रचनाकार समझें अपनी ज़िम्मेदारी

मनुष्य को नीचे आने में कोई प्रयास नहीं करना पड़ता. बल तो तब लगता है जब उसे ऊपर उठना होता है. …..

रचनाकार आने वाले समाज की नींव के पत्थर होते हैं. फिर चाहे वो चित्रकार हो, संगीतकार हो, गायक हो, या लेखक. आज जो कुछ भी रचा जा रहा है वो आनेवाली पीढ़ी के लिए उस सीढ़ी का काम करेगा, जिस पर से या तो वो नई ऊंचाइयां छूएंगे या पतन की ओर उतरेंगे.

यहाँ पतन का अर्थ चारित्रिक पतन से बिलकुल नहीं है. यहाँ पतन का तात्पर्य सिर्फ खुद को संकुचित कर लेने से है, सिकोड़ लेने से है, जीवन से अछूता रहने से है. किसी रचनाकार की कोई एक रचना भी उसके पाठक, श्रोता या दर्शक को उस सीढ़ी से एक कदम नीचे ले जाती है तो वह रचनाकार उस व्यक्ति से जुड़े उन तमाम लोगों के पतन का जिम्मेदार होगा जो साथ साथ न जाने कितने लोगों को उस सीढ़ी पर एक कदम नीचे ले आया होगा.

हमारा विज्ञान ही तो कहता है ना कि वस्तु गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ऊपर से नीचे की ओर अपने आप आ जाती है तो मनुष्य को भी नीचे आने में कोई प्रयास नहीं करना पड़ता. बल तो तब लगता है जब उसे ऊपर उठना होता है.

और यदि किसी रचनाकार की कोई एक रचना किसी एक व्यक्ति को उस सीढ़ी पर एक कदम ऊपर उठाती है तो वह रचनाकार उस व्यक्ति के अलावा उस पूरे समूह की प्रगति के लिए उत्तरदायी होगा जो व्यक्ति ने अपने चारों ओर बनाया है.

यदि रचनाकार अपनी इस जिम्मेदारी को गंभीरता से ले लें तो हमारी आनेवाली पीढ़ी न जाने किन ऊंचाइयों को छू ले. लेकिन जिम्मेदारी अकेले रचनाकारों की नहीं बल्कि उसके पाठक, श्रोता या दर्शकों की भी बराबरी की है कि वह रचनाकार की रचना को बुद्धि के किस स्तर से परख रहा है.

जब रचनाकार पूरे समाज के लिए हैं तो उसको परखने वाली नज़र व्यक्तिगत न होकर उस समूह की होने चाहिए जिसको लेकर वह उस सीढ़ी पर खड़ा है.

रचनाकार यदि अपनी रचना के प्रति गंभीर होकर कुछ रच रहा है तो हमें भी उसे व्यक्ति विशेष की रचना न समझकर उस समूह की ओर से एक प्रयास समझना चाहिए जो हमें नई ऊंचाइयो से परिचय करवाने में हमारी मदद कर रहा है.

इस दुनिया में सब स्वतन्त्र होने के बावजूद परस्पर जुड़े हुए हैं जिस दिन इस परस्परता का अर्थ हम जान लेंगे तो हम उस सीढ़ी के उस छोर पर पहुँच जाएंगे जो हमें एक नई दुनिया के द्वार पर खड़ा कर देगी.

मेरी यह छोटी सी रचना सिर्फ उस सीढ़ी को मजबूत करने का छोटा सा प्रयास मात्र है. और मुझे इंतज़ार है उन हाथों का जो उस सीढ़ी को थामे रखने में मेरे साथ है.

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