्राम राल, 6 ग्राम गूगल और 10 ग्राम गुड़ इसमें से सूखी वस्तुओं को पीसकर और उसमें गुड़ मिलाकर बांधें तो आराम होगा और जल्द ही फूट जायेगा.

आमाहल्दी, चूना और गुड़ सबको एक ही मात्रा में लेकर पीसे और बद पर लेप कर दें. इससे गिल्टी जल्द फूट जायेगी. ”

7 पेट में दर्द होने पर: – आमाहल्दी और कालानमक को मिलाकर पानी के साथ पीने से पेट के दर्द में आराम होता है.

8 उपदंश (फिरंग) रोग : – आमाहल्दी, राल और गुड़ 10-10 ग्राम, नीलाथोथा और गुग्गुल 6-6 ग्राम इन सबको मिलाकर पीस लें और बद पर बांधे इससे तुरन्त लाभ मिलता है.

9 पीलिया रोग: – सात ग्राम आमाहल्दी का चूर्ण, पांच ग्राम सफेद चंदन का चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह और शाम सात दिन तक खाने से पीलिया रोग मिट जाता है.

10 खाज-खुजली और चेहरे का काला दाग:- आमाहल्दी को पीसकर शरीर में जहां पर खाज-खुजली हो वहां पर लगाने से आराम आता है.

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